प्र1.
भारत ने 1988 में मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी। चर्चा कीजिए कि क्या यह एक अच्छा निर्णय था।
उत्तर
कुल मिलाकर यह एक अच्छा निर्णय था, और सबसे मजबूत कारण है — संगति। 18 वर्ष के व्यक्ति को लगभग हर दूसरे मामले में वयस्क माना जाता है, इसलिए केवल मताधिकार रोके रखना कठिनाई से ही उचित ठहराया जा सकता था। दोनों पक्ष यहाँ दिए हैं, ताकि आप अपने समूह में तर्क कर सकें, केवल दावा न करें।
| 18 वर्ष करने के पक्ष में तर्क | जो तर्क विरोध में उठाए गए |
|---|---|
| 18 वर्ष में नागरिक कानून की दृष्टि से पूर्ण उत्तरदायी है और काम कर सकता है। यदि समाज उसे ये दायित्व सौंपता है, तो मत भी सौंपना चाहिए | कुछ लोगों का मत था कि 18 वर्ष का विद्यार्थी अब भी पढ़ रहा होता है और माता-पिता या मित्रों के कहने पर मत दे सकता है |
| भारत एक युवा देश है। 18–20 वर्ष के लोगों को बाहर रखने का अर्थ था उस बड़े वर्ग को बाहर रखना जिसका भविष्य आज के निर्णयों — शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण — से सबसे अधिक प्रभावित होता है | कुछ का मानना था कि तीन वर्ष और अध्ययन तथा अनुभव से अधिक सूचित मतदाता तैयार होगा |
| मतदान स्वयं नागरिकता की पाठशाला है। जितनी जल्दी आरंभ हो, उतनी ही अधिक संभावना है कि मतदान जीवन भर की आदत बने | राजनैतिक दल केवल युवाओं को लक्ष्य कर वादे कर सकते हैं |
| यह सार्वभौमिक मताधिकार के तर्क से मेल खाता है — जितनी कम रोक, उतना ही मतदाता-समूह संपूर्ण वयस्क जनता के निकट | बड़ा मतदाता-समूह पहले से विशाल चुनाव को और कठिन बना देता है |
‘वे अभी तैयार नहीं हैं’ वाला तर्क कमजोर क्यों है: यही तर्क 1947 में निरक्षर मतदाताओं के विषय में दिया गया था — कि मताधिकार केवल साक्षरों को मिले। संविधान निर्माताओं ने उसे तब अस्वीकार किया, क्योंकि जो अधिकार केवल उन्हें मिले जिन्हें कोई और ‘तैयार’ घोषित करे, वह अधिकार रह ही नहीं जाता। यदि 18 पर परिपक्वता की कसौटी मानें, तो 21 पर, 25 पर और अन्य समूहों पर भी माननी पड़ेगी। भारत ने इसके स्थान पर एक स्पष्ट और समान नियम चुना।
चर्चा के लिए संकेत: ध्यान दीजिए कि इस परिवर्तन से कोई सुरक्षा-उपाय कमजोर नहीं हुआ। 18 वर्ष के मतदाता को भी अपने निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत होना पड़ता है, वह भी गुप्त मतदान ही करता है, और वह भी किसी अन्य की ओर से मत नहीं दे सकता। मताधिकार का विस्तार करना और प्रक्रिया को कठोर रखना — ये दो अलग बातें हैं।