प्र1.
मानचित्र का निरीक्षण करें। वर्तमान भारत के मानचित्र की अपेक्षा सीमाओं तथा नामों में क्या मुख्य अंतर हैं?
उत्तर
पहले मानचित्र की अपनी लीजेंड देखिए, जो नीचे बाईं ओर छपी है, क्योंकि शेष सब कुछ उसी से निकलता है :
- ब्रिटिश भारत — लाल सीमा रेखा, अर्थात प्रत्यक्ष रूप से ब्रिटिश प्रशासन के अधीन भूभाग।
- गुलाबी — भारत सरकार द्वारा स्थायी रूप से प्रशासित क्षेत्र।
- पीला — देशी रियासतें और क्षेत्र, अर्थात वे रियासती राज्य जिनका वर्णन अध्याय पहले कर चुका है।
- काली रेखाएँ — रेलमार्ग।
मानचित्र का शीर्षक है ‘भारतीय साम्राज्य के राजनीतिक विभाजन’। अब दोनों प्रकार के अंतर देखिए।
क. सीमाओं के अंतर
| 1909 के मानचित्र में | आज के भारत के मानचित्र में |
|---|---|
| सिंध, बलूचिस्तान एजेंसी, पंजाब, उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत और कश्मीर — सब एक ही ‘भारतीय साम्राज्य’ के भीतर | इसका पश्चिमी भाग पाकिस्तान है, जो 1947 से एक अलग देश है |
| पूर्वी बंगाल और असम एक इकाई, जिसमें ढाका सम्मिलित | वह पूर्वी भाग बांग्लादेश है और ढाका उसकी राजधानी |
| बर्मा (म्यांमार) साम्राज्य के रंग में — मंडाले, रंगून, मौलमीन अंकित | म्यांमार — एक अलग देश, भारत से पूर्णतः पृथक |
| लाल-गुलाबी प्रांतों के भीतर पीली रियासतों की चकत्तेदार बुनावट — कश्मीर, राजपुताना एजेंसी, मध्य भारत एजेंसी, हैदराबाद, मैसूर, त्रावणकोर, बड़ौदा, ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, बस्तर और सैकड़ों अन्य | एक भी रियासत नहीं। आज भारत में निर्वाचित सरकारों वाले राज्य और केंद्रशासित प्रदेश हैं, और मानचित्र एक ही अखंड रंग का है |
| विशाल प्रांत : बॉम्बे प्रेसीडेंसी, मद्रास प्रेसीडेंसी, बंगाल, संयुक्त प्रांत, मध्य प्रांत और बेरार, पंजाब | अनेक छोटे राज्य, जो अधिकांशतः भाषा के आधार पर बने — महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि |
| गोवा, दमन और दीव (पुर्तगाली) तथा पांडिचेरी, कारिकल आदि छोटे क्षेत्र (फ्रांसीसी) ब्रिटिश भारत का भाग नहीं | ये सब आज भारत में हैं — गोवा एक राज्य, पुडुचेरी तथा दमन और दीव केंद्रशासित प्रदेश |
| सीलोन नीचे अलग दिखाया गया; नेपाल, भूटान, सिक्किम, तिब्बत और अफगानिस्तान रंगे हुए साम्राज्य से बाहर | सीलोन अब श्रीलंका है; नेपाल और भूटान स्वतंत्र पड़ोसी; सिक्किम भारत का राज्य है; तिब्बत चीन में है |
ख. नामों के अंतर — मानचित्र औपनिवेशिक वर्तनियों से भरा है, जो बाद में बदल दी गईं :
| 1909 का मानचित्र | आज | 1909 का मानचित्र | आज |
|---|---|---|---|
| कलकत्ता | कोलकाता | कैलिकट | कोझिकोड |
| बॉम्बे | मुंबई | कोचीन | कोच्चि |
| मद्रास | चेन्नई | त्रिवेन्द्रम | तिरुवनंतपुरम |
| बंगलौर | बेंगलूरु | त्रिचिनोपोली | तिरुचिरापल्ली |
| पूना | पुणे | रंगून | यंगून |
| डाका | ढाका | मसुलीपट्टनम | मछलीपट्टनम |
| बनारस | वाराणसी | विशाखापट्टनम् | विशाखापत्तनम |
| नोवा गोवा | गोवा (पणजी) | बड़ौदा | वडोदरा |
| सीलोन | श्रीलंका | मैसूर (नगर) | मैसूरु |
| बर्मा | म्यांमार | लक्काद्वीप द्वीपसमूह | लक्षद्वीप |
| पांडिचेरी | पुडुचेरी | मंगलौर | मंगलूरु |
मानचित्र वह बताता है जो पाठ नहीं बता सकता : लाल के भीतर बिखरे पीले टुकड़े देखिए। यही सहायक संधि की प्रणाली का चित्र है — ब्रिटिशों को पूरा मानचित्र लाल करने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि जो शासक रेसिडेंट से बँधा हो, अपने व्यय पर ब्रिटिश सैनिक रखता हो और विदेशी संबंध न रख सकता हो, वह पहले ही नियंत्रित था। ‘कम व्यय में साम्राज्य’ एक दृष्टि में दिख जाता है। और काली रेलमार्ग रेखाएँ देखिए : वे भीतरी क्षेत्रों से कलकत्ता, बंबई, मद्रास और कराची — अर्थात बंदरगाहों — की ओर जाती हैं, ठीक वैसे ही जैसा अध्याय कहता है कि इनका “वास्तविक उद्देश्य कच्चे माल को आंतरिक क्षेत्रों से बंदरगाहों तक पहुँचाना” था।
स्वयं जाँचिए : किसी एटलस में दक्षिण एशिया का आज का राजनीतिक मानचित्र खोलकर दोनों को साथ रखिए। गिनिए कि 1909 में जिसे एक साम्राज्य कहा गया, उस क्षेत्र में आज कितने देश हैं। फिर एक ऐसी वस्तु खोजिए जो नहीं बदली — रेल संजाल आज भी बहुत हद तक वही है जो उस 1909 के मानचित्र में काली रेखाओं से खिंचा है।