कक्षा ८ सामाजिक विज्ञान अध्याय 4 भारत में औपनिवेशिक काल के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
उपनिवेशवाद का अर्थ है — एक देश द्वारा किसी अन्य प्रदेश पर अधिकार करना , वहाँ अपनी बस्तियाँ स्थापित करना और अपना राजनैतिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक तंत्र आरोपित करना। यह नवीन घटना नहीं है (प्रथम सहस्राब्दी सा.सं. पू. के महान साम्राज्य; प्रथम सहस्राब्दी सा.सं. में ईसाई तथा इस्लामी धर्मों का प्रसार), किंतु ‘औपनिवेशिक युग’ से आशय 15वीं शताब्दी से आरंभ हुए यूरोपीय विस्तार से है — स्पेन, पुर्तगाल, ब्रिटेन, फ्रांस और नीदरलैंड द्वारा अफ्रीका, एशिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा प्रशांत द्वीपों पर अधिकार। इसके चार कारण थे — राजनैतिक प्रतिस्पर्धा, आर्थिक लाभ, धर्मांतरण और (गौण रूप से) वैज्ञानिक जिज्ञासा। भारत लक्ष्य इसलिए बना क्योंकि भारत समृद्ध था। दो सहस्राब्दियों पूर्व से यूनानियों और रोमनों के साथ व्यापार; मसाले, कपास, हाथी-दाँत, रत्न, चंदन, सागवान और वूट्ज स्टील की भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में अत्यधिक म
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| शब्द | अर्थ | अध्याय में कहाँ | पुस्तक इसके विषय में क्या कहती है |
|---|---|---|---|
| उपनिवेशवाद | एक देश किसी अन्य प्रदेश पर अधिकार कर वहाँ बस्तियाँ बनाता है और अपना राजनैतिक, आर्थिक व सांस्कृतिक तंत्र आरोपित करता है | ‘उपनिवेशवाद का युग’, पृष्ठ 84 | परंपरा प्रथम सहस्राब्दी सा.सं. पू. तक जाती है; ‘औपनिवेशिक युग’ का अर्थ 15वीं शताब्दी से यूरोपीय विस्तार |
| दासत्व | किसी व्यक्ति को दास बना देने की क्रिया | हाशिया टिप्पणी, पृष्ठ 85 | यूरोपीय विजय अभियानों में प्रायः मूल निवासियों का नरसंहार अथवा दासत्व सम्मिलित था |
| असुरीकरण (डेमोनाइज) | किसी व्यक्ति या समूह को अत्यंत नकारात्मक रूप में चित्रित करना | हाशिया टिप्पणी, पृष्ठ 86 | उपनिवेशित लोगों को ‘असभ्य’, ‘आदिम’ या ‘बर्बर’ कहा गया ताकि ‘सभ्यकारी अभियान’ उचित लगे |
| सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) | एक वर्ष में उत्पादित वस्तुओं व सेवाओं के मूल्य का माप | हाशिया टिप्पणी, पृष्ठ 87 | 16वीं शताब्दी तक विश्व के जी.डी.पी. में भारत का भाग कम-से-कम एक-चौथाई; स्वतंत्रता के समय मात्र 5 प्रतिशत |
| कार्टेज | पुर्तगाली अनुज्ञा-पत्र, जो अरब सागर की प्रत्येक नौका को लेना पड़ता था | ‘पुर्तगाली — व्यापार एवं उत्पीड़न’, पृष्ठ 88 | अनुमति-पत्र न होने पर नौका जब्त; इससे लगभग एक शताब्दी तक मसालों के व्यापार पर एकाधिकार |
| धर्म-न्यायाधिकरण (इंक्विजिशन) | रोमन कैथोलिक चर्च द्वारा स्थापित विधर्मियों पर निर्णय देने वाला विशेष न्यायाधिकरण | हाशिया टिप्पणी, पृष्ठ 88 | गोवा में 1560 में स्थापित, 1812 में समाप्त; बलात धर्मांतरण तथा अनेक हिंदू मंदिरों का विध्वंस |
| सिपाही | यूरोपीय युद्ध-कौशल में प्रशिक्षित तथा यूरोपीय कंपनी की सेना में भर्ती भारतीय सैनिक | ‘फ्रांसीसी — औपनिवेशिक आकांक्षाएँ’, पृष्ठ 90; ‘महान विद्रोह’, पृष्ठ 108 | डुप्ले द्वारा गठित; कंपनी की सेना के अधिकारी “प्रायः सभी ब्रिटिश” थे |
| फूट डालो और राज करो | शासकों की प्रतिस्पर्धा, उत्तराधिकार विवादों तथा समुदायों के विद्वेष का लाभ उठाना ताकि शासित एक न हो सकें | पृष्ठ 92–93 | प्लासी (1757) : नवाब के सेनापति मीर जाफर के साथ क्लाइव का षड्यंत्र |
| हड़प नीति (डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स) | स्वाभाविक पुरुष उत्तराधिकारी के बिना शासक की मृत्यु होने पर रियासत का विलय | पृष्ठ 93–94 | यह “जान-बूझकर” दत्तकपुत्र परंपरा की उपेक्षा करती थी; इसने 1857 के विद्रोह की पृष्ठभूमि बनाई |
| सहायक संधि | भारतीय दरबार में ब्रिटिश रेसिडेंट; शासक अपने व्यय पर ब्रिटिश सैनिक रखे और विदेशी संबंध केवल ब्रिटिशों के माध्यम से करे | पृष्ठ 94 | 1798 में हैदराबाद प्रथम; ब्रिटिश इसे ‘कम व्यय में साम्राज्य’ कहते थे |
| रियासती राज्य | भारतीय राजकुमार, महाराज या नवाब के अधीन क्षेत्र, जिसने आंतरिक स्वायत्तता हेतु ब्रिटिश संरक्षण स्वीकार किया | इसे अनदेखा न करें, पृष्ठ 94 | स्वतंत्रता के समय 500 से अधिक, उपमहाद्वीप के लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र में |
| संपदा का निकास | करों द्वारा तथा औपनिवेशिक व्यय भारतीयों से वसूल कर भारत से ब्रिटेन गई संपत्ति | ‘भारत की संपदा का निकास’, पृष्ठ 97–98 | नौरोजी (1901) व आर.सी. दत्त ने मापा; उत्सा पटनायक का अनुमान 1765–1938 के लिए 45 ट्रिलियन डॉलर |
| प्राच्यवादी (ओरिएंटलिस्ट) | ‘प्राच्य’ का विद्वान — अब ‘भारतविद्’ | हाशिया टिप्पणी, पृष्ठ 102 | कुछ प्रमुख ब्रिटिश प्राच्यवादी चाहते थे कि भारतीय अपनी भाषाओं में पढ़ें; मैकॉले की नीति प्रभावी सिद्ध हुई |
| विद्रोह (म्यूटिनी) | सैनिकों या नाविकों द्वारा अपने अधिकारियों के विरुद्ध बगावत | हाशिया टिप्पणी, पृष्ठ 108 | इसी कारण इतिहासकारों ने ‘सिपाही विद्रोह’ संज्ञा अस्वीकार की; पुस्तक ‘1857 का महान विद्रोह’ कहती है |
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