प्र1.
क्या आप ऐसी अन्य पारंपरिक प्रथाओं के विषय में जानते हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में सहायता करती हैं?
उत्तर
हाँ। इनमें से अधिकांश ठीक उसी तरह कार्य करती हैं जैसे बॉक्स में वर्णित मछली-प्रथा — वे उपयोग को ठीक उसी समय या स्थान पर रोक देती हैं जहाँ संसाधन का पुनर्जनन हो रहा होता है।
| प्रथा | किसकी रक्षा | संतुलन कैसे बना रहता है |
|---|---|---|
| पवित्र उपवन (देवराई, कावु, सरना, ओरण) | मूल वनों के भाग | कुछ काटा नहीं जाता, इसलिए आस-पास की भूमि साफ़ हो जाने पर भी बीजों का स्रोत तथा पक्षियों, कीटों और जल का आश्रय बचा रहता है |
| चक्रीय चराई और परती वर्ष | चरागाह और मृदा | पशुओं के लौटने से पहले घास और मृदा के जीव उबर जाते हैं |
| फसल-चक्र और मिश्रित फसल | मृदा की उर्वरता | भिन्न फसलें भिन्न पोषक तत्व लेती हैं और कीट-चक्र तोड़ती हैं — पृष्ठ 16 पर वृक्षायुर्वेद के अंतर्गत अध्याय ने दोनों का नाम लिया है |
| गोबर व अन्य प्राकृतिक उर्वरक, पलवार (गीली घास) | मृदा का जीवन और नमी | वर्ष-दर-वर्ष केवल निकालने के स्थान पर जैविक पदार्थ मृदा को लौटाया जाता है (पृष्ठ 12) |
| पारंपरिक जल-संचयन; तालाब, पोखर, जोहड़, कुंड, बावड़ियाँ | भूजल | वर्षा-जल भूमि पर इतनी देर रुकता है कि रिसकर नीचे जा सके, जिससे पुनर्भरण दोहन के साथ चलता रहे (पृष्ठ 12) |
| फलदार-पुष्पित वृक्ष न काटना; फसल का कुछ भाग छोड़ देना | पक्षी, चमगादड़ और परागणकर्ता | बीज फैलाने और परागण करने वाले जीवों को अभाव की ऋतु में भोजन मिलता रहता है |
| विशेष प्रजातियों की रक्षा — पीपल और बरगद, साँप, बंदर, बिश्नोई गाँवों के निकट काला हिरण | आधार-प्रजातियाँ | ऐसी एक प्रजाति के हटने से अनेक अन्य असंतुलित हो जाती हैं, इसलिए उसकी रक्षा पूरे जाल की रक्षा है |
| मछली पकड़ने और शिकार की बंद ऋतुएँ | मछली और वन्य जीव | प्रजनन निर्बाध होता है — ठीक वही प्रथा जिसका वर्णन बॉक्स में है |
व्यवसायीकरण ने टूना-प्रथा को क्यों तोड़ा: जो गाँव हर वर्ष उसी जल में मछली पकड़ता है, उसका ही नुकसान होगा यदि वह जल खाली कर दे — इसलिए वहाँ संयम लाभदायक है। जो व्यावसायिक बेड़ा अगले क्षेत्र में चला जा सकता है, उसे यह हानि नहीं उठानी पड़ती; उसका मूल्य कोई और, बाद में चुकाता है। इसीलिए, जैसा बॉक्स कहता है, टूना की संख्या घटने पर उत्तर परंपरा से नहीं, मछली पकड़ने पर नियंत्रण के समझौतों से देना पड़ा — और फिर भी यह प्रजाति घट ही रही है।
क्या आप जानते हैं? बॉक्स स्वयं बताता है कि टूना अपनी संख्या से आगे भी क्यों महत्वपूर्ण है — छोटी मछलियों, झींगों आदि का सेवन करके वे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखती हैं। किसी बड़े परभक्षी के हटते ही वे जीव बढ़ जाते हैं जिन्हें वह खाता था, और नीचे का पूरा आहार-जाल बदल जाता है।