कक्षा ८ सामाजिक विज्ञान अध्याय 1 प्राकृतिक संसाधन एवं उनका उपयोग के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

प्रकृति का कोई तत्व तभी संसाधन बनता है जब मानव वास्तव में उसका उपयोग कर सके। अध्याय तीन शर्तें रखता है — वह तकनीकी रूप से सुलभ हो, उसका दोहन आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो और वह सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य हो। इसीलिए समुद्र की अत्यधिक गहराई में स्थित खनिज तेल या पवित्र उपवनों के वृक्ष संसाधन नहीं कहलाते। संसाधनों का वर्गीकरण एक से अधिक प्रकार से हो सकता है। उपयोग के आधार पर — जीवन के लिए आवश्यक संसाधन (वायु, जल, मृदा), सामग्री के लिए संसाधन (लकड़ी, संगमरमर, कोयला, सोना) तथा ऊर्जा के लिए संसाधन (कोयला, जल, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस, सूर्य का प्रकाश, पवन)। नवीकरणीयता के आधार पर — नवीकरणीय और अनवीकरणीय। प्रकृति पुनर्स्थापन (मूल स्वस्थ अवस्था में लौटना) और पुनर्जनन (नवजीवन की रचना) से कार्य करती है, ऐसे चक्रों में जहाँ कुछ भी अपशिष्ट नहीं होता। कोई संसाधन तभी तक नवीकरणीय है जब तक यह लय बाधित न हो —

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दअर्थअध्याय में कहाँ आया हैउदाहरण / विवरण
प्रकृतिउन सजीव और निर्जीव रूपों की समग्रता जो हमारे पर्यावरण का भाग हैं, परंतु मानव द्वारा निर्मित नहीं हैंपृष्ठ 2 — ‘प्रकृति कब एक संसाधन बन जाती है?’वन में खड़ा एक वृक्ष
प्राकृतिक संसाधनवे सामग्रियाँ और पदार्थ जो प्रकृति में पाए जाते हैं और मानव के लिए मूल्यवान होते हैंपृष्ठ 3वायु, जल, मृदा, कोयला, खनिज तेल, लकड़ी, धातु अयस्क, बहुमूल्य पत्थर
दोहनयहाँ इसका कोई नकारात्मक अर्थ नहीं — इसका आशय है प्राकृतिक संसाधनों का निष्कर्षण, उपयोग और उपभोगपृष्ठ 2 (कोष्ठक में दी गई टिप्पणी)कोयले का खनन; भूजल का पंपिंग
नवीकरणीय संसाधनजिसे प्रकृति पुनर्स्थापित और पुनर्जनित करती रहती है — परंतु तभी जब हम उसे उसके नवीनीकरण की गति से अधिक तेज़ी से न लेंपृष्ठ 5–6सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, प्रवाहित जल से उत्पन्न ऊर्जा, वनों से प्राप्त लकड़ी
अनवीकरणीय संसाधनलंबी अवधि में निर्मित; जिस अनुपात से हम उपयोग करते हैं उस अनुपात में इनकी पुनःपूर्ति नहीं हो सकतीपृष्ठ 8कोयला, पेट्रोलियम, लोहा, ताँबा, सोना
पुनर्स्थापनकिसी क्षीण या क्षतिग्रस्त वस्तु को उसकी मूल स्वस्थ अवस्था में पुनः लाने की प्रक्रियापृष्ठ 5त्वचा के घाव का भर जाना; दावानल के बाद वन का पुनः स्वस्थ होना
पुनर्जननप्रकृति की नवजीवन तथा फलने-फूलने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ निर्मित करने की क्षमता — यह पुनर्स्थापन से अधिक व्यापक हैपृष्ठ 5मूल रूप से उगने वाले वृक्ष लगाना जिससे पक्षी और गिलहरियाँ लौट आएँ
पारिस्थितिकी तंत्र के कार्यप्रकृति के स्वाभाविक रूप से किए जाने वाले कार्यपृष्ठ 7 — इसे अनदेखा न करेंवन का जल शुद्ध करना, मृदा-अपरदन रोकना, आवास देना
पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँवे प्राकृतिक प्रक्रियाएँ जब वे मनुष्यों के लिए लाभदायक होती हैंपृष्ठ 7स्वच्छ जल, संरक्षित कृषि भूमि, परागित फसलें
‘प्रचुरता का विरोधाभास’ / प्राकृतिक संसाधन अभिशापसंसाधनों से समृद्ध क्षेत्रों में आर्थिक वृद्धि का मंद रह जाना, क्योंकि वे संसाधनों को उच्च मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तित नहीं कर पातेपृष्ठ 11भारत ने ऐसे उद्योगों के विकास में निवेश करके इससे बचाव किया
वृक्षायुर्वेदपौधों और वृक्षों के अध्ययन एवं देखभाल पर केंद्रित प्राचीन भारतीय वनस्पति-विज्ञानपृष्ठ 16सुरपाल का वृक्षायुर्वेद, लगभग 10वीं शताब्दी
लोकसंग्रहभगवद्गीता का विचार कि सभी को अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं से ऊपर उठकर सभी की भलाई के लिए कार्य करना चाहिएपृष्ठ 18–19अध्याय का समापन-आग्रह — प्रकृति के संरक्षक बनें
  1. महत्वपूर्ण प्रश्न
  2. इसे अनदेखा न करें
  3. आइए विचार करें
  4. आइए विचार करें
  5. इसे अनदेखा न करें
  6. आइए पता लगाएँ
  7. आइए पता लगाएँ
  8. आइए पता लगाएँ
  9. आइए पता लगाएँ
  10. आइए पता लगाएँ
  11. आइए पता लगाएँ
  12. आइए पता लगाएँ
  13. पाठ्य प्रश्न
  14. प्रश्न और क्रियाकलाप
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