अन्वेषण अध्याय 5 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपके निर्वाचन क्षेत्र से सांसद और विधायक कौन हैं? (एक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में दो या अधिक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र हो सकते हैं।)
उत्तर

यह अपने क्षेत्र के लिए स्वयं पता लगाइए — किंतु सही क्रम में, क्योंकि प्रश्न में कोष्ठक में दिया संकेत ही पूरे कार्य की कुंजी है।

चरण 1 — अपने निर्वाचन क्षेत्र पहचानिए। आप एक साथ दो निर्वाचन क्षेत्रों में रहते हैं — एक संसदीय (लोकसभा) निर्वाचन क्षेत्र और उसके भीतर एक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र। लोकसभा निर्वाचन के लिए देश को 543 निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित किया गया है; इनमें से प्रत्येक में दो या अधिक विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र होते हैं, क्योंकि किसी राज्य में सांसदों से कहीं अधिक विधायक होते हैं।

चरण 2 — नाम पता कीजिए। घर पर पूछिए, परिवार के किसी वयस्क का मतदाता पहचान-पत्र देखिए (उस पर विधान सभा क्षेत्र लिखा रहता है), स्थानीय समाचार-पत्र देखिए, या भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर देखिए।

चरण 3 — इस प्रकार लिखिए:

 निर्वाचन क्षेत्रप्रतिनिधिकिस सदन के लिए निर्वाचित
सांसदआपका संसदीय निर्वाचन क्षेत्रनामलोकसभा, नई दिल्ली
विधायकआपका विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रनामआपके राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की विधान सभा
एक सांसद और अनेक विधायक क्यों: लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की जनसंख्या विधान सभा क्षेत्र की तुलना में कहीं अधिक होती है, इसलिए उसे कई विधान सभा क्षेत्रों में बाँटा जाता है। इसी कारण एक सांसद के क्षेत्र का प्रतिनिधित्व पाँच, छह या सात विधायक कर सकते हैं — और इसीलिए प्रश्न में “विधायक” बहुवचन में भी लिखा है। आपका अपना मत एक विधायक और एक सांसद को जाता है, किंतु आपका चुना सांसद आसपास के सभी विधान सभा खंडों के मतदाताओं का भी प्रतिनिधित्व करता है।
नमूना उत्तर (अपने क्षेत्र के अनुसार बदलिए): “हमारे संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से एक सांसद हैं, और हमारा विधान सभा क्षेत्र उसी के भीतर छह अन्य विधान सभा क्षेत्रों के साथ आता है, जिनमें से प्रत्येक का अपना विधायक है। दोनों के नाम मुझे माँ के मतदाता पहचान-पत्र से मिले और मैंने आयोग की वेबसाइट से उनकी पुष्टि की।”
प्र2.
इनमें से प्रत्येक किस राजनीतिक दल से संबंधित है?
उत्तर

यह पता लगाकर तथ्य के रूप में लिखिए। दो बातें उत्तर को केवल नाम से आगे ले जाती हैं।

कहाँ देखें: भारत निर्वाचन आयोग प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम प्रकाशित करता है, जिसमें विजेता प्रत्याशी के साथ वह दल भी दिया रहता है जिसके चिह्न पर उसने चुनाव लड़ा। स्थानीय समाचार-पत्र का परिणाम पृष्ठ, या विधान सभा तथा लोकसभा की सदस्य-सूची भी यही बताती है।

पहली बात — सांसद और विधायक का एक ही दल का होना आवश्यक नहीं। यह सामान्य और पूरी तरह स्वाभाविक है — मतदाता विधान सभा के लिए एक दल और लोकसभा के लिए दूसरे दल को चुन सकता है, क्योंकि दोनों सदन अलग-अलग विषय देखते हैं। अध्याय के शब्दों में — लोकसभा “संपूर्ण देश को प्रभावित करने वाली समस्याओं पर विचार करती है”, जबकि विधान सभा के सदस्य “मुख्यत: क्षेत्रीय समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं।”

दूसरी बात — सदस्य किसी दल का हो सकता है या निर्दलीय। राजनैतिक दलों का पंजीकरण भारत निर्वाचन आयोग करता है — चित्र 5.9 में दिखाए चार अति-महत्वपूर्ण कार्यों में से एक यही है — और प्रत्येक पंजीकृत दल का अपना चुनाव चिह्न होता है। कोई प्रत्याशी बिना किसी दल के भी खड़ा हो सकता है।

दल से प्रतिनिधि के काम पर क्या फर्क पड़ता है: लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन राष्ट्रीय सरकार का गठन करता है और सामान्यतः उसका नेता प्रधानमंत्री बनता है; राज्य में इसी प्रकार बहुमत प्राप्त दल का नेता मुख्यमंत्री बनता है। इसलिए सत्ताधारी दल का प्रतिनिधि सरकार के भीतर से काम करता है, जबकि किसी अन्य दल का प्रतिनिधि मुख्यतः प्रश्न, वाद-विवाद और विपक्ष के माध्यम से। विधायिका के कार्य में दोनों भूमिकाएँ आवश्यक हैं।
तटस्थ रहकर लिखिए। कार्य यह दर्ज करना है कि प्रत्येक प्रतिनिधि किस दल का है — यह नहीं बताना कि कौन-सा दल बेहतर है। विद्यालय के अभ्यास में तथ्य लिखिए और निर्णय मतदाता पर छोड़ दीजिए।
प्र3.
सांसद और विधायक क्रमशः किन विषयों की चिंता करते हैं?
उत्तर

संक्षिप्त उत्तर अध्याय की ‘पुनरावलोकन करें’ मंजूषा में ही है — सांसद संपूर्ण देश को प्रभावित करने वाली समस्याओं पर विचार करते हैं; विधायक मुख्यत: क्षेत्रीय समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं। चित्र 5.22 इसे विद्यार्थियों की भाषा में कहता है — सांसद हमारा प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय संसद में करते हैं, जबकि विधायक हमारे राज्य की विधान सभा में; दोनों एक जैसी चुनावी प्रक्रिया से चुने जाते हैं, पर शासन के अलग-अलग स्तरों पर काम करते हैं।

 सांसद (संसद सदस्य)विधायक (विधान सभा सदस्य)
किस सदन के लिएलोकसभा — संसद का निम्न सदनकिसी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की विधान सभा
किसके द्वारा निर्वाचित543 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में से एक के प्रत्येक पंजीकृत वयस्क मतदाता द्वाराउस विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा जहाँ वे पंजीकृत हैं
मुख्य विषयसंपूर्ण देश को प्रभावित करने वाले विषय — राष्ट्रीय कानून और बजट, प्रतिरक्षा और विदेश संबंध, रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, तथा वे विषय जो राज्यों की सीमाओं के पार जाते हैंराज्य और क्षेत्र के विषय — राज्य के कानून, राज्य के विद्यालय और अस्पताल, सड़कें, जलापूर्ति, बिजली, भूमि और स्थानीय विकास
इस सदन से नेताबहुमत प्राप्त दल या गठबंधन का नेता प्रधानमंत्री बनता हैबहुमत प्राप्त दल का नेता मुख्यमंत्री बनता है
विषयों का यह बँटवारा क्यों: भारत इतना विशाल और विविध है कि हर निर्णय एक ही स्थान पर नहीं लिया जा सकता। जिन विषयों में पूरे देश में एकरूपता चाहिए — मुद्रा, प्रतिरक्षा, विदेश नीति — वे राष्ट्रीय स्तर के हैं, जहाँ सांसद बोलता है। जिन विषयों में स्थानीय परिस्थितियाँ भिन्न हैं — कोई नहर, कोई जिला अस्पताल, किसी राज्य की विद्यालय व्यवस्था — वे राज्य स्तर के हैं, जहाँ विधायक बोलता है। सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार दोनों में चलता है, इसीलिए नागरिक हर स्तर पर अलग प्रतिनिधि चुनता है, सबके लिए एक नहीं।
स्वयं जाँचिए: एक सप्ताह के स्थानीय समाचार पढ़िए और उनमें आई समस्याओं को दो स्तंभों में बाँटिए — जिन्हें आपका विधायक उठा सकता है और जिनके लिए आपका सांसद चाहिए। आपके वार्ड की जलापूर्ति, राज्य राजमार्ग, विद्यालय में नियुक्ति — विधायक। रेल सेवा, कोई राष्ट्रीय योजना, आयात शुल्क — सांसद। कुछ समस्याएँ दोनों में आएँगी, और उन पर चर्चा करना स्वयं में उपयोगी है।
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