अन्वेषण अध्याय 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

अध्याय इस कालखंड को भारतीय इतिहास के मध्यकाल का उत्तरार्द्ध कहता है, किंतु सावधान करता है कि यह मूलतः यूरोपीय शब्द है और इतिहासकार सदैव सहमत नहीं होते कि भारत में यह किस काल के लिए प्रयुक्त हो। यहाँ इसका अर्थ है 11वीं से 17वीं शताब्दी। दिल्ली सल्तनत (1206 से) में तुर्क-अफगान मूल के पाँच राजवंश आए — ममलुक, खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी। लगभग तीन में से दो सुल्तानों ने अपने पूर्ववर्ती को हटाकर सत्ता हथियाई, इसलिए औसत शासनकाल कठिनता से नौ वर्षों से अधिक रहा। प्रतिरोध हर दिशा से हुआ — नरसिंहदेव प्रथम के अधीन पूर्वी गंग राज्य , होयसल , मुसुनुरी नायक , मेवाड़ के राणा कुंभा एवं महाराणा प्रताप , रानी दुर्गावती , जाट किसान, भील-गोंड-संथाल-कोच जैसे समुदाय, अहोम और सिख । दक्षिण में विजयनगर (1336 से) कृष्णदेवराय के अधीन अपनी चरम सीमा पर पहुँचा, किंतु 1565 में तालीकोटा के युद्ध में दक्कन सल्तनतों के गठबंध

  1. महत्वपूर्ण प्रश्न
  2. आइए पता लगाएँ
  3. आइए पता करें
  4. आइए विचार करें
  5. आइए विचार करें
  6. आइए पता लगाएँ
  7. आइए विचार करें
  8. आइए पता लगाएँ
  9. आइए विचार करें
  10. आइए विचार करें
  11. आइए पता लगाएँ
  12. आइए विचार करें
  13. आइए पता लगाएँ
  14. आइए पता लगाएँ
  15. आइए पता लगाएँ
  16. इसे अनदेखा ना करें
  17. आइए विचार करें
  18. प्रश्न और क्रियाकलाप
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ