सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का अर्थ है — प्रत्येक वयस्क नागरिक को एक मत देने का अधिकार है और सभी मतों का समान मूल्य है। भारत में इसका अर्थ यह हुआ कि जाति, मत, नस्ल, धर्म, लिंग, शिक्षा, आय आदि का भेदभाव किए बिना 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक भारतीय नागरिक को मत देने का अधिकार है। ‘सार्वभौमिक’ शब्द का अर्थ यही है — किसी भी वयस्क समूह को बाहर नहीं रखा जाता।
तीनों शब्दों को अलग-अलग देखिए, क्योंकि हर शब्द कुछ काम कर रहा है —
| शब्द | यह किसे रोकता है | यह क्यों महत्वपूर्ण है |
|---|---|---|
| सार्वभौमिक | जाति, मत, नस्ल, धर्म, लिंग, शिक्षा या आय के आधार पर कोई भी रोक | एक निर्धन खेतिहर मजदूर और एक धनी प्राध्यापक — दोनों एक-एक मत देते हैं और दोनों मतों का मूल्य समान है |
| वयस्क | बालकों को मताधिकार | संविधान 18 वर्ष की आयु को वह आयु मानता है जब नागरिक यह निर्णय ले सकता है; भारत ने 1988 में यह आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दी |
| मताधिकार | ऐसी कृपा जिसे जब चाहे वापस ले लिया जाए | मताधिकार संविधान या सरकार द्वारा प्रदान किया गया अधिकार है — यहाँ अनुच्छेद 326 द्वारा। अंग्रेजी में ‘सफ्रेज’ इसका पर्यायवाची है |
इस अधिकार के साथ दो व्यावहारिक शर्तें भी हैं। पहली — मताधिकार का प्रयोग करने के लिए मतदाता का अपने निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत होना आवश्यक है। दूसरी — गंभीर अपराध में दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को मतदान करने से रोका जाता है। और एक नियम इसकी रक्षा करता है — कोई भी व्यक्ति अन्य व्यक्ति की ओर से मतदान नहीं कर सकता।