प्र1.
आगे पढ़ने से पहले, इस अध्याय के प्रथम पृष्ठ पर दिए गए चित्र को ध्यानपूर्वक देखिए। यह चित्र ईस्ट इंडिया कंपनी के लंदन स्थित मुख्यालय हेतु विशेष रूप से बनवाया गया था। इसकी लंबाई तीन मीटर से अधिक है। इस चित्र के प्रत्येक पक्ष का अवलोकन करें— उसमें प्रदर्शित व्यक्ति, वस्तुएँ, प्रतीक एवं भाव-भंगिमाएँ। चार या पाँच विद्यार्थियों के समूह में प्रत्येक समूह इस चित्र से प्राप्त संदेशों के विषय में अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करे। (हमारे उत्तर कुछ पृष्ठों के पश्चात दिए गए हैं, जब हम चित्र की ओर पुनः लौटेंगे किंतु अभी उन्हें न देखें!)
उत्तर
पहले विधि। ऐसे चित्र के सामने चार प्रश्न इसी क्रम में पूछिए : यह किसने और किस कक्ष के लिए बनवाया? — ऊपर कौन है और नीचे कौन? — दे कौन रहा है और ले कौन रहा है? — चित्र में क्या नहीं है? इन्हीं के उत्तर संदेश हैं।
किसने बनवाया। यह स्पिरिडियोन रोमा का ‘द ईस्ट ऑफरिंग इट्स रिचेज टू ब्रितानिया’ है, वर्ष 1778 में निर्मित, तीन मीटर से अधिक लंबा, और ईस्ट इंडिया कंपनी के लंदन स्थित मुख्यालय हेतु विशेष रूप से बनवाया गया। अतः यह व्यापार का तटस्थ चित्रण नहीं — यह एक कंपनी का अपने ही विषय में विज्ञापन है, जो वहीं टँगा था जहाँ उसके अपने संचालक उसे देखते।
| क्या दिखता है | चित्र में स्थान | संदेश |
|---|---|---|
| बर्तानिया, गौरवर्ण स्त्री, पास में सिंह, पीछे ढाल और ध्वज लिए बालक | सबसे ऊँचे, चट्टान पर बैठी, ग्रहण करती हुई | ब्रिटेन शासन करता है; सिंह शक्ति का प्रतीक है; वह उठती नहीं, हाथ नहीं बढ़ाती — संपदा स्वयं उस तक आती है |
| भारत, श्यामवर्ण स्त्री, मोती-रत्नों का पात्र आगे बढ़ाती हुई | नीचे, आगे झुकी हुई, अर्पित करती हुई | भारत को स्वेच्छा से देने वाला दिखाया गया है — और बैठी हुई स्त्री के सामने झुकी हुई स्त्री के रूप में |
| चीन, लंबे वस्त्रों में, बहुमूल्य जार लिए | और भी नीचे, झुका हुआ | कंपनी का व्यापार चीन से भी था; संपूर्ण ‘पूर्व’ ब्रिटेन के नीचे सजाया गया है |
| दो श्यामवर्ण पुरुष, कपास की गाँठें उठाए | दाहिने किनारे पर, बोझ से झुके हुए | जिस श्रम से यह संपदा बनी वह चित्र में है, पर नामहीन और हाशिये पर |
| देव मर्करी, पंखयुक्त दंड लिए | दाहिनी ओर खड़े, संकेत करते हुए | व्यापार और यात्रा — पूरे लेन-देन को देवता से अनुमोदित वाणिज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है |
| कंपनी के पोत | आकृतियों के पीछे, मध्य दूरी पर | वह नौसैनिक शक्ति जिसने यह सब वास्तव में संभव बनाया — चुपचाप पृष्ठभूमि में रखी गई |
| ‘पिता टेम्स’, श्वेत दाढ़ी वाला वृद्ध, जिसके पात्र से जल बह रहा है | सबसे नीचे बाईं ओर, जल के किनारे | लंदन गंतव्य है : चित्र की प्रत्येक वस्तु इसी नदी की ओर बह रही है |
| भारत के पशु (ऊँट, हाथी) | मर्करी के पीछे | पूर्व को प्राकृतिक संपदा के विचित्र भंडार की तरह दिखाना |
चित्र क्या छिपाता है : पूरा चित्र अपने शीर्षक के एक शब्द पर टिका है — अर्पित। इसमें किसी पर कर नहीं लगता, कोई न्यायालय नहीं, कोई भूखा नहीं। न सैनिक हैं, न कर-संग्राहक, न अकाल। किंतु इस चित्र के बनने से एक दशक भी पहले उसी कंपनी ने बंगाल के 1770–1772 के अकाल में, जिसमें लगभग एक करोड़ लोग मरे, कठोर कर-वसूली जारी रखी थी। चित्र को अध्याय के सामने रखकर पढ़ना ही इस अभ्यास का उद्देश्य है।
समूह में यह कीजिए : ऊपर दिए चार प्रश्न सदस्यों में बाँट लीजिए और इसी क्रम में प्रस्तुत कीजिए — किसने बनवाया, ऊँच-नीच, देने की दिशा, मौन। अंत में एक वाक्य में उत्तर दीजिए : यदि यही दृश्य 1778 के किसी भारतीय बुनकर ने चित्रित किया होता तो क्या भिन्न होता?