अन्वेषण अध्याय 6 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कौन किसे रिपोर्ट कर रहा है?
उत्तर

मंत्रालय समिति को रिपोर्ट कर रहा है, और समिति संसद को। इस अंश को दो दिशाओं में पढ़िए—

  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी स्थायी समिति — सांसदों की समिति — ने एक अनुशंसा की थी। मंत्रालय (यहाँ आयुष मंत्रालय) को ‘की गई कार्यवाही’ शीर्षक के अंतर्गत लिखित रूप में बताना पड़ा कि उसने उस अनुशंसा पर क्या किया। अर्थात कार्यपालिका विधायिका को रिपोर्ट कर रही है।
  • फिर समिति अनुशंसा और उत्तर दोनों को एक रिपोर्ट में रखती है — यह अंश एक सौ बासठवीं रिपोर्ट से है — जो राज्यसभा के पटल पर (20 दिसंबर 2024) और लोकसभा के पटल पर (फरवरी 2025) रखी जाती है। अर्थात समिति संसद के दोनों सदनों को, और उनके माध्यम से जनता को, रिपोर्ट कर रही है।
अध्याय इसे क्यों दिखाता है: प्रश्नकाल कार्यपालिका के उत्तरदायित्व का प्रत्यक्ष और दिखाई देने वाला रूप है। यह दस्तावेज उसका शांत रूप है। यहाँ हर अनुशंसा का लिखित उत्तर मिलता है जिसे कोई भी महीनों बाद पढ़ सकता है — इससे बचना मंत्रालय के लिए एक मौखिक उत्तर से कहीं कठिन है। यह भी ध्यान दीजिए कि इन समितियों में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद हो सकते हैं, इसलिए सरकार बदलने पर यह जाँच रुकती नहीं।
प्र2.
किस विषय की समीक्षा की गई है?
उत्तर

विषय है मद 1.2 — “प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पी.एच.सी.), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सी.एच.सी.) और जिला चिकित्सालयों (डी.एच.) में आयुष सुविधाओं का सह-स्थान”

सरल शब्दों में— यह देखा गया कि क्या सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के तीनों स्तरों पर, अर्थात गाँव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उससे ऊपर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला चिकित्सालय में, आयुष (चिकित्सा की पारंपरिक पद्धतियाँ) की सेवाएँ नियमित सेवाओं के साथ-साथ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसी के भीतर विशेष रूप से यह विषय है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने आयुष का पृथक विभाग स्थापित किया है या नहीं।

सुझाव: किसी भी समिति-रिपोर्ट का अंश पढ़ते समय सबसे पहले क्रमांक वाला शीर्षक देखिए (यहाँ 1.2)। उसके नीचे के उप-क्रमांक — अनुशंसा के लिए 1.2.1 और उत्तर के लिए 1.2.2 — बताते हैं कि आगे का सारा विवरण उसी एक विषय से संबंधित है।
प्र3.
समिति की अनुशंसा पहचानिए।
उत्तर

समिति की अनुशंसा अनुच्छेद 1.2.1 में है—

समिति ने ध्यान दिलाया कि कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयुष का पृथक विभाग स्थापित नहीं किया गया है। इसलिए आयुष प्रणाली को प्रोत्साहित करने और आयुष स्वास्थ्य देखभाल में उत्तम समन्वय के लिए उसने अनुशंसा की कि मंत्रालय ऐसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर बल दे और उन्हें प्रेरित करे कि वे ऐसा विभाग स्थापित करें, जिससे आयुष क्षेत्र और उसकी योजनाओं का शीघ्र विकास तथा कार्यान्वयन हो सके। (समिति अपनी रिपोर्ट के अंश 2.13 का उल्लेख करती है।)

समिति की भाषा पर ध्यान दीजिए: वह “बल दे और प्रेरित करे” कहती है, “आदेश दे” नहीं। संसदीय समिति अनुशंसा करती है, आदेश नहीं देती। यही एक शब्द उस संवैधानिक कठिनाई की ओर संकेत कर देता है जिसे मंत्रालय अपने उत्तर में उठाता है।
प्र4.
सरकार का प्रत्युत्तर क्या है?
उत्तर

सरकार का उत्तर अनुच्छेद 1.2.2 में, ‘की गई कार्यवाही’ शीर्षक के अंतर्गत है। इसके तीन भाग हैं—

  1. एक संवैधानिक सीमा। “सार्वजनिक स्वास्थ्य” राज्य का विषय है, इसलिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आयुष का पृथक विभाग बनाने का अधिकार संबंधित राज्य/केंद्र शासित सरकारों के क्षेत्र में आता है — संघीय मंत्रालय इसका आदेश नहीं दे सकता।
  2. उस सीमा के भीतर उसने क्या किया। आयुष मंत्रालय ने विभिन्न बैठकों में राज्य सरकारों से अनुरोध किया है कि वे पृथक निदेशालय स्थापित करें और एस.पी.एम.यू. (राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई) तथा डी.पी.एम.यू. (जिला परियोजना प्रबंधन इकाई) में कर्मचारियों की नियुक्ति करें, जिससे राष्ट्रीय आयुष मिशन (एन.ए.एम.) योजना का शीघ्र विकास और कार्यान्वयन हो सके।
  3. अब तक का परिणाम। वर्तमान में 24 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पृथक आयुष निदेशालय उपलब्ध है।
यह आदान-प्रदान संघवाद के बारे में क्या सिखाता है: समिति कुछ करवाना चाहती थी; मंत्रालय उद्देश्य से सहमत था, किंतु उसने बताया कि यह शक्ति राज्यों के पास है, और अपनी जगह उसने जो प्रेरित करने का प्रयास किया उसका ब्योरा दिया। यही संघवाद है जैसा अध्याय बताता है — सत्ता का विभाजन केंद्र और राज्यों के बीच। और यही उत्तरदायित्व भी है, क्योंकि मंत्रालय को 24 की संख्या अभिलेख में दर्ज करनी पड़ी, जिसके सामने अगली रिपोर्ट को मापा जा सकेगा।
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