अन्वेषण अध्याय 1 प्रश्न और क्रियाकलाप

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आज जो संसाधन नवीकरणीय है, उसे कल अनवीकरणीय कैसे बनाया जा सकता है? कुछ ऐसे उपायों का वर्णन कीजिए जिनसे ऐसा होने से रोका जा सकता है।
उत्तर

केवल एक बात से : उसे प्रकृति के पुनर्स्थापन और पुनर्जनन की गति से अधिक तेज़ी से उपयोग करके। कोई संसाधन इसलिए नवीकरणीय नहीं होता कि वह किस पदार्थ का बना है — वह इसलिए नवीकरणीय है कि उसके नवीकरण की दर हमारे उपयोग की दर से अधिक है। इस तुलना को तोड़ दीजिए, और श्रेणी बदल जाती है।

उपयोग की दर < नवीकरण की दर → नवीकरणीय
उपयोग की दर > नवीकरण की दर → भंडार प्रतिवर्ष घटता है
यह लंबे समय तक चले → संसाधन व्यवहार में अनवीकरणीय हो जाता है

अध्याय के अपने उदाहरण —

नवीकरणीय संसाधनकिससे वह पलट जाता हैपरिणाम
वन / लकड़ीवृक्षों के बढ़ने की गति से अधिक तेज़ी से लकड़ी काटनाअंततः वन नष्ट हो जाते हैं (पृष्ठ 6)
भूजलवर्ष-दर-वर्ष पुनर्भरण से अधिक दोहनगहरा और महँगा पंपिंग, फिर अनुपलब्धता; पंजाब का लगभग 80% क्षेत्र ‘अति-दोहित’ (पृष्ठ 12, 14)
नदी का जलबिना उपचार का औद्योगिक अपशिष्ट, जो किसी जीव का भोजन नहीं बन पातानदी विषाक्त हो जाती है और जीवन का पोषण नहीं कर पाती (पृष्ठ 7)
मछलीव्यावसायिक अत्यधिक मछली पकड़ना, प्रजनन काल में भीतीव्र और व्यापक ह्रास — टूना का उदाहरण (पृष्ठ 6)
मृदारासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अनुचित उपयोगमृदा-क्षरण और फसल का ह्रास (चित्र 1.14, पृष्ठ 12)
हिमनद-पोषित नदियाँजीवाश्म ईंधन आधारित औद्योगीकरण और वनों की कटाई → तापमान वृद्धिहिमालय के हिमनद इतने शीघ्र पिघल रहे हैं कि वर्षा उनकी पूर्ति नहीं कर पाती, जिससे मैदानों की जल सुरक्षा संकट में है (पृष्ठ 6)

इसे रोकने के उपाय —

  1. उपयोग की दर नवीकरण की दर से तय कीजिए। उतनी ही लकड़ी काटिए जितनी पुनः उग सके; उतना ही भूजल लीजिए जितना पुनर्भरित हो सके। यही मूल नियम है, शेष सब इसी से निकलता है।
  2. पुनर्जनन काल की रक्षा कीजिए। प्रजनन काल में मछली न पकड़ना; भूमि के लिए परती वर्ष; चक्रीय चराई — वही पारंपरिक प्रथा जिसकी अध्याय पृष्ठ 6 पर प्रशंसा करता है।
  3. मूल प्रजातियों से वृक्षारोपण। पृष्ठ 5 स्पष्ट है : वहाँ मूल रूप से उगने वाले वृक्ष लगाने से पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्स्थापन होता है और पक्षी, गिलहरियाँ तथा अन्य जीव लौट आते हैं।
  4. केवल निकालिए नहीं, भरिए भी। पारंपरिक जल-संचयन, तालाबों और पोखरों का पुनरुद्धार, जल के अपव्यय में कमी, जल को प्रसंस्करित करके पुनरुपयोग (पृष्ठ 12)।
  5. चक्र में अपशिष्ट न जाने दीजिए। नदी तक पहुँचने से पहले अपशिष्ट का उपचार कीजिए, ताकि अपघटन का काम चलता रहे।
  6. मृदा को लौटाइए — भारी रासायनिक उपयोग के स्थान पर गोबर और अन्य प्राकृतिक उर्वरक, पलवार और बहु-फसलीकरण, जिन्होंने समग्र मृदा-प्रबंधन संभव बनाया था (पृष्ठ 12)।
  7. जीवाश्म ईंधन का जलना और वनों की कटाई घटाइए, क्योंकि यही तापमान वृद्धि हमारी नदियों के पीछे खड़े हिमनदों को पिघला रही है।
‘नवीकरणीय’ शब्द भ्रम में क्यों डाल सकता है: यह ऐसा लगता है मानो वस्तु का कोई स्थायी गुण हो। ऐसा नहीं है — यह दो गतियों के संबंध का कथन है। सूर्य का प्रकाश तो हमारे किए-धरे से बेपरवाह आता रहेगा, परंतु वन, मत्स्य-भंडार, मृदा और जलभृत केवल एक शर्त पर नवीकरणीय हैं — और वह शर्त निभाना या तोड़ना हमारे हाथ में है।
प्र2.
पाँच पारिस्थितिकी तंत्र कार्यों के नाम बताइए जो मानव के लिए उपयुक्त हैं।
उत्तर

पारिस्थितिकी तंत्र का कार्य वह है जो प्रकृति स्वाभाविक रूप से करती है; जब मनुष्य उससे लाभान्वित होते हैं, तब उसी को पारिस्थितिकी तंत्र सेवा कहा जाता है (पृष्ठ 7)। पाँच कार्य, साथ में उनका लाभ —

क्र.पारिस्थितिकी तंत्र का कार्य (प्रकृति क्या करती है)पारिस्थितिकी तंत्र सेवा (हमें क्या मिलता है)
1वृक्ष ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड सोखते हैंसाँस लेने योग्य वायु, और तापमान वृद्धि पर अंकुश
2वन जल को शुद्ध करता है जब वह मृदा और जड़ों से होकर बहता हैहमारे नालों, कुओं और नलों में स्वच्छ जल
3जड़ें और वनस्पति मृदा-अपरदन रोकती हैंसंरक्षित कृषि भूमि; नदियों और जलाशयों में कम गाद
4कीट, पक्षी और चमगादड़ फूलों का परागण करते हैंपरागित फसलें — फल, सब्ज़ियाँ, तिलहन और दलहन
5वन पशुओं को आवास देते हैं, तथा जीवाणु, फफूँद और कीट मृत पदार्थों का अपघटन करते हैंजैव-विविधता बनी रहती है और पोषक तत्व मृदा को लौटते हैं जिससे नए पौधे उगते हैं

यदि और माँगे जाएँ तो दो और : नदियाँ और वर्षा भूजल का पुनर्भरण करती हैं, जिससे हमें जल सुरक्षा मिलती है; और आर्द्रभूमियाँ तथा बाढ़-क्षेत्र बाढ़ के जल को सोख लेते हैं, जिससे नीचे की बस्तियाँ बचती हैं।

क्या आप जानते हैं? पृष्ठ 7 का ‘इसे अनदेखा न करें’ बॉक्स ऑक्सीजन वाले कार्य को गणित से जाँचने देता है। एक परिपक्व वृक्ष प्रतिदिन लगभग 275 लीटर ऑक्सीजन उत्पन्न करता है; एक मनुष्य को प्रतिदिन लगभग 350 लीटर चाहिए।
350 ÷ 275 = 1.27
अर्थात एक व्यक्ति को लगभग 1.3 परिपक्व वृक्षों के दिन भर के उत्पादन की आवश्यकता है — प्रति व्यक्ति एक से अधिक वृक्ष।
दोनों आँकड़े बदलते रहते हैं — वृक्ष के प्रकार से, और व्यक्ति की गतिविधि, ऊँचाई तथा भार से — पर उत्तर की दिशा नहीं बदलती।
कार्य और सेवा का भेद क्यों महत्वपूर्ण है: कार्य तो तब भी होता रहता है जब कोई देख न रहा हो; वह ‘सेवा’ तभी कहलाता है जब उससे कोई मानवीय लाभ जुड़ता है। उसे सेवा कहते ही वह गिनने योग्य बन जाता है — और जो गिना जा सके, उसे अनजाने में नष्ट करना कठिन हो जाता है, क्योंकि उसकी हानि दिखाई देने लगती है।
प्र3.
नवीकरणीय संसाधन क्या हैं? ये अनवीकरणीय संसाधनों से कैसे भिन्न हैं? लोग यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कर सकते हैं कि नवीकरणीय संसाधन हमारे और आने वाली पीढ़ियों के उपयोग के लिए उपलब्ध रहें? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर

नवीकरणीय संसाधन वे हैं जिन्हें प्रकृति समय के साथ पुनर्स्थापित और पुनर्जनित करती रहती है — इसलिए वे उपलब्ध बने रह सकते हैं, बशर्ते पुनर्स्थापन और पुनर्जनन की प्राकृतिक लय बाधित न हो। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, प्रवाहित जल से उत्पन्न ऊर्जा और वनों से प्राप्त लकड़ी अध्याय के उदाहरण हैं, और अध्याय हर बार शर्त भी जोड़ता है — यदि हम उनका प्रबंधन सातत्य विधियों से कर सकें।

अनवीकरणीय संसाधन लंबी अवधि में निर्मित होते हैं और जिस अनुपात से हम उन्हें उपयोग करते हैं, उस अनुपात में उनकी पुनःपूर्ति नहीं हो सकती — जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला और पेट्रोलियम, तथा खनिज एवं धातुएँ जैसे लोहा, ताँबा और सोना।

अंतर का आधारनवीकरणीयअनवीकरणीय
पुनःपूर्ति कैसेप्रकृति इन्हें मानवीय समयावधि में पुनर्स्थापित और पुनर्जनित करती है — वर्षा और पिघलते हिमनद नदियों को पोषित करते हैं, वन स्वयं को नवीनीकृत करते हैं, मृदा स्वयं का पुनर्निर्माण करती हैलाखों वर्षों में बने; व्यवहार में इनकी पुनःपूर्ति होती ही नहीं
उपयोग का प्रभावयदि उपयोग नवीकरण की दर के भीतर हो तो भंडार स्थिर रहता हैजितना उपयोग हुआ, भंडार उतना ही स्थायी रूप से कम
जुड़ी हुई शर्ततभी तक नवीकरणीय जब तक पुनर्जनन की लय बाधित न होकोई शर्त इसे नवीकृत नहीं कर सकती — केवल उपयोग की दर संभाली जा सकती है
उदाहरणसौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, प्रवाहित जल, वनों की लकड़ीकोयला, पेट्रोलियम, लोहा, ताँबा, सोना
दायित्वपूर्ण उपयोग का अर्थउपयोग कीजिए, पर नवीकरण की गति से अधिक नहींइतना विवेकपूर्ण उपयोग कि वे संधारणीय विकल्प मिलने तक चल सकें
अध्याय की चेतावनीवृक्षों के बढ़ने से अधिक तेज़ी से लकड़ी काटी तो वन नष्ट हो जाएँगेभारत का कोयला भंडार लगभग 50 वर्ष और चल सकता है, जबकि माँग बढ़ रही है

नवीकरणीय संसाधनों को उपलब्ध बनाए रखने के लिए लोग क्या कर सकते हैं —

  1. उपयोग को नवीकरण की दर के भीतर रखें — यही निर्णायक नियम है।
  2. संसाधन को उबरने का समय दें : प्रजनन काल में मछली न पकड़ना, भूमि के लिए परती अवधि, चक्रीय चराई।
  3. मूल प्रजातियों से वृक्षारोपण और पुनर्स्थापन, जिससे केवल वृक्षों की गिनती नहीं, पूरा पारिस्थितिकी तंत्र लौटे।
  4. जल का पुनर्भरण — छत का वर्षा-जल संचयन, तालाबों और पोखरों का पुनरुद्धार, अपव्यय में कमी, उपचारित जल का पुनरुपयोग।
  5. अपशिष्ट को बाहर रखें, ताकि नदियाँ और मृदा अपने चक्र पूरे कर सकें।
  6. मृदा को वापस दें — कम्पोस्ट, गोबर, पलवार और बहु-फसलीकरण से।

दो उदाहरण, विस्तार से —

उदाहरणक्या किया गयाक्या प्राप्त हुआ
सिक्किम की जैविक कृषि (पृष्ठ 16–17)पेमा के परिवार ने कम्पोस्ट खाद अपनाई, नीम और लहसुन से प्राकृतिक कीट-निरोधक बनाए, और वर्ष भर अनेक फसलें उगाईं। राज्य ने पूरे राज्य में जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया। आरंभ के वर्ष कठिन थे — वर्षों के रासायनिक उपयोग से मृदा की क्षमता लौटने तक उत्पादन घटा रहा2016 में सिक्किम शत-प्रतिशत जैविक राज्य बन गया और उसकी सारी कृषि भूमि जैविक प्रमाणित हो गई। स्थानीय जैव-विविधता फली-फूली, लाभदायक कीड़े और पक्षी लौटे; पर्यटन बढ़ा; कृषकों की आय औसतन 20 प्रतिशत बढ़ी। मृदा — एक नवीकरणीय संसाधन — फिर से पुनर्जनन की सीमा में आ गई
भूजल का पुनर्भरण (पृष्ठ 12)पारंपरिक जल-संचयन की पद्धतियाँ, तालाबों और पोखरों का पुनरुद्धार, जल के अपव्यय में कमी, तथा जल को प्रसंस्करित करके पुनरुपयोगपुनर्भरण फिर से दोहन की दर के निकट आता है, जिससे कुएँ वर्ष-दर-वर्ष गहरे नहीं होते जाते — यही उस भविष्यवाणी का उपाय है कि तीव्रता से बढ़ते हमारे नगरों में शीघ्र ही भूजल समाप्त हो जाएगा
सिक्किम केवल एक सुंदर कथा क्यों नहीं, एक मज़बूत उदाहरण है: वह सौदे के दोनों पक्ष ईमानदारी से दिखाता है। पहले उत्पादन घटा, और लगभग पाँच वर्ष बाद ही खेत फला-फूला। पुनर्जनन की सीमा पार कर चुका संसाधन उस क्षण ठीक नहीं हो जाता जब हम दबाव हटाते हैं — उबरने में भी समय लगता है, और उस अवधि में किसी को सहारा देना पड़ता है। इसीलिए यह परिवर्तन तब सफल हुआ जब राज्य की नीति उसके साथ थी, और अकेले एक परिवार के लिए शायद संभव न होता।
प्र4.
अपने घर और पड़ोस में ऐसी सांस्कृतिक प्रथाओं की पहचान कीजिए जो प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की ओर इंगित करती हैं।
उत्तर

उन साधारण आदतों को देखिए जिन्हें कोई ‘संरक्षण’ नहीं कहता। अधिकांश भारतीय घर इन्हीं से भरे हैं।

प्रथाकिसकी बचत
चावल-दाल धोया हुआ पानी पौधों में डालना; बचा हुआ पीने का पानी बर्तन में उड़ेलना, नाली में नहींजल — और उसमें घुले पोषक तत्व
बहते फव्वारे के बजाय बाल्टी से स्नान; जहाँ जल दुर्लभ है वहाँ बर्तन राख या रेत से माँजनाजल
ठंडे पानी के लिए मटका; दिनभर कूलर चलाने के बजाय आर-पार हवा और मोटी दीवारेंविद्युत
उतना ही पकाना जितना खाया जाए; बचा भोजन अगली सुबह काम में लेना; अन्न कभी न फेंकनाअनाज, जल और उन्हें उगाने में लगी ऊर्जा
रसोई के छिलके पशुओं को खिलाना या आँगन के कोने में कम्पोस्ट बनानामृदा की उर्वरता — अपशिष्ट भोजन बनकर लौटता है, ठीक प्रकृति के चक्र की तरह
कपड़े छोटे भाई-बहनों को देना; पुरानी सूती से कंथा, झाड़न या थैले बनाना; इस्पात-पीतल के बर्तन दशकों चलाना और मरम्मत करानाकपास, धातु और उन्हें बनाने की ऊर्जा
कबाड़ीवाला, जो अख़बार, काँच, प्लास्टिक और धातु वापस खरीदता हैहर पुनर्चक्रण योग्य वस्तु — एक पुरानी, चलती हुई पुनर्चक्रण व्यवस्था
बाज़ार के लिए कपड़े या जूट का थैला; दुकान से वही इस्पात का डिब्बा भरवानाप्लास्टिक, और इसलिए पेट्रोलियम
कपड़े, अनाज, पापड़ और अचार धूप में सुखानाईंधन और बिजली
तुलसी को प्रतिदिन जल; मंदिर के पास का पीपल या नीम कभी न कटना; पक्षियों के लिए दाना-पानीवृक्ष, तथा उन पर निर्भर पक्षी और कीट
तालाब, कुएँ और बावड़ियाँ समुदाय द्वारा स्वच्छ रखना; गाँव का साझा तालभूजल और सतही जल
फसल और पशुओं से जुड़े त्योहार — पोंगल, बिहू, ओणम, गोवर्धन पूजाठीक उसी क्षण कृतज्ञता जब प्रकृति ने दिया है — यही मनोवृत्ति ऊपर की सारी प्रथाओं के पीछे है

नमूना उत्तर: ‘हमारे घर में दादी सब्ज़ी धोया हुआ पानी कभी नाली में नहीं जाने देतीं; वह तुलसी और करी-पत्ते के पौधे में जाता है। कपड़े छत पर धूप में सूखते हैं और इस्तरी केवल विद्यालय की वर्दी पर होती है। हर दूसरे रविवार कबाड़ीवाला अख़बार, बोतलें और पुराने बर्तन ले जाता है, और माँ ने दरवाज़े पर बाज़ार के लिए कपड़े का थैला टाँग रखा है। हमारी गली में नुक्कड़ की दुकान के पास वाले नीम के चारों ओर चबूतरा बना है और उसकी डाल कोई नहीं काटता। इन्हें कोई पर्यावरण की प्रथा नहीं कहता — यह तो बस ऐसे ही होता आया है — पर इनमें से हर एक जल, बिजली, प्लास्टिक या कोई वृक्ष बचाती है।’

इन्हें ‘विवेकपूर्ण उपयोग’ क्यों कहा जाए: पृष्ठ 12 पर अध्याय की बात यही है कि पारंपरिक कृषि पद्धतियों में मृदा को धरती माता का अंग माना गया — अर्थात एक संबंध, न कि खींच लेने योग्य भंडार। जब संसाधन को अपने से बड़ी किसी वस्तु का अंग माना जाता है, तब संयम लागू कराने का नियम न रहकर आदत बन जाता है। इसीलिए ये प्रथाएँ बिना किसी निरीक्षक के पीढ़ियों तक चलती रहीं।
यह कीजिए: एक सप्ताह तक दो स्तंभों की डायरी रखिए — जब-जब आपने जल या बिजली का उपयोग किया, और जब-जब उपयोग से बचे। अंत में उन ‘बचे’ प्रविष्टियों पर निशान लगाइए जो किसी पारिवारिक आदत से हुईं, बिना सोचे। वही सबसे मूल्यवान हैं।
प्र5.
वर्तमान उपयोग के लिए वस्तुओं के उत्पादन में किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
उत्तर

अध्याय के चार उत्पादन-उदाहरणों से जो उत्तर निकलता है वह यह है कि उत्पादन को हर चरण पर परखना चाहिए — केवल इससे नहीं कि उत्पाद उपयोगी है या नहीं।

ध्यान देने योग्य बातक्या पूछेंअध्याय में कहाँ दिखता है
कच्चे माल का स्रोतक्या वह नवीकरणीय है, और क्या उसे नवीकरण की दर के भीतर लिया जा रहा है? यदि अनवीकरणीय है, तो क्या उसका उपयोग विवेकपूर्ण है और क्या कुछ भाग पुनर्चक्रित सामग्री से आ सकता है?पृष्ठ 6, 8, 17
प्रक्रिया से प्रदूषणप्रक्रिया वायु, जल और मृदा में क्या छोड़ती है, और क्या उसका उपचार बाहर जाने से पहले होता है?सीमेंट — सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों में एक; महीन धूल फेफड़ों को क्षति पहुँचाती है, पत्तियों पर जमकर उत्पादकता घटाती है, और मृदा तथा जल को प्रदूषित करती है (पृष्ठ 15)। बिना उपचार का औद्योगिक अपशिष्ट नदियों को विषाक्त करता है (पृष्ठ 7)
नियमन और अनुपालनक्या लागू मानकों का पालन हो रहा है?केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सीमेंट कारखानों के लिए दिशा-निर्देश, ताकि प्रदूषण न्यूनतम हो या समाप्त हो जाए (पृष्ठ 15)
सामग्री का चयनक्या वही काम करने वाला कोई कम प्रदूषण वाला विकल्प है?पारंपरिक पत्थर और मृदा, नई वनस्पति-आधारित सामग्रियाँ, व्यर्थ प्लास्टिक से पुनर्निर्मित सामग्री; जैसलमेर दुर्ग तथा ऑरोविले अर्थ इंस्टीट्यूट का आधुनिक मृदा-भवन (पृष्ठ 15)
अपशिष्ट और पुनरुपयोगक्या अपशिष्ट फिर से कच्चा माल बन सकता है, जिससे उत्पादन प्रकृति के उन चक्रों जैसा हो जहाँ कुछ भी अपशिष्ट नहीं होता?पृष्ठ 5 और पृष्ठ 1 — ऐसी अर्थव्यवस्था जो प्रयुक्त संसाधनों का पुनरुपयोग करे और अपशिष्ट को न्यूनतम करे
स्थानीय रोज़गारक्या यह प्रक्रिया वहाँ के लोगों को काम देती है, या केवल उनसे लेती है?पृष्ठ 16 — नई संधारणीय सामग्रियों की प्रक्रिया कम प्रदूषणकारी है, स्थानीय रोज़गार देती है और उस स्थान की जलवायु को ध्यान में रखकर बनाई जाती है
स्थानीय जलवायु से मेलक्या यह उसी स्थान के लिए बनाया गया है जहाँ खड़ा होगा, ताकि चलाने में कम ऊर्जा लगे?पृष्ठ 16
ऊर्जा का स्रोतक्या यह प्रक्रिया जीवाश्म ईंधन के स्थान पर नवीकरणीय ऊर्जा से चल सकती है?पृष्ठ 17 — यथासंभव अधिक-से-अधिक कार्यों के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर संक्रमण
उत्पाद तक न्यायसंगत पहुँचयह किसे मिलेगा, और इसे बनाने का मूल्य कौन चुका रहा है?पृष्ठ 18 — जल और स्वच्छ वायु जैसे आधारभूत संसाधनों तक भी वितरण और पहुँच समाज के कुछ वर्गों के साथ न्यायसंगत नहीं होती
भावी पीढ़ियाँक्या यह पचास वर्ष बाद भी संभव होगा, या हम वह खर्च कर रहे हैं जो हमारे पोतों को चाहिए?पृष्ठ 12 और 14 — पंजाब की अल्पावधि खाद्य सुरक्षा बनाम वे दीर्घकालिक परिणाम जिन्हें ठीक करने में समय और प्रयास लगेगा
सीमेंट अध्याय की सबसे अच्छी कसौटी क्यों है: सीमेंट को छोड़ा नहीं जा सकता। घर, विद्यालय, अस्पताल, सेतु, मार्ग और हवाई अड्डे — सबको उसकी आवश्यकता है; अध्याय स्वयं यही कहता है। इसलिए प्रश्न कभी ‘उत्पादन करें या न करें’ का नहीं, कैसे करें का होता है : धूल पर नियंत्रण, दिशा-निर्देशों का पालन, जहाँ चल सके वहाँ मृदा-पत्थर-वनस्पति और पुनर्निर्मित सामग्री का प्रयोग, और स्थानीय जलवायु के अनुसार रूपरेखा। व्यवहार में दायित्वपूर्ण उत्पादन का यही अर्थ है।
सुझाव: इस प्रश्न के अच्छे संक्षिप्त उत्तर में तीन उत्पादों के नहीं, तीन चरणों के नाम होने चाहिए — सामग्री कहाँ से आती है, प्रक्रिया क्या छोड़ती है, और काम पूरा होने पर उस वस्तु का क्या होता है। ऊपर की लगभग हर बात इन्हीं तीन में समा जाती है।
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