प्र1.
क्या आपने कभी सोचा है कि आपके कपड़े, जूते, स्कूल बैग, फर्नीचर, फोन, कंप्यूटर आदि का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर
हाँ — और उत्तर इन सबके लिए एक ही है : प्रत्येक वस्तु अपने अंतिम स्वरूप में आप तक पहुँचने से पहले उत्पादन प्रक्रिया से गुजरती है, और उस प्रक्रिया में कुछ संसाधन या इनपुट्स लगते हैं। यही इनपुट्स इस अध्याय के उत्पादन के कारक हैं।
अपने कंधे का स्कूल बैग लीजिए और उसे इनपुट-दर-इनपुट खोलिए —
| कारक | स्कूल बैग में क्या-क्या लगा |
|---|---|
| भूमि | मृदा में, सूर्य के प्रकाश और जल से उगी कपास, अथवा तेल से बना पॉलिएस्टर; खनिजों से बने रंग; कारखाने में प्रयुक्त जल और विद्युत; वह भूखंड जिस पर कारखाना खड़ा है |
| श्रम | डिजाइन बनाने वाला, कपड़ा काटने वाला, सिलाई करने वाले, गुणवत्ता जाँचने वाला, पैक करने वाला, ट्रक चालक और वह दुकानदार जिसने आपको बेचा |
| पूँजी | सिलाई मशीनें, कटिंग टेबल, कारखाने का शेड, वितरण का वाहन, दुकान — और वह धन जिससे ये सब खरीदे गए |
| उद्यमिता | किसी ने सोचा कि विद्यार्थियों को अधिक मजबूत और हल्का बैग चाहिए, कुछ हजार बैग बनाने का जोखिम उठाया और ऊपर लिखी सारी वस्तुएँ जुटाईं |
| प्रौद्योगिकी | चेन लगाने की मशीन, वह सॉफ्टवेयर जो कटाई की योजना बनाकर कपड़े की बर्बादी घटाता है, और दुकान पर आपका यू.पी.आई. भुगतान |
यह करके देखिए: यही अभ्यास अपने जूतों और एक फोन पर कीजिए। एक रोचक बात दिखेगी — फोन में प्रति इकाई कहीं अधिक पूँजी और कहीं कम हाथ लगते हैं। यही अंतर आगे चलकर श्रम-प्रधान और पूँजी-प्रधान उत्पादन कहलाता है।