कक्षा ८ सामाजिक विज्ञान अध्याय 2 भारत के राजनैतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
अध्याय इस कालखंड को भारतीय इतिहास के मध्यकाल का उत्तरार्द्ध कहता है, किंतु सावधान करता है कि यह मूलतः यूरोपीय शब्द है और इतिहासकार सदैव सहमत नहीं होते कि भारत में यह किस काल के लिए प्रयुक्त हो। यहाँ इसका अर्थ है 11वीं से 17वीं शताब्दी। दिल्ली सल्तनत (1206 से) में तुर्क-अफगान मूल के पाँच राजवंश आए — ममलुक, खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी। लगभग तीन में से दो सुल्तानों ने अपने पूर्ववर्ती को हटाकर सत्ता हथियाई, इसलिए औसत शासनकाल कठिनता से नौ वर्षों से अधिक रहा। प्रतिरोध हर दिशा से हुआ — नरसिंहदेव प्रथम के अधीन पूर्वी गंग राज्य , होयसल , मुसुनुरी नायक , मेवाड़ के राणा कुंभा एवं महाराणा प्रताप , रानी दुर्गावती , जाट किसान, भील-गोंड-संथाल-कोच जैसे समुदाय, अहोम और सिख । दक्षिण में विजयनगर (1336 से) कृष्णदेवराय के अधीन अपनी चरम सीमा पर पहुँचा, किंतु 1565 में तालीकोटा के युद्ध में दक्कन सल्तनतों के गठबंध
त्वरित पुनरावृत्ति
| शब्द | अर्थ | अध्याय में यह कहाँ आता है | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| सल्तनत | ‘सुल्तान’ द्वारा शासित क्षेत्र — एक उपाधि जिसे कुछ मुस्लिम शासकों ने अपनाया था | दिल्ली सल्तनत, जिसकी स्थापना 1192 में पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद हुई | पृष्ठ 25 |
| तुर्क | वे लोग, भाषाएँ एवं संस्कृतियाँ जो ऐतिहासिक रूप से मध्य एशिया से लेकर तुर्की एवं साइबेरिया तक के विशाल क्षेत्र से जुड़ी रही हैं | इस काल के कई हमलावर मध्य एशियाई — तुर्क या अफगान थे | पृष्ठ 23 |
| सांकेतिक मुद्रा | सस्ते ताँबे के सिक्के, जिन्हें चाँदी एवं सोने के सिक्कों के समान मूल्य का घोषित किया गया | मुहम्मद बिन तुगलक की योजना; इससे नकली सिक्के बने और अर्थव्यवस्था का ह्रास हुआ | पृष्ठ 27 |
| बुत शिकन (प्रतिमा-विनाशवाद) | मूर्तिपूजक माने जाने वाले प्रतीकों या धार्मिक चित्रों को अस्वीकार करना या नष्ट करना | बौद्ध, जैन एवं हिंदू मंदिरों की मूर्तियों एवं चित्रों पर हुए प्रहार | पृष्ठ 28 |
| काफिर | वह व्यक्ति जो (किसी दिए गए पंथ के) विश्वास को साझा नहीं करता | तैमूर का घोषित उद्देश्य — “काफिरों के साथ युद्ध करना एवं उनकी धन-संपत्ति को लूटना” | पृष्ठ 28 |
| जजिया | गैर-मुस्लिम प्रजा पर सुरक्षा प्रदान करने और सैन्य सेवा से छूट देने के बदले वसूला जाने वाला कर | कुछ सुल्तानों ने लगाया; अकबर ने समाप्त किया; औरंगजेब ने पुनः लगाया | पृष्ठ 28, 38, 43 |
| राणा | राजपूत राजाओं के लिए प्राय: प्रयुक्त एक उपाधि | मेवाड़ के राणा कुंभा, कुंभलगढ़ के निर्माता; राणा सांगा | पृष्ठ 30 |
| जौहर | बंदी बनाए जाने एवं गुलाम बनाए जाने से बचने के लिए राजपूत स्त्रियों का सामूहिक रूप से स्वयं को अग्नि में समर्पित करना | चित्तौड़गढ़ में, जब अकबर ने किले में सेंध लगाई | पृष्ठ 38 |
| सुलह-ए-कुल | वस्तुतः ‘सभी के साथ शांति’ — सभी पंथों के प्रति सहिष्णुता | अकबर की नीति, जिसके साथ उसने जजिया भी समाप्त किया | पृष्ठ 38 |
| गुरिल्ला युद्ध | लड़ाई की एक शैली जिसमें क्षेत्र की जानकारी रखने वाले छोटे समूह अचानक आक्रमण एवं घात लगाकर बड़ी सेनाओं को हराने का प्रयास करते हैं | अरावली में महाराणा प्रताप; असम में अहोम | पृष्ठ 47 |
| पाइक प्रणाली | प्रत्येक सक्षम व्यक्ति भूमि अधिकारों के बदले राज्य को श्रम या सैन्य सेवा देता था | इसी से अहोम शासक बिना स्थायी सेना के विशाल त्वरित बल रख सके | पृष्ठ 48 |
| इक्ता | कर वसूली के लिए कुलीनों (इक्तादारों) को सौंपे गए क्षेत्र; ये पद वंशानुगत नहीं थे | सल्तनत की सेना का खर्च जुटाने का मुख्य साधन | पृष्ठ 53 |
| मनसबदारी | मनसबदार (अधिकारी) अपने मनसब (पद) के अनुसार हाथियों, घोड़ों, ऊँटों और सैनिकों की एक निश्चित संख्या रखते थे | अकबर की प्रणाली, जिसे अबुल फ़ज़ल ने आइन-ए-अकबरी में दर्ज किया; भुगतान जागीर के रूप में | पृष्ठ 54 |
| हुंडी | किसी व्यक्ति को भुगतान करने का एक लिखित निर्देश, जिसे राजनैतिक सीमाओं के पार ले जाया जा सकता था | व्यापारी बिना मुद्रा ढोए धन भेज सकते थे — आधुनिक बैंकिंग का अग्रदूत | पृष्ठ 57 |
अभ्यास
- महत्वपूर्ण प्रश्न
- आइए पता लगाएँ
- आइए पता करें
- आइए विचार करें
- आइए विचार करें
- आइए पता लगाएँ
- आइए विचार करें
- आइए पता लगाएँ
- आइए विचार करें
- आइए विचार करें
- आइए पता लगाएँ
- आइए विचार करें
- आइए पता लगाएँ
- आइए पता लगाएँ
- आइए पता लगाएँ
- इसे अनदेखा ना करें
- आइए विचार करें
- प्रश्न और क्रियाकलाप