प्र1.
अपने विद्यालय या आस-पास उन शिक्षकों की पहचान करें जिन्होंने चुनाव कार्य (ड्यूटी) किया हो। अपनी कक्षा में उन्हें अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित करें।
उत्तर
यह क्षेत्र-कार्य है। इसे कैसे करना है और उसका अच्छा विवरण कैसा होगा — दोनों नीचे दिए हैं।
शिक्षकों को ही क्यों? क्योंकि चित्र 5.12 में छपा पैमाना ऐसा है — 2024 में लगभग 96.8 करोड़ मतदाता, 543 संसदीय निर्वाचन क्षेत्र और 10 लाख से अधिक मतदान केंद्र। प्रत्येक मतदान केंद्र पर एक पीठासीन अधिकारी और तीन-चार मतदान अधिकारी चाहिए। अध्याय स्पष्ट कहता है — “इस संपूर्ण प्रक्रिया में सहायता के लिए शिक्षकों सहित अनेक लोगों को नियुक्त किया जाता है।” सरकारी विद्यालयों के शिक्षक इसलिए लगाए जाते हैं क्योंकि वे शिक्षित हैं, देश के हर भाग में उपस्थित हैं और सरकारी कर्मचारी होने के नाते विधिपूर्वक तैनात किए जा सकते हैं।
10,00,000 से अधिक मतदान केंद्र
× प्रति केंद्र लगभग 4 अधिकारी
→ एक ही आम चुनाव के लिए लगभग 40 लाख मतदान कर्मी
× प्रति केंद्र लगभग 4 अधिकारी
→ एक ही आम चुनाव के लिए लगभग 40 लाख मतदान कर्मी
कैसे करें:
- पहचान: अपनी कक्षा-अध्यापिका या प्रधानाचार्य से पूछिए कि किन शिक्षकों ने चुनाव कार्य किया है; परिवार और पड़ोस में भी पूछिए, क्योंकि बैंक कर्मचारी तथा अन्य सरकारी कर्मचारी भी लगाए जाते हैं।
- अनुमति अपने शिक्षक के माध्यम से लीजिए और एक सुविधाजनक कालांश तय कीजिए।
- प्रश्न पहले से तैयार कीजिए — बिना तैयारी की बातचीत अतिथि का समय व्यर्थ करती है।
- टिप्पणी लीजिए और एक संक्षिप्त प्रतिवेदन कक्षा के सूचना-पट्ट के लिए लिखिए।
पूछने योग्य प्रश्न:
- आपका कार्य क्या था — प्रथम, द्वितीय या तृतीय मतदान अधिकारी, अथवा पीठासीन अधिकारी?
- आपको कौन-सा प्रशिक्षण मिला और मतदान से कितने दिन पहले?
- आप मतदान केंद्र तक कैसे पहुँचे, और ई.वी.एम. कैसे ले जाई गईं तथा रात में कहाँ रखी गईं?
- प्रत्येक मतदाता की कौन-कौन-सी जाँच आपने की, और यदि किसी का नाम सूची में न होता तो क्या करते?
- मतदान समाप्त होने पर क्या हुआ — मशीनें कैसे सीलबंद की गईं?
- सबसे कठिन क्या था? किस बात ने आपको चौंकाया? क्या आपने सुगमता के उपायों का उपयोग होते देखा?
नमूना उत्तर (वास्तविक बातचीत से अपना लिखिए): “हमारे विज्ञान शिक्षक श्री रमेश कुमार 2024 में एक ग्रामीण मतदान केंद्र पर द्वितीय मतदान अधिकारी थे। उन्हें दो बार प्रशिक्षण मिला, वे एक दिन पहले शाम को सीलबंद ई.वी.एम. के साथ केंद्र पहुँचे, ग्यारह घंटे में लगभग 700 अंगुलियों पर स्याही लगाई, और कहते हैं कि सबसे कठिन था उन दो मतदाताओं को समझाना जिनके नाम सूची से हट गए थे — इसीलिए अब वे सबसे कहते हैं कि सूची पहले ही जाँच लें।”
यह क्रियाकलाप अध्याय में क्यों है: यह ‘प्रणाली’ जैसे अमूर्त शब्द को मूर्त बना देता है। जिस विद्यार्थी ने किसी शिक्षक से शाम छह बजे ई.वी.एम. सील करने का वर्णन सुना है, वह किसी भी रेखाचित्र से कहीं बेहतर समझता है कि इतने बड़े चुनाव के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त से निर्वाचन अधिकारी तक की श्रृंखला क्यों चाहिए — और अध्याय इसे “एक विशाल कार्य” क्यों कहता है।