अन्वेषण अध्याय 6 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
यदि कार्यपालिका के सदस्य विधायिका का ही अंग हैं तो हम कैसे कह सकते हैं कि यह शक्तियों का पृथक्करण है? (संकेत— ऊपर दिए गए विधायिका वाले भाग पर पुनः ध्यान दें।)
उत्तर

क्योंकि भारत में शक्तियों के पृथक्करण का अर्थ है कार्यों और उत्तरदायित्व का पृथक्करण — व्यक्तियों का नहीं। वही सांसद मंत्री हो सकती है; किंतु मंत्री के रूप में वह जो कार्य करती है, वह संसद का कार्य नहीं है, और संसद उससे उस कार्य का हिसाब माँग सकती है।

क्या साझा हैफिर भी क्या पृथक है
मंत्री दोनों सदनों के सांसदों में से चुने जाते हैं, इसलिए व्यक्ति वही हैंकार्य अलग हैं : विधायिका कानून बनाती और देख-रेख करती है; कार्यपालिका उन्हें लागू करती है
अधिकांश विधेयक कार्यपालिका प्रस्तुत करती हैउन्हें पारित केवल संसद कर सकती है — मंत्री के विधेयक को भी समिति की जाँच, खंड-दर-खंड चर्चा और दोनों सदनों के मतदान से गुजरना पड़ता है
बजट कार्यपालिका तैयार करती हैव्यय की स्वीकृति केवल संसद दे सकती है
मंत्री सदन में बैठते हैं और वहीं उत्तर देते हैंवे वहाँ उन लोगों के रूप में बैठते हैं जिन्हें अपना औचित्य सिद्ध करना है — प्रश्नकाल में और समितियों के समक्ष। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है और उसके द्वारा हटाई जा सकती है

तीसरा अंग उत्तर को पूरा करता है। न्यायपालिका दोनों से पूर्णतः बाहर है। वह जाँचती है कि संसद द्वारा पारित कानून संवैधानिक ढाँचे का उल्लंघन न करें, और कार्यपालिका द्वारा कानून लागू करते समय संविधान का उल्लंघन होने पर हस्तक्षेप कर सकती है। इसलिए जहाँ विधायिका और कार्यपालिका एक-दूसरे में मिलती भी हैं, वहाँ भी उनमें से कोई अपने ही आचरण का अंतिम निर्णायक नहीं है।

संतुलन को स्पष्ट रूप से समझिए: जो प्रणाली व्यक्तियों को पूरी तरह अलग रखती है (जैसे राष्ट्रपति-प्रणाली) उसमें पृथक्करण अधिक तीखा होता है, किंतु गतिरोध भी हो सकता है, जहाँ कार्यपालिका और विधायिका एक-दूसरे के साथ काम करने से ही इनकार कर दें। संसदीय प्रणाली इस अतिव्यापन को स्वीकार करती है और बदले में कुछ और पाती है — ऐसी सरकार जिसे हर बैठक के दिन निर्वाचित सदन के सामने अपनी सफाई देनी पड़ती है, और जो उस सदन का विश्वास खोते ही गिर जाती है। 1956 में रेल दुर्घटना के बाद लाल बहादुर शास्त्री का त्यागपत्र, जबकि उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया था, दिखाता है कि इस उत्तरदायित्व को कितनी गंभीरता से लिया जाता था।
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