अन्वेषण अध्याय 5 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
समूह में चर्चा करें कि इस प्रकार के उपाय लोकतंत्र में क्या भूमिका निभाते हैं? क्या इन उपायों से लाभान्वित हुए किसी व्यक्ति को आप जानते हैं? इन उपायों से मतदाताओं की भागीदारी कैसे बढ़ सकती है? तकनीकी इसमें कैसे सहायक हो सकती है?
उत्तर

इनकी भूमिका है — मताधिकार होने और उसका प्रयोग कर पाने के बीच की दूरी मिटाना। कागज पर लिखा सार्वभौमिक मताधिकार उस 95 वर्ष के मतदाता के लिए कुछ नहीं है जो तीन किलोमीटर दूर मतदान केंद्र तक नहीं जा सकता, या उस दृष्टिबाधित मतदाता के लिए जो मतपत्र पढ़ नहीं सकता, या उस व्यक्ति के लिए जिसकी पहिया कुर्सी के सामने सीढ़ियाँ हैं। अध्याय में गिनाए गए उपाय अधिकार को प्रयोग-योग्य अधिकार में बदलते हैं।

भारत निर्वाचन आयोग ने वास्तव में क्या किया (पृष्ठ 121, और पृष्ठ 122 पर चित्र 5.6) —

  • निर्वाचन अधिकारी दूर-दूर तक जाते हैं ताकि प्रत्येक नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग कर पाए — चित्र 5.6 की पंक्ति के अनुसार केवल एक महिला मतदाता के लिए मतदान केंद्र तक की व्यवस्था की गई।
  • वर्ष 2024 में पहली बार वृद्ध और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए घर से ही मतदान करने का विकल्प दिया गया।
  • मतदाताओं के एक विशेष वर्ग के लिए डाक से मतदान
  • ब्रेल-सक्षम मतपत्र तथा पहिया कुर्सियों और रैंप्स के लिए ऐप-आधारित अनुरोध
यह केवल सुविधा नहीं, लोकतंत्र का प्रश्न क्यों है: यदि वृद्ध, दिव्यांग और दूरदराज़ के लोग दूसरों की तुलना में कम मत देंगे, तो विधायिका उनकी बात कम सुनेगी — और नीतियाँ धीरे-धीरे उन्हीं वर्गों की ओर झुक जाएँगी जो मतदान करते हैं। सुगमता के उपाय मतदाता-समूह को जनता का सच्चा चित्र बनाए रखते हैं। यह वही सिद्धांत है जो सार्वभौमिक मताधिकार का है, व्यवहार में उतारा हुआ।

आपके पड़ोस में भागीदारी कैसे बढ़ सकती है — और यह भाग सर्वेक्षण से जानने का है, अनुमान से नहीं —

  • रैंप, बैठने की व्यवस्था और छायादार पंक्ति से अति वृद्ध मतदाता की लंबी प्रतीक्षा सह्य हो जाती है।
  • घर से मतदान शय्याग्रस्त मतदाता की सबसे बड़ी बाधा — यात्रा — हटा देता है।
  • भूतल पर मतदान केंद्र और सहायता के लिए स्वयंसेवक होने पर परिवार को दादा-दादी को ले जाने और काम पर जाने में से एक नहीं चुनना पड़ता।
  • केवल यह जान लेना कि ये सुविधाएँ हैं, बहुत बड़ा अंतर लाता है — अनेक लोग इसलिए मत नहीं देते क्योंकि वे मान लेते हैं कि वे दे ही नहीं सकते।

तकनीकी कैसे सहायक हो सकती है: पहिया कुर्सी या रैंप के लिए ऐप-आधारित अनुरोध; मतदान की तिथि, केंद्र और पंक्ति की स्थिति के विषय में एस.एम.एस. और ऐप से सूचना; मतदाता सूची में नाम की ऑनलाइन जाँच और सुधार; ब्रेल तथा श्रव्य रूप में जानकारी; और स्वयं ई.वी.एम.–वी.वी.पी.ए.टी., जिससे मतदाता लंबा मतपत्र पढ़े बिना ही अपने मत की पुष्टि कर लेता है।

समूह-कार्य की विधि: दो-तीन बुजुर्ग पड़ोसियों से पूछिए — (क) क्या उन्होंने पिछली बार मत दिया, (ख) यदि नहीं, तो क्या बाधा थी, और (ग) क्या उन्हें घर से मतदान या डाक से मतदान के विषय में पता था। उत्तरों की एक छोटी तालिका बनाइए। नमूना उत्तर: “मेरी दादी, जो 84 वर्ष की हैं और दूर तक चल नहीं सकतीं, 2024 में घर से मतदान कर सकीं, क्योंकि एक अधिकारी उनका अनुरोध दर्ज करने आए थे। इससे पहले उन्होंने 2014 के बाद मत नहीं दिया था।” अपना उत्तर वास्तविक बातचीत से लिखिए — गढ़िए मत।
प्र2.
यदि आपके पास इंटरनेट है तो ई.सी.आई. की वेबसाइट — (https://www.eci.gov.in/persons-with-disabilities) देखें। ई.सी.आई. द्वारा दिव्यांगों के मताधिकार में सहायता के जो विभिन्न उपाए किए गए हैं, उन्हें पढ़ें और उनकी पहचान करें।
उत्तर

यह खोज-कार्य है, इसलिए पहले विधि, फिर यह कि पूर्ण उत्तर में क्या-क्या होना चाहिए।

विधि: पृष्ठ खोलिए और चार प्रकार के उपायों को ढूँढ़ते हुए पढ़िए — (i) मतदान केंद्र तक पहुँचना, (ii) केंद्र के भीतर जाना, (iii) मत डालना, और (iv) मतदान से पहले जानकारी। प्रत्येक उपाय अपने शब्दों में लिखिए और साथ में एक पंक्ति यह भी कि वह कौन-सी बाधा हटाता है। यही अंतिम स्तंभ सूची को उत्तर बनाता है।

बाधा का प्रकारअध्याय स्वयं जो उपाय बताता हैवेबसाइट पर क्या देखना है
केंद्र तक पहुँचनादिव्यांगों और वृद्धों के लिए घर से मतदान (2024 से); विशेष वर्ग के लिए डाक से मतदान; अधिकारियों का दूर-दूर तक जानामतदान केंद्र तक नि:शुल्क वाहन; प्राथमिकता से प्रवेश, ताकि दिव्यांग मतदाता को लंबी पंक्ति में खड़ा न रहना पड़े
केंद्र में प्रवेशपहिया कुर्सी और रैंप्स के लिए ऐप-आधारित अनुरोधप्रत्येक मतदान केंद्र पर रैंप, भूतल पर केंद्र, सुगम शौचालय, सहायता के लिए स्वयंसेवक
मत डालनाब्रेल-सक्षम मतपत्र; वी.वी.पी.ए.टी. के साथ ई.वी.एम.ई.वी.एम. की मतपत्र इकाई पर ब्रेल; न मार्क कर सकने वाले मतदाता के लिए सहयोगी की व्यवस्था; सांकेतिक भाषा में सहायता
जानकारीआयोग के अपने सुगम्यता पृष्ठ और ऐपसांकेतिक भाषा और उपशीर्षक वाले वीडियो; वह ऐप जिससे पहले से सहायता का अनुरोध दर्ज हो जाए
आयोग इसे अपना कर्तव्य क्यों मानता है: अनुच्छेद 326 का अधिकार प्रत्येक वयस्क नागरिक का है। यदि कोई दिव्यांग नागरिक उसका प्रयोग नहीं कर पाता, तो चूक प्रणाली की है, उसकी नहीं। इसलिए बाधा हटाने की अपेक्षा मतदाता से नहीं, आयोग से की जाती है। अध्याय की यह पंक्ति इसी तर्क से निकली है कि आयोग ने “प्रत्येक मतदाता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अनेक उपाय किए हैं”।
यदि इंटरनेट उपलब्ध न हो: तब भी अध्याय से अच्छा उत्तर लिखा जा सकता है। पुस्तक में गिनाए पाँच उपाय (घर से मतदान, डाक से मतदान, ब्रेल-सक्षम मतपत्र, ऐप-आधारित अनुरोध, पहिया कुर्सियाँ एवं रैंप्स) लिखिए और उसमें वह जोड़िए जो आपने अपने निकट के मतदान केंद्र पर स्वयं देखा हो। बाद में अवसर मिलने पर सूची को वेबसाइट से मिलाइए।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ