कक्षा ८ सामाजिक विज्ञान अध्याय 6 संसदीय प्रणाली— विधायिका और कार्यपालिका के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
भारत की संसद द्विसदनीय है — इसमें राष्ट्रपति , लोकसभा (हाउस ऑफ द पीपल या निम्न सदन) और राज्यसभा (काउंसिल ऑफ स्टेट्स या उच्च सदन) होते हैं। लोकसभा के सदस्यों का निर्वाचन सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर प्रत्यक्ष रूप से होता है (संविधान द्वारा निर्धारित अधिकतम संख्या 550 ); राज्यसभा के सांसद निर्वाचक मंडल द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं। दोनों सदनों में सीटों का आवंटन राज्य की जनसंख्या पर आधारित है। 1952 से अब तक 17 लोकसभाएँ हो चुकी हैं; 18वीं लोकसभा का गठन जून 2024 में हुआ। संविधान ने संसद के चार प्रमुख कार्य निर्धारित किए हैं — संवैधानिक कार्य (राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का निर्वाचन, संविधान में संशोधन, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, शक्तियों का पृथक्करण, संघीय व्यवस्था तथा मौलिक अधिकारों और नीति-निदेशक तत्वों को कायम रखना), कानून निर्माण , कार्यपालिका संबंधी उत्तरदायित्व और वित्ती
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| शब्द | अर्थ | अध्याय में कहाँ | पुस्तक क्या कहती है |
|---|---|---|---|
| द्विसदनीय | दो सदनों वाली विधायिका (‘द्वि’ = दो, ‘सदन’ = कक्ष) | ‘भारतीय संसद की संरचना’, पृष्ठ 142 | केवल एक प्रत्यक्ष निर्वाचित सदन पर्याप्त नहीं माना गया; संघवाद की भावना के अनुरूप राज्यों की परिषद — राज्यसभा — आवश्यक समझी गई |
| सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार | सभी वयस्क नागरिकों को सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि, लिंग, जाति या धर्म के भेद के बिना मतदान का अधिकार | ‘परिचय’, पृष्ठ 141 | संविधान द्वारा स्थापित आधारभूत सिद्धांत; लोकसभा इसी आधार पर प्रत्यक्ष रूप से चुनी जाती है |
| संघीय व्यवस्था (संघवाद) | शासन की वह प्रणाली जिसमें सत्ता का विभाजन केंद्र, राज्यों और स्थानीय सरकारों के मध्य होता है | इसे अनदेखा न करें, पृष्ठ 143 | यह “राष्ट्रीय एकता और स्थानीय सरकारों के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायक होती है” |
| राजदंड | राजा या रानी द्वारा समारोहों में अपनी शक्ति के प्रतीक के रूप में धारण की जाने वाली सुसज्जित छड़ी | हाशिया टिप्पणी, पृष्ठ 144 | सेंगोल 14 अगस्त 1947 को पं. नेहरू को सौंपा गया; अब लोकसभा में सभापति की कुर्सी के पास; चोल काल की परंपरा, शीर्ष पर नंदी (न्याय का प्रतीक) |
| विधेयक | प्रस्तावित कानून का प्रारूप जिसे कानून बनने से पूर्व संसद द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है | हाशिया टिप्पणी, पृष्ठ 146 | विधेयक अधिनियम बनने से पहले “एक लंबी तथा परिश्रमपूर्ण प्रक्रिया से गुजरता है” |
| अधिनियम | वह साधन जिसके माध्यम से कानून को लागू किया जाता है | ‘कानून निर्माण’, पृष्ठ 146 | आर.टी.ई. राज्यसभा में विधेयक के रूप में प्रस्तुत हुआ, अगस्त 2009 में लोकसभा में पारित हुआ और राष्ट्रपति की स्वीकृति से अधिनियम बना |
| वाचन | चर्चा शुरू होने से पहले सांसद विधेयक पढ़ते हैं | चित्र 6.8 की टिप्पणी, पृष्ठ 147 | परंपरा ब्रिटिश संसद से आई, जहाँ कई सांसद निरक्षर होने के कारण क्लर्क विधेयक पढ़कर सुनाता था |
| खंड | विधेयक के वे भाग जो उसके विशिष्ट विवरण की व्याख्या करते हैं | चित्र 6.8 की टिप्पणी, पृष्ठ 147 | उदाहरण— आर.टी.ई. उस आयु वर्ग को परिभाषित करता है जिस पर यह लागू होता है (6 से 14 वर्ष) |
| स्थायी समिति | सांसदों से बनी स्थायी समिति (सांसद बदल सकते हैं, समिति का ढाँचा वही रहता है) जो सरकार के कार्यों की जाँच-पड़ताल करती है, सुझाव देती है और प्रश्न पूछती है | हाशिया टिप्पणी, पृष्ठ 147 | चित्र 6.9 इसे कार्य करते हुए दिखाता है — स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी समिति और मंत्रालय का ‘की गई कार्यवाही’ उत्तर |
| राजपत्र | आधिकारिक सरकारी प्रकाशन जो कानूनी प्रलेखों और आधिकारिक सूचनाओं को प्रकाशित करता है | चित्र 6.8 की टिप्पणी, पृष्ठ 147 | राजपत्र अधिसूचना कानून निर्माण की प्रक्रिया का अंतिम चरण है |
| धन विधेयक | वित्तीय मामलों — कर निर्धारण, सरकारी ऋण आदि — से संबंधित कानून का प्रारूप | इसे अनदेखा न करें, पृष्ठ 148 | यह केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत हो सकता है, और उसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा आवश्यक है |
| प्रश्नकाल | एक निश्चित अवधि (सामान्यतः सत्र का पहला घंटा) जिसमें सांसद मंत्रियों से सरकारी नीतियों और गतिविधियों पर प्रश्न पूछते हैं | ‘कार्यपालिका संबंधी उत्तरदायित्व’, पृष्ठ 148 | यह संसद की वह प्रक्रिया है जो कार्यपालिका को ‘उत्तरदायी’ बनाती है, अर्थात उसे अपने सभी कार्यों और निर्णयों का औचित्य सिद्ध करना होता है |
| उत्पादकता | निर्धारित समय के विरुद्ध सदन ने वास्तव में कितने घंटे कार्य किया | हाशिया टिप्पणी, पृष्ठ 158 | एम. वेंकैया नायडू (2021)— 2004–14 में राज्यसभा की उत्पादकता लगभग 78%, उसके बाद लगभग 65%; सबसे न्यून 35.75% वर्ष 2018 में |
| संघ सूची / राज्य सूची / समवर्ती सूची | वे सूचियाँ जो तय करती हैं कि किन विषयों पर कौन कानून बना सकता है — केवल संघ, केवल राज्य, या दोनों | ‘संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची’, पृष्ठ 155 | यदि समवर्ती सूची के विषय पर संघ कानून बना दे तो राज्य को उसका पालन करना अनिवार्य है — इसीलिए आर.टी.ई. संपूर्ण भारत में लागू है |
| सत्र और बैठक | संसद वर्ष में तीन बार बैठती है (बजट, मानसून और शीतकालीन सत्र); प्रत्येक सत्र में कई बैठकें होती हैं | पृष्ठ 158 | सामान्यतः संसद सत्र प्रतिदिन 6 घंटे चलता है, आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है; राज्य विधानसभाओं की कार्यप्रणाली भी ऐसी ही है |
अभ्यास
- महत्वपूर्ण प्रश्न
- पुनरावलोकन करें
- आइए पता लगाएँ
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- इसे अनदेखा न करें
- आइए पता लगाएँ
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- आइए पता लगाएँ
- आइए पता लगाएँ
- इसे अनदेखा न करें
- प्रश्न और क्रियाकलाप