अन्वेषण अध्याय 4 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आप ऊपर दिए गए सभी शब्दों को समझते हैं जो भारतीय वस्त्रों का वर्णन करते हैं? यदि नहीं, तो चार या पाँच विद्यार्थियों के समूह बनाएँ और इन शब्दों की जानकारी प्राप्त करें, फिर अपने शिक्षक की सहायता से अपने निष्कर्षों की तुलना करें।
उत्तर

अभी-अभी पढ़े गए अनुच्छेद में दो प्रकार के शब्द हैं : वे रेशे जिनसे भारतीय वस्त्र बनते थे, और वे गुण जिनसे वे प्रसिद्ध हुए। प्रत्येक का अर्थ नीचे है।

शब्दयह क्या हैकहाँ से / कैसे प्रयोग
सूती (कपास)कपास के पौधे की फली से मिलने वाला कोमल रेशाभारत का प्रमुख वस्त्र-रेशा; यही वह कपड़ा है जिसकी माँग विश्व के अनेक भागों में थी
रेशमीरेशम के कीड़े के कोए से निकाला गया महीन, चमकीला रेशाबंगाल, असम (मूगा और एरी), वाराणसी तथा दक्षिण में बुना जाता था
ऊनीभेड़, बकरी या याक के बालों से मिलने वाला रेशाकश्मीर, हिमाचल, लद्दाख और राजस्थान — शॉल, कंबल, कालीन
पटसन (जूट)पौधे के तने का लंबा, मोटा, सुनहरा-भूरा रेशाबंगाल और असम; बोरे, रस्सी, चटाई
भांग (हेंप)भांग के पौधे के तने से मिलने वाला मजबूत रेशारस्सी, तिरपाल, बोरे और मोटा कपड़ा
नारियल रेशा (कोयर)नारियल के छिलके से निकाला गया रेशाविशेषकर केरल; चटाई, रस्सी, ब्रश
मलमलअत्यंत महीन, हलका, लगभग पारदर्शी सूती कपड़ाअध्याय की ‘अत्यंत पतली’ श्रेणी; बंगाल की मलमल विश्वप्रसिद्ध थी
उभरा हुआ (एंबोस्ड)वस्त्र पर इस प्रकार आकृति अंकित होना जो उभरी हुई स्पष्ट दिखाई दे (पुस्तक की अपनी हाशिया टिप्पणी)अध्याय की ‘गहराई से उभरे हुए’ श्रेणी — मलमल से ठीक विपरीत छोर
बारीक डिजाइनअनेक महीन, सघन विवरणों वाली आकृतियाँबुनकर, छापकर, रँगकर या कढ़ाई से बनाई जाती थीं
बनावटकपड़ा छूने और देखने में कैसा है — चिकना, खुरदरा, उभरा, धारीदारअध्याय का बल विविधता पर है — अत्यंत पतली मलमल से लेकर गहराई से उभरे वस्त्र तक
यह शब्दावली तर्क के लिए क्यों आवश्यक है : यह सूची अपने बाद वाले वाक्य का प्रमाण है। जो देश छह भिन्न रेशों में, सबसे महीन मलमल से लेकर भारी उभरे वस्त्र तक सब कुछ बना सकता था, उसके विनिर्माण की गहराई और कौशल असाधारण था। इसीलिए अगला अनुच्छेद चौंकाने वाला है — यह पूरा क्षेत्र किसी बेहतर प्रतिस्पर्धा से नहीं, नीति से नष्ट हुआ : ब्रिटेन में भारतीय कपड़े पर भारी कर, भारत में ब्रिटिश कपड़े पर नाममात्र कर, और ब्रिटेन का समुद्री व्यापार तथा विनिमय दरों पर नियंत्रण।
यह कीजिए : घर से प्रत्येक रेशे का एक छोटा नमूना लाइए — सूती रूमाल, बोरे का एक धागा, पायदान का कोयर रेशा, ऊनी मोजा — और समूह में घुमाइए। कोयर और मलमल का अंतर हाथ से महसूस करने पर ही ‘अत्यंत पतली मलमल से लेकर गहराई से उभरे हुए वस्त्र तक’ वाक्य का अर्थ खुलता है।
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