कक्षा ८ सामाजिक विज्ञान अध्याय 2 आइए पता लगाएँ के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
चित्र 2.14 में आप कौन-से तत्व देखते हैं? वे उस समय की जीवन-शैली के बारे में क्या बताते हैं? (संकेत — शस्त्र, जानवर, गतिविधियों को ध्यान से देखें।)
चित्र 2.14 में क्या दिखता है। हंपी के विट्ठल मंदिर की ग्रेनाइट की तराशी हुई दीवार का छायाचित्र। पत्थर हल्के शहद-रंग के हैं और नक़्क़ाशी उथली उभार-नक़्क़ाशी है, जो एक के ऊपर एक पाँच लगातार क्षैतिज पट्टियों में चलती है।
सबसे ऊपर की पट्टी। एक के पीछे एक चलते हाथी, सूँड नीचे मुड़ी हुई; दाएँ छोर पर एक घोड़ा और उसके साथ एक व्यक्ति।
दूसरी पट्टी। पैदल चलते लोग ऊँटों और घोड़ों को हाँक रहे हैं — एक व्यक्ति रस्सी से ऊँट खींच रहा है, अन्य लोग डंडे लिए पशुओं के बीच चल रहे हैं।
तीसरी पट्टी। घुड़सवार; कई घोड़े पिछले पैरों पर उठे हुए हैं; एक सवार धनुष खींच रहा है, दूसरा लंबा शस्त्र लिए है।
चौथी पट्टी। शिकार के दृश्य — शिकारी कुत्ते हिरनों के पीछे दौड़ते हुए, एक व्यक्ति धनुष खींचता हुआ, एक व्यक्ति पास से पशु पर प्रहार करता हुआ।
सबसे नीचे की पट्टी। क़दम-से-क़दम मिलाकर चलते पैदल सैनिकों की पंक्तियाँ, प्रत्येक के हाथ में गोल ढाल और छोटी तलवार; उनके बीच और भी ऊँट तथा सवार।
पुस्तक का अपना शीर्षक है — “विट्ठल मंदिर का एक पैनल”।
चित्र 2.14, पृष्ठ 35 — यहाँ केवल वर्णन दिया गया है; तराशे हुए पैनल का छायाचित्र पाठ्यपुस्तक में देखें।
उत्तर
यह पट्टिका क्षैतिज पट्टियों में उकेरी गई है, एक के ऊपर एक, और हर पट्टी राज्य के जीवन का एक अलग भाग दिखाती है। ऊपर से नीचे देखिए —
सबसे ऊपरी पट्टी — हाथी। हाथियों की एक पंक्ति, एक के पीछे एक चलती हुई, और साथ में छोटी मानव आकृतियाँ।
दूसरी पट्टी — ऊँट और उनके चालक। पैदल चलते लोग ऊँटों को हाँक रहे हैं, हाथों में डंडे या अंकुश; साथ में बोझ उठाए हुए अन्य आकृतियाँ।
तीसरी पट्टी — घोड़े। कुछ घोड़ों को सईस लगाम पकड़कर ले जा रहे हैं; कुछ पर सवार हैं, और एक-दो सवारों के हाथ में लंबा शस्त्र — भाला या धनुष — है, जबकि उनके घोड़े उछल रहे हैं।
चौथी पट्टी — आखेट। पैदल पुरुष धनुष और डंडे लिए हुए, आगे दौड़ते कुत्ते, और उनसे भागते पशु।
सबसे नीचे — पैदल आकृतियों की पंक्तियाँ, कुछ के हाथों में गोल ढाल और शस्त्र।
इससे उस समय के जीवन के बारे में क्या पता चलता है —
पत्थर पर क्या उकेरा है
वह क्या बताता है
हाथी, घोड़े और ऊँट — मनुष्यों जितने ही महत्व और आकार में
पशु राज्य की शक्ति का माप थे। वे सेना, माल और राजा — तीनों को ढोते थे। रानी दुर्गावती की शक्ति भी इसी प्रकार बताई गई है: 20,000 सैनिक और 1,000 हाथी।
सईस घोड़ों को हाँक रहे हैं, उन पर सवार नहीं
घोड़े केवल प्रयोग नहीं होते थे, उनका व्यापार भी होता था। इसी पृष्ठ पर अध्याय बताता है कि पुर्तगाली विजयनगर घोड़े बेचने आते थे और राजा उनका अच्छा व्यवहार इसलिए करता था कि वे शत्रु राज्यों को न बेचें।
भाले, धनुष, ढालें; सवार और पैदल सैनिक साथ-साथ
घुड़सवार और पैदल सेना एक ही बल के रूप में लड़ती थी, और मंदिर की दीवार इसे अंकित करने का उपयुक्त स्थान माना गया — युद्ध सार्वजनिक, यहाँ तक कि पावन, प्रदर्शन का अंग था।
कुत्तों के साथ आखेट
आखेट राजसी गतिविधि थी — युद्ध का अभ्यास और कौशल का प्रदर्शन — और पत्थर पर उकेरे जाने योग्य।
चलती, हाँकती, बोझ उठाती साधारण आकृतियों की पंक्तियाँ
यह एक शोभायात्रा है: एक महानगर की रोज की हलचल। यह इसी पृष्ठ पर दिए डोमिगो पायस के विवरण से मेल खाती है — “सड़कों एवं बाजारों में बोझ ढोने वाले बैल भरे पड़े हैं… यहाँ आप विपुल मात्रा में सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं जो आप चाहते हैं।”
ऐसा क्यों हुआ: विजयनगर का मंदिर केवल पूजा-स्थल नहीं था। जैसा अध्याय आगे (पृष्ठ 57) बताता है, मंदिरों ने “चहल-पहल भरे बाजारों वाले पारिस्थितिक तंत्र का भी निर्माण किया”, भूमि और धन ट्रस्ट के रूप में रखा, सिंचाई और यात्री-आवास बनवाए, और व्यापारियों को ऋण दिया। जो भवन नगर की अर्थव्यवस्था के केंद्र में हो, उसकी दीवारों पर वही अर्थव्यवस्था उकेरी जाना स्वाभाविक है — सैनिक, व्यापारी, पशु और आखेटक, केवल देवता नहीं।
स्वयं जाँचिए: अपनी पुस्तक में चित्र 2.14 खोलिए और पट्टियाँ गिनिए। फिर गिनिए कि एक ही पट्टी में कितने भिन्न पशु मिलते हैं। शिल्पियों ने एक ही आकृति दोहराई और उसमें थोड़ा-थोड़ा परिवर्तन किया — इसी से छोटी आकृतियों की दीवार दूर से भी पढ़ी जा सकती है।