प्र1.
थोड़ा ठहरिए। स्वयं और अपने आस-पास की वस्तुओं को देखिए। इनमें से प्रत्येक का उद्गम-स्रोत क्या है? किसी-न-किसी मोड़ पर ये सभी प्रकृति की ओर ले जाती हैं, यहाँ तक कि आपके वस्त्र पर लगा प्लास्टिक का बटन भी।
उत्तर
कमरे की हर वस्तु का सूत्र अंततः प्रकृति तक जाता है — प्रायः कई चरणों से होकर, और इसीलिए उसका उद्गम भूल जाना आसान है।
| वस्तु | किससे बनी | जो आता है |
|---|---|---|
| सूती कमीज़ | कपास का रेशा | मृदा, जल और सूर्य के प्रकाश पर उगे पौधे से |
| प्लास्टिक का बटन | पेट्रो-रसायनों से बना बहुलक | खनिज तेल से — लाखों वर्ष पहले दबे जीवों के अवशेष |
| कॉपी और यह पाठ्यपुस्तक | कागज़ | वृक्षों की लुगदी से |
| परकार, ब्लेड, साइकिल | इस्पात | धरती से निकाला लौह अयस्क, कोयले से गलाया गया |
| खिड़की का काँच | काँच | सिलिका रेत, तीव्र ताप पर पिघलाई गई |
| कक्षा की दीवार | सीमेंट, रेत, ईंट | चूना-पत्थर, रेत, चिकनी मिट्टी — और बहुत सारी ऊर्जा |
| पंखे की बिजली | विद्युत संयंत्र में उत्पन्न | कोयला, प्रवाहित जल, सूर्य का प्रकाश या पवन |
| आपका भोजन | अनाज, सब्ज़ियाँ, दूध | मृदा, जल, सूर्य का प्रकाश और पौधों पर पले पशु |
| आपका अपना शरीर | भोजन, जल, वायु | निरंतर प्रकृति से — इस सूची में आप भी अपवाद नहीं हैं |
अध्याय ठहरने को क्यों कहता है: वस्तु और उसके उद्गम के बीच जितने अधिक चरण होंगे, वह उतनी ही कम प्राकृतिक दिखेगी। बटन निर्मित लगता है और आम प्राकृतिक — जबकि दोनों का आरंभ प्रकृति में है। एक बार यह शृंखला जोड़ लेने पर ‘संसाधन’ दूर की खानों और वनों का शब्द नहीं रह जाता, वह आपकी मेज़ पर रखी वस्तुओं का शब्द बन जाता है। दृष्टि का यही परिवर्तन पूरे अध्याय का उद्देश्य है।
स्वयं जाँचिए: आज सुबह छुई हुई कोई पाँच वस्तुएँ चुनिए। प्रत्येक के लिए तीन तीरों की शृंखला लिखिए — वस्तु → सामग्री → प्रकृति का तत्व। जो शृंखला पूरी न हो, वही सबसे रोचक है — पता कीजिए कि वह किससे बनी है।