अन्वेषण अध्याय 5 सार्वभौमिक मताधिकार और भारत की निर्वाचन प्रणाली के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का अर्थ है — प्रत्येक वयस्क नागरिक को एक मत, और सभी मतों का समान मूल्य। जाति, मत, नस्ल, धर्म, लिंग, शिक्षा, आय आदि का भेदभाव किए बिना 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक भारतीय नागरिक को मत देने का अधिकार है। ‘सार्वभौमिक’ शब्द का अर्थ यही है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 326 पर आधारित है और लोकसभा, प्रत्येक राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश की विधानसभा तथा गाँवों एवं शहरों के सभी स्थानीय चुनावों पर लागू होता है। कोई भी व्यक्ति अन्य व्यक्ति की ओर से मतदान नहीं कर सकता, और गंभीर अपराध में दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को मतदान से रोका जाता है। संविधान निर्माताओं ने यह निर्णय आरंभ से ही लिया, और यह एक साहसिक निर्णय था। 1947 में लगभग 14 प्रतिशत व्यक्ति साक्षर थे, जिनमें महिलाएँ लगभग 8 प्रतिशत — कुछ लोगों का मत था कि मताधिकार केवल साक्षरों को मिले। स्वतंत्रता से पहले लगभग 13 प्रतिश

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