ऐसे दो संसाधन चुनिए जिनका स्वभाव भिन्न हो — एक खनिज और एक नवीकरणीय — जिससे मानचित्र का अंतर स्वयं आपको कुछ सिखाए। नीचे लौह अयस्क और सौर ऊर्जा से यह किया गया है।
कैसे कीजिए: भारत का रूपरेखा मानचित्र लीजिए, संकेतिका में हर संसाधन के लिए अलग चिह्न और रंग रखिए, चित्र 1.11 तथा किसी एटलस या राज्य सरकार के पोर्टल से मुख्य क्षेत्र अंकित कीजिए, और मानचित्र के नीचे एक पंक्ति में लिखिए कि हर आँकड़ा कहाँ से आया।
| लौह अयस्क (अनवीकरणीय) | सौर ऊर्जा (नवीकरणीय) | |
|---|---|---|
| कहाँ मिलता है | ओडिशा (केंदुझार, मयूरभंज), झारखंड (गुआ), छत्तीसगढ़ (बैलाडीला, दुर्ग), कर्नाटक (बेल्लारी, चित्रदुर्ग, कुद्रेमुख, तुमकुरू), गोवा, महाराष्ट्र (रत्नागिरी, चंद्रपुर) — सभी चित्र 1.11 पर अंकित | राजस्थान, गुजरात, लद्दाख, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में सर्वाधिक — पृष्ठ 5 पर अध्याय कहता है कि भारत के अधिकांश भाग में प्रचुर धूप उपलब्ध है |
| मानचित्र पर प्रतिरूप | बिंदु। कुछ सघन गुच्छे; शेष लगभग पूरा देश खाली। यह केवल वहीं है जहाँ विशेष चट्टानें बनीं | प्रवणता। सर्वत्र उपलब्ध, शुष्क उत्तर-पश्चिम में अधिक तीव्र और अधिक बादल वाले भागों में कम। इसे कहीं ढोना नहीं पड़ता |
| आर्थिक गतिविधियाँ | खनन; पिसाई और सांद्रण; रेल और बंदरगाह से ढुलाई (पारादीप, विशाखापत्तनम, मार्मुगाओ); बोकारो, भिलाई, राउरकेला के इस्पात संयंत्र; आगे इंजीनियरिंग, वाहन, निर्माण और रेल उद्योग; खनन बस्तियाँ | राजस्थान का भड़ला (चित्र 1.21) तथा रायचूर, कर्नाटक का सौर पार्क (चित्र 1.22); पैनल और इन्वर्टर निर्माण; छत पर स्थापना और अनुरक्षण; सिंचाई के सौर पंप; ग्रिड संचरण |
| सीमाएँ | सीमित भंडार। भंडार समाप्त होने पर उस नगर को जीविका का दूसरा आधार खोजना पड़ता है | समाप्त होने वाला भंडार नहीं, परंतु भूमि, रात के लिए भंडारण और उपभोक्ता तक ले जाने के लिए ग्रिड चाहिए |
आप क्या देखते हैं: अनवीकरणीय संसाधन स्थान-बद्ध होता है — वह उद्योग और बस्ती को कुछ ही बिंदुओं से बाँध देता है और शेष सब कुछ उसी के पास आना पड़ता है। सूर्य के प्रकाश जैसा नवीकरणीय संसाधन वितरित होता है — वह आर्थिक गतिविधि को केंद्रित होने के बजाय फैलने देता है। यही अंतर, केवल मात्रा नहीं, इस बात का कारण है कि अध्याय दोनों श्रेणियों को अलग-अलग देखता है।