अन्वेषण अध्याय 5 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
लगभग 34 प्रतिशत मतदाताओं ने 2024 के चुनावों में मताधिकार का प्रयोग नहीं किया। आपके विचार से ऐसा क्यों है? लोग अपने अधिकारों का प्रयोग करने में किन-किन चुनौतियों का सामना करते हैं? इन प्रश्नों के उत्तर के लिए अपने परिवार और पड़ोस में बड़ों के साथ एक लघु सर्वेक्षण करें। सर्वेक्षण के निष्कर्षों का विश्लेषण करें और सुझावों के साथ एक प्रतिवेदन लिखें कि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा अपने मत का उपयोग कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है।
उत्तर

पहले संख्या देखिए। 2024 में लगभग 96.8 करोड़ मतदाता पात्र थे, इसलिए 34 प्रतिशत का मतदान न करना बताता है कि लगभग हर तीन में से एक पात्र भारतीय — करीब 32.9 करोड़ लोग — ने मत नहीं डाला। यह अनेक देशों की कुल जनसंख्या से बड़ी संख्या है, इसीलिए अध्याय इसे लोकतंत्र की स्थिति का गंभीर प्रश्न मानता है।

96.8 करोड़ का 34%
= 0.34 × 96.8 = 32.9 करोड़
→ लगभग 66 प्रतिशत ने मत दिया — तीन में से लगभग दो

लोग मत क्यों नहीं देते — कारणों को वर्गों में बाँटिए, क्योंकि उपाय अलग-अलग हैं —

कारण का प्रकारउदाहरणवास्तव में क्या काम करेगा
व्यावहारिकप्रवासी श्रमिक जिनका नाम सैकड़ों किलोमीटर दूर गाँव की सूची में है; मतदान का दिन कार्यदिवस है और दिहाड़ी का नुकसान वास्तविक है; बीमारी या वृद्धावस्था; केंद्र दूरडाक से और घर से मतदान; सवेतन अवकाश का कड़ाई से पालन; जहाँ व्यक्ति वास्तव में रहता है वहीं पंजीकरण
प्रशासनिकमतदाता सूची में नाम नहीं या गलत; पहचान-पत्र नहीं; नगर बदलने पर फिर से पंजीकरण नहींसूची की ऑनलाइन जाँच और सुधार; घर-घर सत्यापन अभियान
दृष्टिकोण — अध्याय इसे मतदाताओं की उदासीनता कहता है“मेरे एक मत से क्या होगा”; “सब प्रत्याशी एक जैसे हैं”; विशेषकर शहरी मतदाता मतदान के दिन को अवकाश मान लेते हैंजागरूकता अभियान; कम अंतर से तय हुए स्थानीय परिणाम दिखाना; नोटा को घर बैठने के ईमानदार विकल्प के रूप में समझाना
जानकारीतिथि, केंद्र या प्रत्याशियों के विषय में जानकारी न होनाएस.एम.एस. और ऐप से सूचना; आयोग द्वारा प्रत्याशियों की जानकारी; विद्यालय-महाविद्यालय में जागरूकता अभियान

सर्वेक्षण की रूपरेखा — एक व्यावहारिक योजना:

  1. नमूना: अपने परिवार के अतिरिक्त कम-से-कम दो घरों के 10–15 वयस्क, जिनमें आयु का मिश्रण हो (एक युवा, एक अधेड़ कामकाजी, एक वृद्ध) और महिलाएँ तथा पुरुष दोनों। केवल आयु-वर्ग और लिंग लिखिए — नाम नहीं
  2. प्रश्न, छोटे रखिए: (i) क्या आपने पिछले चुनाव में मत दिया? (ii) यदि नहीं, तो मुख्य कारण क्या था? (iii) आपका मतदान केंद्र कितनी दूर है? (iv) क्या मतदाता सूची में आपका नाम सही था? (v) कौन-सा एक परिवर्तन आपके लिए मतदान सरल बना देता?
  3. विश्लेषण: कारणों की गिनती कीजिए और उन्हें क्रम दीजिए। मत देने वालों का प्रतिशत निकालिए और उसकी तुलना लगभग 66 प्रतिशत के राष्ट्रीय आँकड़े से कीजिए।
  4. प्रतिवेदन: एक पृष्ठ — विधि, परिणामों की छोटी तालिका, तीन प्रमुख कारण, और तीन सुझाव जो आपके अपने आँकड़ों से निकले हों, किसी सामान्य सूची से नहीं।
नमूना निष्कर्ष (अपने वास्तविक उत्तरों से स्वयं लिखिए): “सर्वेक्षण में सम्मिलित 12 वयस्कों में से 9 ने मत दिया। न देने वाले 3 में से 2 का कहना था कि सूची में उनका नाम नहीं था और 1 राज्य से बाहर काम कर रहे थे। सुझाव — मतदान से दो माह पहले हमारे मोहल्ले में मतदाता सूची सत्यापन शिविर।”
‘सबको मत देना ही चाहिए’ को निष्कर्ष बनाते समय सावधानी: मत देना एक अधिकार है और भारत में मतदान अनिवार्य नहीं है। इसलिए आपके सुझावों का ईमानदार लक्ष्य है — जो नागरिक मत देना चाहता है, उसके मार्ग की हर बाधा हटाना, और जिसे इसका अर्थ नहीं दिखता उसे समझाना — किसी को विवश करना नहीं। नोटा भी इसीलिए है — असंतुष्ट मतदाता अपना असंतोष प्रणाली से बाहर जाकर नहीं, प्रणाली के भीतर रहकर दर्ज कर सके।
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