अन्वेषण अध्याय 2 आइए पता करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपके विचार से उन दिनों सेना को बनाए रखने एवं युद्ध संचालन के लिए किन प्रकार के संसाधनों की आवश्यकता होती होगी? समूहों में विभिन्न प्रकार के व्ययों पर चर्चा करें, जैसे — हथियारों या सैनिकों के लिए भोजन से लेकर युद्ध में पशुओं का उपयोग, सड़क निर्माण इत्यादि।
उत्तर

इस काल में सेना को चलाने से कहीं अधिक महँगा उसे बनाए रखना था। अधिकांश व्यय हथियारों पर नहीं, भोजन, पशुओं और वेतन पर होता था — और यह व्यय प्रतिदिन करना पड़ता था, चाहे युद्ध हो या न हो।

व्यय का प्रकारइसमें क्या आता थाअध्याय में इसका प्रमाण
मनुष्यसैनिकों का वेतन, भोजन, तंबू, वस्त्र; साथ चलने वाले रसोइए, लोहार, बढ़ई, भिश्ती, वैद्यऔरंगजेब ने दक्कन के अभियानों हेतु 25 वर्ष तक “विशाल सेना का रख-रखाव” किया
पशुयुद्ध के घोड़े, हाथी, ऊँट और गाड़ियाँ खींचने वाले बैल; और उनका चारा, सईस तथा चिकित्सामनसबदारों को “हाथियों, घोड़ों, ऊँटों और सैनिकों की एक निश्चित संख्या” रखनी पड़ती थी; रानी दुर्गावती के पास 1,000 हाथी थे
हथियार एवं बारूदतलवारें, धनुष, कवच; 16वीं शताब्दी से क्षेत्रीय तोपखाना और तोड़ेदार बंदूकें, साथ ही बारूद, गोले और तोप ढालने वाले कारीगर1526 में बाबर की पानीपत विजय में “बारूद, क्षेत्रीय तोपखाने एवं तोड़ेदार बंदूकों पर अतिशय निर्भरता थी”
दुर्ग एवं घेराबंदीदुर्गों का निर्माण एवं उनमें सैनिक रखना; घेरा डालने के साधन और महीनों की रसदकुंभलगढ़ की 36 किलोमीटर लंबी दीवार; अकबर ने चित्तौड़गढ़ को पाँच माह से अधिक घेरे रखा
आवागमनसड़कें, सेतु, नदी-नौकाएँ, सामान की गाड़ियाँ, पड़ावसल्तनत काल में “विशेषकर उत्तर भारत में सड़क मार्गों, सेतुओं” का निर्माण हुआ; असम में मुगलों के पास नदी-नौकाओं का बड़ा बेड़ा था
निरीक्षण एवं अभिलेखयह जाँचने वाले अधिकारी कि सैनिक वास्तव में हैं और पशु वैसे ही हैं जैसा वचन दिया गया था“नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण किए जाते थे”

धन कहाँ से आता था — अध्याय तीन स्रोत बताता है: सैन्य अभियानों से प्राप्त लूट, साधारण जन एवं विजित क्षेत्रों पर लगाए गए कर, तथा गुलाम व्यापार में भागीदारी। सल्तनत में पहले दो को एकत्र करने का तंत्र इक्ता था — कुलीनों को क्षेत्र सौंपे जाते थे, जो कर वसूलकर व्यय काटने के बाद शेष सुल्तान के कोष में भेजते थे, जो “सेना के रख-रखाव के लिए विशेष रूप से आवश्यक” था।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: क्योंकि यही व्यय इस अध्याय की बहुत-सी राजनीति समझा देता है। मलिक काफूर की दक्षिण विजयों के बारे में कहा गया है कि उनसे “सल्तनत के विशाल सैन्य तंत्र को आर्थिक रूप से समर्थ बनाया” — अर्थात सेना को वेतन देते रहने के लिए विजय करते रहना पड़ता था। और काल के दूसरे छोर पर, दक्कन में विशाल सेना के रख-रखाव ने “साम्राज्य के राजकोष को क्षीण किया और प्रशासन पर भारी दबाव डाला”, जिसे 1707 के बाद मुगल शक्ति के तीव्र पतन का एक प्रमुख कारक माना जाता है। सेना शक्ति का स्रोत भी थी और उसे खा जाने वाली वस्तु भी।
आपकी समूह चर्चा के लिए: ऊपर की छह पंक्तियाँ समूह के सदस्यों में बाँट लीजिए और प्रत्येक व्यक्ति अध्याय में से एक और उदाहरण खोजे। फिर मिलकर कठिन प्रश्न पूछिए — इनमें से कौन-सा व्यय शांति के समय समाप्त हो जाता है? आप पाएँगे कि लगभग कोई नहीं। इसीलिए इस अध्याय के दो बिल्कुल भिन्न राज्यों ने स्थायी सेना से बचने के उपाय निकाले: मुगलों की मनसबदारी प्रणाली (पृष्ठ 54) और अहोमों की पाइक प्रणाली (पृष्ठ 48)।
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