उत्पादन के कारक वे संसाधन या इनपुट्स हैं जिनका उपयोग वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन में किया जाता है। आपके आस-पास की प्रत्येक वस्तु अपने अंतिम स्वरूप में आप तक पहुँचने से पहले एक उत्पादन प्रक्रिया से गुजरती है, और उस प्रक्रिया में कुछ इनपुट्स लगते हैं। अर्थशास्त्र में इन्हें चार प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है — भूमि, श्रम, पूँजी और उद्यमिता। प्रौद्योगिकी इनमें एक सहयोगी एवं महत्वपूर्ण कारक है, क्योंकि यह व्यवसायों को समान या कम उत्पादन कारकों के साथ अधिक उत्पादन करने में सक्षम बनाती है।
| कारक | पुस्तक इसमें क्या-क्या सम्मिलित करती है | अध्याय से उदाहरण |
|---|---|---|
| भूमि (प्राकृतिक संसाधन) | केवल भौगोलिक भूखंड नहीं, अपितु मृदा, वन, जल, वायु, सूर्य का प्रकाश, खनिज, तेल और प्राकृतिक गैस | रत्ना ने ‘पॉज पॉइंट’ के लिए भूखंड किराए पर लिया; सैलून को जल एवं विद्युत चाहिए; सब्जी विक्रेता को मृदा में उगा ताजा उत्पाद |
| श्रम (मानव संसाधन) | उत्पादन में प्रयुक्त शारीरिक और मानसिक योगदान | भोजनालय का रसोइया एवं सहायक; काष्ठकार, कृषक, निर्माण-श्रमिक, शिक्षक, चिकित्सक |
| पूँजी | धन और मानव निर्मित संसाधन — मशीनें, औजार, उपकरण, वाहन, वेंडिंग कार्ट्स, कंप्यूटर, दुकानें, कारखाने, कार्यालय भवन | रत्ना का फर्नीचर और रसोई के उपकरण; विक्रेता का तराजू, टोकरी और ठेला |
| उद्यमिता | स्वयं का व्यवसाय आरंभ करना या किसी समस्या के समाधान हेतु कुछ नया निर्मित करना — जोखिम उठाना और अन्य कारकों को एकत्रित करना | स्वयं रत्ना, जिसने स्थान चुना, धन का प्रबंध किया, कर्मचारी नियुक्त किए और योजना बनाई |
| प्रौद्योगिकी (सहयोगी, कारक नहीं) | वैज्ञानिक ज्ञान को प्रयोग में लाना | यू.पी.आई. से भुगतान, जी.पी.एस. से लघुत्तम मार्ग, ड्रोन से उर्वरक छिड़काव, शल्य चिकित्सा में रोबोट्स |