अन्वेषण अध्याय 3 मराठा साम्राज्य का उदय के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

मराठा दक्कन पठार, विशेष रूप से वर्तमान महाराष्ट्र के निवासियों का एक समूह हैं। वे मराठी बोलते हैं, जिसका 12वीं शताब्दी से सतत और समृद्ध साहित्यिक इतिहास रहा है। उनके राजनैतिक उदय की भूमि भक्ति संतों — ज्ञानेश्वर, नामदेव, तुकाराम, रामदास — ने तैयार की, जिन्होंने उपनिषदों और भगवद्गीता को मराठी में लाकर समाज को एक सुदृढ़ सांस्कृतिक आधार दिया। छत्रपति शिवाजी (जन्म 1630, भोंसले कुल, शाहजी और जीजाबाई के पुत्र) ने 16 वर्ष की आयु में दुर्ग जीतने आरंभ किए, 1646 से शासन किया, 1657 में मराठा नौसेना की स्थापना की, 1674 में रायगढ़ में राज्याभिषेक कराकर ‘श्री राजा शिव छत्रपति’ उपाधि धारण की और 1677 में दक्षिण-दिग्विजय किया। 1680 में पचास वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ। उनकी रणनीति थी — दुर्ग और गुरिल्ला युद्ध , अर्थात छोटे-छोटे दल, तीव्र गति, आकस्मिकता और भूभाग का गहन ज्ञान। रामचंद्रपंत अमात्य ने आज्ञापत

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