क्योंकि अंग्रेजी के ‘idol’ और ‘icon’ तटस्थ शब्द नहीं हैं — उनमें निर्णय पहले से छिपा है, और ‘image’ (प्रतिमा) में नहीं।
अध्याय कारण ठीक-ठीक बताता है: ये दोनों शब्द “यहूदी, ईसाई एवं इस्लाम जैसे पंथों-मजहबों के संदर्भ में निंदनीय है क्योंकि इन पंथों की रूढ़िवादी शाखाएँ मूर्ति पूजा या चिह्नों की पूजा की निंदा करती हैं।” अंग्रेजी में idol शब्द प्राय: idolatry की छाया के बिना नहीं आता — और वह एक ऐसी प्रथा है जिसे ये परंपराएँ निंदनीय मानती हैं। अर्थात किसी मंदिर की प्रतिमा को ‘idol’ कहना उसे उन्हीं लोगों की शब्दावली में वर्णित करना है जो उसे अस्वीकार करते हैं।
भारतीय शास्त्रीय ग्रंथों ने कभी ऐसा शब्द प्रयोग नहीं किया। उनमें मूर्ति, विग्रह, प्रतिमा, रूप जैसे शब्द मिलते हैं, जो मंदिरों या घरों में पूजा में प्रयुक्त प्रतिमाओं के लिए थे। इनमें से किसी में मिथ्यात्व का भाव नहीं है। अंग्रेजी में ‘image’ ही वह शब्द है जो इनसे मेल खाता है: वह बताता है कि वस्तु क्या है, यह नहीं कि आपको उसके बारे में क्या सोचना चाहिए।