प्र1.
आइए, पुनः इस चित्र (चित्र 4.14) पर कुछ संकेतों के साथ उसके प्रतीकात्मक अर्थों पर ध्यान दें। बर्तानिया (ब्रिटेन का प्रतीकात्मक रूप), उपनिवेशों की अपेक्षा उच्च स्थान पर विराजमान है जो उसकी श्रेष्ठ सत्ता को प्रदर्शित करता है। इसके विपरीत उपनिवेशों की निम्न स्थिति और झुकी हुई मुद्रा पर ध्यान दें। क्या उपनिवेशों ने वास्तव में अपनी संपत्ति ‘अर्पित’ की थी? या फिर ब्रिटेन ने उसे बलपूर्वक अथवा छल से प्राप्त किया? साथ ही भारतीयों की त्वचा का गहरा रंग भी देखें (जो बर्तानिया के वर्ण से विपरीत है) जो उस समय गोरे लोगों की काले वर्ण वाले ‘स्थानिकों’ पर श्रेष्ठता की धारणा को दर्शाता है।
उत्तर
नहीं — संपदा अर्पित नहीं की गई थी। वह ली गई थी, और अध्याय दोनों उपाय दिखा चुका है : बल और छल। चित्र का शीर्षक एक दावा है, और अभी-अभी पढ़े गए पृष्ठ उसकी कसौटी हैं।
| बलपूर्वक | छल से | |
|---|---|---|
| पुर्तगाली | वास्को-डी-गामा ने भारतीय व्यापारियों को बंदी बनाकर यातनाएँ दीं, उनका वध किया और समुद्र से कालीकट पर बमबारी की; बिना कार्टेज वाली नौकाएँ जब्त | कार्टेज स्वयं — नौसैनिक नाकेबंदी को ‘अनुज्ञा-पत्र’ की व्यवस्था का रूप देना |
| फ्रांसीसी | डुप्ले ने 1746 में मद्रास पर अधिकार किया | उत्तराधिकार विवादों में हस्तक्षेप कर कठपुतली शासकों के माध्यम से अप्रत्यक्ष शासन |
| ब्रिटिश | पंजाब का अधिग्रहण (1848–49); 1857 के बाद का दंडात्मक अभियान, जिसमें गाँव जलाए और फसलें नष्ट की गईं | प्लासी (मीर जाफर का विश्वासघात); हड़प नीति; सहायक संधि; अकाल में भी ऊँचे रखे गए कर-लक्ष्य |
चित्र की रचना को ही एक तर्क की तरह पढ़िए। इसका प्रत्येक दृश्य-निर्णय एक ही बात दो बार कहता है — एक बार सत्ता के विषय में, एक बार वर्ण के विषय में :
- ऊँचाई। बर्तानिया ऊपर विराजमान है; भारत और चीन उससे नीचे। यूरोपीय चित्रकला में ऊँचाई पद का सूचक है। आँख को यह बताया जाता है कि आदेश किसका चलता है, इससे पहले कि उसे और कुछ बताया जाए।
- मुद्रा। बर्तानिया सीधी और स्थिर है; उपनिवेश झुके हुए, बोझ उठाए, आगे बढ़े हुए। एक ग्रहण करता है, शेष प्रस्तुत करते हैं।
- वर्ण। बर्तानिया गौरवर्ण, भारतीय आकृतियाँ श्यामवर्ण। यह आकस्मिक नहीं था। यह उपनिवेशकों में प्रचलित उस धारणा को दर्शाता है कि गोरे लोग काले वर्ण वाले ‘स्थानिकों’ से श्रेष्ठ हैं — यही धारणा उपनिवेशित लोगों को ‘असभ्य’, ‘आदिम’ या ‘बर्बर’ कहने और ‘सभ्यकारी अभियान’ को सम्मानजनक बनाने के काम आई।
- ‘अर्पित’ शब्द। यदि संपदा स्वेच्छा से दी जाती तो न सेना की आवश्यकता होती, न कार्टेज की, न हड़प नीति की, न रेसिडेंट की। चित्र ने ठीक उन्हीं वस्तुओं को हटा दिया है जिनसे यह हस्तांतरण संभव हुआ।
चित्र ऐतिहासिक स्रोत क्यों है : कोई चित्र यह नहीं बता सकता कि क्या हुआ था, किंतु वह विश्वसनीय रूप से यह बताता है कि उसके स्वामी क्या मनवाना चाहते थे। 1778 में कंपनी के लंदन मुख्यालय में टँगा यह चित्र प्रत्येक आगंतुक को एक कहानी सिखाता था — पूर्व कृतज्ञ है, ब्रिटेन उदार है, और वाणिज्य दोनों के बीच स्वाभाविक बंधन है। अब इसके बगल में डब्ल्यू.डब्ल्यू. हंटर का 1770 के बंगाल का विवरण रखिए — कृषक अपने पशु, अपने उपकरण, अपना बीज-अनाज और अंततः अपने पुत्र-पुत्रियाँ बेचते हुए — और आपको स्पष्ट दिख जाएगा कि यह चित्र किसे छिपाने के लिए बनाया गया था।