प्र1.
आपके विचार में यह व्यंग्यचित्र (चित्र 4.3) क्या अभिव्यक्त करने का प्रयास कर रहा है? (ध्यान रखें कि टेलीग्राफ, जिसने त्वरित संचार को पहली बार संभव बनाया, उस समय हाल ही में आविष्कृत हुआ था)। चित्र के विभिन्न तत्वों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर
संदेश है — प्रभुत्व को वीरता की तरह प्रस्तुत करना। एक अकेला यूरोपीय एक पैर अफ्रीका के सुदूर दक्षिण में और दूसरा सुदूर उत्तर में रखकर खड़ा है, और पूरे महाद्वीप पर फैला टेलीग्राफ का तार थामे हुए है — चित्र कहता है कि एक व्यक्ति, एक राष्ट्र के बल पर, संपूर्ण महाद्वीप पर पैर फैलाकर उसे नियंत्रित कर सकता है। अब चित्र के तत्व एक-एक कर देखिए।
| तत्व | चित्र में क्या दिखता है | यह क्या कह रहा है |
|---|---|---|
| मुद्रा | पैर अफ्रीका के दक्षिणी छोर से उत्तरी छोर तक फैले हुए | पूरा महाद्वीप एक व्यक्ति का एक डग है — बीच में कुछ भी रुकने योग्य नहीं |
| आकार | आकृति महाद्वीप से भी ऊँची, सिर बादलों के ऊपर | अफ्रीका खड़े होने की भूमि मात्र रह जाता है; उपनिवेशक अतिमानव जैसा |
| टेलीग्राफ का तार | दोनों फैले हाथों में तना हुआ, अफ्रीका की पूरी लंबाई में | त्वरित संचार की नई तकनीक ही नियंत्रण का उपकरण है : लंदन से आदेश अब सप्ताहों के स्थान पर मिनटों में पहुँच सकता था। साम्राज्य को तार से बाँधा जा रहा है |
| वेशभूषा | सैनिक-सी पोशाक, भारी बूट, कंधे पर बंदूक, उठे हुए हाथ में टोप | ‘उद्योगपति’ सशस्त्र है। वाणिज्य और विजय एक ही व्यक्ति हैं |
| कौन अनुपस्थित है | पूरे चित्र में एक भी अफ्रीकी नहीं | महाद्वीप को खाली भूमि की तरह दिखाया गया है, जिसे बस ले लेना है — यही सबसे बताने वाला विवरण है |
| कहाँ छपा | पंच पत्रिका, लंदन, 1892 | पाठक ब्रिटिश जनता थी, और व्यंग्यचित्र ने उसे प्रसन्न किया : देखो, हमारे लोग वहाँ क्या कर रहे हैं |
टेलीग्राफ का संकेत क्यों दिया गया है : टेलीग्राफ से पूर्व लंदन से किसी दूरस्थ उपनिवेश तक संदेश जहाज से जाता था और सप्ताहों लगते थे; वहाँ बैठे अधिकारी को स्वयं निर्णय लेना पड़ता था। तार बिछते ही निर्णय साम्राज्य की राजधानी में लिए जाकर उसी दिन लागू किए जा सकते थे। इसीलिए चित्रकार ने ध्वज नहीं, तार चुना : यह उस साम्राज्य का सटीक प्रतीक है जिसे अब केवल दावा नहीं, वास्तव में चलाया जा सकता था। और इसी अध्याय में आप यही तकनीक भारत में भी देखेंगे — जहाँ टेलीग्राफ नेटवर्क का व्यय भी, रेलमार्गों की भाँति, भारतीय कर-राजस्व से चुकाया गया।
क्या आप जानते हैं? यह चित्र प्रायः ‘द रोड्स कोलोसस’ नाम से जाना जाता है और इसमें दिखाए गए व्यक्ति की पहचान सामान्यतः ब्रिटिश व्यवसायी सेसिल रोड्स से की जाती है, जो अफ्रीका की पूरी लंबाई में टेलीग्राफ और रेल लाइन चाहते थे। शीर्षक में रोड्स द्वीप की प्राचीन विशाल प्रतिमा ‘कोलोसस’ की ओर भी संकेत है, जिसके विषय में कहा जाता था कि वह बंदरगाह के मुहाने पर पैर फैलाए खड़ी थी।