यह एक क्षेत्र-अध्ययन है, इसलिए यहाँ विधि ही सबसे महत्वपूर्ण है। इसे कैसे करें और रिपोर्ट में क्या होना चाहिए —
चरण 1 — क्षेत्र निश्चित कीजिए। यह पहले शिक्षक के साथ तय कीजिए। एक वार्ड, एक ग्राम पंचायत, एक विकास खंड या एक छोटा जल-ग्रहण क्षेत्र उपयुक्त है; ‘मेरा राज्य’ नहीं। सीमा लिख लीजिए और उसे एक रेखाचित्र-मानचित्र पर अंकित कीजिए।
चरण 2 — उपस्थित नवीकरणीय संसाधनों की सूची बनाइए। अध्याय के उदाहरणों के अनुसार स्थानीय स्तर पर खोजिए।
| संसाधन | क्या दर्ज करना है |
|---|---|
| सूर्य का प्रकाश | कितने महीने आकाश स्वच्छ रहता है; क्षेत्र में सौर पैनल, सौर पंप, सौर पथ-प्रकाश |
| पवन | किसी ऋतु में तेज़ हवा चलती है या नहीं; कोई पवनचक्की या पवन-पंप |
| प्रवाहित जल | नदियाँ, नहरें, नाले; कोई लघु जल विद्युत संयंत्र या पनचक्की (चित्र 1.2 देखिए) |
| सतही जल और भूजल | तालाब, पोखर, कुएँ, हैंडपंप, नलकूप — और उनकी गहराई |
| वन और वृक्ष | वृक्षों के अंतर्गत क्षेत्रफल, प्रजातियाँ, और उनसे क्या एकत्र किया जाता है — ईंधन, चारा, फल, शहद, पत्ते |
| मृदा | उगाई जाने वाली फसलें, उपज, परती की प्रथा, गोबर बनाम रासायनिक उर्वरक |
| मछली और पशुधन | जिन तालाबों-नदियों में मछली पकड़ी जाती है; चरागाह |
चरण 3 — समय के साथ आए परिवर्तन को सिद्ध कीजिए। एक बार का आँकड़ा अध्ययन नहीं होता; तब और अब, दोनों चाहिए।
- बड़े-बुज़ुर्गों से बातचीत — पाँच-छह लोगों से वही तीन प्रश्न: तब कुआँ कितना गहरा था और अब कितना; तब यहाँ क्या उगता था; तब वन से क्या लाया जाता था।
- शासकीय स्रोत — पंचायत या नगरपालिका कार्यालय, खंड कृषि या वन कार्यालय, भूजल बोर्ड की ज़िला रिपोर्ट, जनगणना, राज्य के पोर्टल।
- प्रत्यक्ष अवलोकन — आज जो है उसकी गिनती और चित्र। उसी स्थान के पुराने चित्र सबसे अच्छा प्रमाण होते हैं।
चरण 4 — रिपोर्ट लिखिए पाँच छोटे भागों में : (i) क्षेत्र और उसे चुनने का कारण; (ii) मिले हुए संसाधन; (iii) ‘तब और अब’ की तालिका, स्रोतों के नाम सहित; (iv) प्रत्येक परिवर्तन के कारण; (v) आगे क्या किया जा सकता है और किसे करना है।
नमूना उत्तर (अंश): ‘हमारा अध्ययन विद्यालय के आस-पास के चार वार्डों का था। मंदिर के पास वाले तालाब में 1990 के दशक में मार्च तक जल रहता था; आज वह जनवरी में सूख जाता है और उसका आधा तल पाट दिया गया है। जिन पाँच बुज़ुर्गों से हमने बात की, उनमें से तीन ने बताया कि उनकी युवावस्था में खुले कुओं में लगभग 6 मीटर पर जल मिल जाता था; पिछले वर्ष खोदे गए दो नलकूप 55 और 60 मीटर तक गए। कारण — सड़क चौड़ी करते समय तालाब की आवक-नाली बंद हो गई, अधिकांश आँगन सीमेंट के हो गए इसलिए वर्षा-जल रिसता नहीं, और उत्तर के खेतों में ज्वार-बाजरा की जगह धान आ गया। आगे क्या — तालाब की सफ़ाई और गहरीकरण तथा आवक-नाली फिर से खोलना, नए निर्माण के लिए पुनर्भरण गड्ढे अनिवार्य करना, और कृषि कार्यालय के साथ मिलकर बाजरे का एक प्रदर्शन-प्लॉट लगाना।’