प्र1.
गुरिल्ला युद्ध के बारे में अधिक जानने का प्रयास करें। दुनिया के अन्य किन देशों में यह पद्धति अपनाई गई? उन्होंने इसके लिए किन भौगोलिक लाभों का उपयोग किया? अपने निष्कर्षों पर समूहों में चर्चा करें।
उत्तर
अध्याय के अनुसार गुरिल्ला युद्ध वह पद्धति है जिसमें ‘छोटे-छोटे दल किसी भूभाग के गहन ज्ञान के आधार पर तीव्र गति से आकस्मिक आक्रमण कर शत्रुओं की विशाल सेना को परास्त कर देते हैं’। ‘गुरिल्ला’ शब्द स्वयं स्पेनी है — इसका अर्थ है ‘छोटा युद्ध’ — और यह नेपोलियन के विरुद्ध स्पेन के प्रतिरोध से प्रचलित हुआ।
यह पद्धति काम क्यों करती है: बड़ी नियमित सेना तभी शक्तिशाली है जब वह एकत्र हो सके, अपनी रसद पा सके और आमने-सामने का युद्ध लड़ सके। गुरिल्ला तीनों से इनकार कर देते हैं। वे वहाँ प्रहार करते हैं जहाँ शत्रु कमजोर है, उसके एकत्र होने से पहले लुप्त हो जाते हैं, और उसकी रसद-रेखा काट देते हैं। इससे बड़ी सेना का लाभ — उसका आकार — बोझ बन जाता है, क्योंकि आकार को सड़क, अनाज और चारा चाहिए। तीन वर्षों तक विशाल सेना से आक्रमण करने वाले शाइस्ता खाँ के शिविर पर छत्रपति शिवाजी का केवल कुछ सैनिकों के साथ रात्रि-आक्रमण ठीक यही तर्क है।
| कहाँ | लगभग कब | किस भौगोलिक लाभ का उपयोग |
|---|---|---|
| भारत — मराठे | 17वीं–18वीं शताब्दी | सह्याद्रि (पश्चिमी घाट) — खड़ी पहाड़ियाँ, वनाच्छादित ढलानें, सँकरे घाट-मार्ग और सैकड़ों पहाड़ी दुर्ग जिनमें लौटकर आश्रय लिया जा सके |
| स्पेन | 1808–1814, नेपोलियन के विरुद्ध | पर्वतीय, शुष्क भूभाग और खराब सड़कें — फ्रांसीसी रसद-दल कुछ ही निश्चित मार्गों से चल सकते थे |
| वियतनाम | 20वीं शताब्दी का मध्य | घने उष्णकटिबंधीय वन, नदी-डेल्टा और सुरंगों का जाल; भारी वर्षा जिससे वाहन और विमान सीमित हो जाते थे |
| क्यूबा | 1956–1959 | सिएरा मायेस्त्रा के पर्वत, जो मुख्य सड़कों और नगरों से दूर थे |
| दक्षिण अफ्रीका — बोअर दस्ते | 1900–1902 | विशाल खुला घास-मैदान और बहुत कम रेल-मार्ग; छोटे घुड़सवार दल दूर तक जाकर स्थानीय संसाधनों पर टिक सकते थे |
| चीन | 1930–1940 का दशक | विशाल दूरियाँ और ग्रामीण भीतरी भाग, जहाँ सेना गाँवों में बिखर सकती थी |
समान प्रतिरूप। अंतिम स्तंभ पढ़िए — वही तीन भौगोलिक स्थितियाँ बार-बार आती हैं:
- विषम भूभाग — पर्वत, वन, दलदल या मरुस्थल — जिसे बड़ी टुकड़ी शीघ्रता से पार नहीं कर सकती।
- कम मार्ग, जिससे बड़ी सेना का मार्ग पूर्वानुमेय हो जाता है और उसकी रसद काटी जा सकती है।
- स्थानीय ज्ञान और स्थानीय समर्थन — रक्षक हर पगडंडी, झरने और गुफा को जानते हैं, आक्रमणकारी नहीं। यही अध्याय की परिभाषा वाला ‘भूभाग का गहन ज्ञान’ है, और यह ऐसी वस्तु है जिसे शत्रु खरीद नहीं सकता।
समूह-चर्चा के लिए: यह पूछिए कि क्या गुरिल्ला युद्ध अकेले कभी पर्याप्त होता है। मराठों के प्रसंग में नहीं था — अध्याय स्पष्ट कहता है कि छापामार आक्रमणों के साथ दुर्ग भी थे, जो इन छोटे दलों को आश्रय और रक्षा का ठिकाना देते थे। इस विचार को तालिका के किसी एक अन्य उदाहरण पर भी परखिए।