प्र1.
सार्वभौमिक मताधिकार के महत्वपूर्ण होने के कई कारण हैं। इनमें से कुछ को नीचे दिए गए मानस-मानचित्र में दर्शाया गया है। अपने दो कारण रिक्त मंजूषा में लिखें।
उत्तर
पहले वह पढ़िए जो मानस-मानचित्र (चित्र 5.4, पृष्ठ 120) पहले से देता है, क्योंकि आपके दो कारण इनकी पुनरावृत्ति नहीं होने चाहिए। केंद्र में “सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार क्यों?” के चारों ओर पुस्तक पाँच शाखाएँ छापती है —
| मानस-मानचित्र की शाखा | पुस्तक बाहर के गोले में क्या जोड़ती है |
|---|---|
| प्रत्येक व्यक्ति समान है | जाति, पंथ, लिंग, शिक्षा, धन-संपत्ति के आधार पर भेदभाव नहीं |
| प्रत्येक व्यक्ति के विचार महत्वपूर्ण हैं | राष्ट्र के भविष्य के निर्धारण में सभी भाग ले सकते हैं |
| निर्वाचित प्रतिनिधि निर्वाचकों के प्रति उत्तरदायी हैं | चुनाव में लोग इन्हें हरा सकते हैं |
| अपना भविष्य निर्धारित करने की शक्ति | लोग निश्चित करते हैं कि वे कैसा भविष्य चाहते हैं और उनका प्रतिनिधित्व उत्तम ढंग से कौन कर सकता है |
| नागरिक सहभागिता में वृद्धि | लोग अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान में भाग लेते हैं |
रिक्त मंजूषाओं के लिए अपने दो कारण — प्रत्येक ऐसा कारण हो जो सबके मतदान करने से निकलता हो, केवल मतदान से नहीं —
| आपकी मंजूषा | कारण, एक पंक्ति में | यह यहाँ क्यों बैठता है |
|---|---|---|
| सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण | सत्ता बल से नहीं, मत गिनकर बदलती है | जब प्रत्येक वयस्क का मतपेटी में हिस्सा है, तब हारने वाले पक्ष के पास लौटने का वैध मार्ग — अगला चुनाव — रहता है, लड़ने का कारण नहीं |
| नीतियाँ सबके लिए बनानी पड़ती हैं | जो दल निर्धनों, महिलाओं या किसी छोटे समुदाय की उपेक्षा करेगा, उनके मत खो देगा | जब किसी समूह का नाम सूची से काटा नहीं जा सकता, तब किसी समूह की उपेक्षा भी सुरक्षित नहीं रहती |
अन्य उचित कारण — अपनेपन की भावना बढ़ती है, क्योंकि मत देने वाले नागरिक को देश अपना लगता है; अल्पसंख्यकों की रक्षा होती है, क्योंकि केवल संख्या यह तय नहीं करती कि कौन भाग ले सकता है; और नागरिक प्रशिक्षित होते हैं, क्योंकि मत देने के लिए यह जानना पड़ता है कि प्रत्याशी वास्तव में क्या कहते हैं।
संकेत: मानस-मानचित्र की अच्छी मंजूषा छोटी होती है — चार-पाँच शब्द — और व्याख्या बाहर के गोले में रहती है, ठीक जैसे पुस्तक ने किया है।