दीपकम् अध्याय 12 अभ्यासात् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) पाठकाः केषां सम्यक् प्रयोगं कुर्युः ?
उत्तर

उत्तरम् — वर्णानाम् (वर्णों का)।

आधार: श्लोक ३ — ‘एवं वर्णाः प्रयोक्तव्या… सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते’।
व्याकरण: प्रश्न में ‘केषाम्’ षष्ठी विभक्ति, बहुवचन में है, इसलिए उत्तर भी उसी विभक्ति-वचन में — ‘वर्णानाम्’ (वर्ण, पुंल्लिङ्ग, षष्ठी बहुवचन)। ‘वर्णानाम्’ के स्थान पर ‘वर्णाः’ लिख देना अशुद्ध होगा।
प्र2.
(ख) किम् अवश्यमेव पठनीयम् ?
उत्तर

उत्तरम् — व्याकरणम् (व्याकरण)।

आधार: श्लोक १ — ‘यद्यपि बहु नाधीषे तथापि पठ पुत्र व्याकरणम्’ — चाहे और कुछ कम पढ़ो, व्याकरण अवश्य पढ़ो।
व्याकरण: ‘व्याकरणम्’ — नपुंसकलिङ्ग, प्रथमा विभक्ति, एकवचन (यहाँ ‘पठनीयम्’ कृत्य-प्रत्ययान्त के साथ कर्म प्रथमा में आता है)।
प्र3.
(ग) ब्रह्मलोके केन सम्मानं भवति ?
उत्तर

उत्तरम् — सम्यग्वर्णप्रयोगेण (वर्णों के ठीक-ठीक प्रयोग से)।

आधार: श्लोक ३ का उत्तरार्ध और पाठ का शीर्षक — ‘सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते’।
व्याकरण: प्रश्न में ‘केन’ तृतीया विभक्ति, एकवचन है (‘किससे?’), इसलिए उत्तर भी तृतीया एकवचन में — ‘सम्यग्वर्णप्रयोगेण’। यहाँ तृतीया करण (साधन) के अर्थ में है।
सन्धि: सम्यक् + वर्णप्रयोगेण = सम्यग्वर्णप्रयोगेण (जश्त्व-सन्धि — क् का ग्)।
प्र4.
(घ) अधमाः पाठकाः कति भवन्ति ?
उत्तर

उत्तरम् — षट् (छह)।

आधार: श्लोक ५ — ‘…अनर्थज्ञोऽल्पकण्ठश्च षडेते पाठकाधमाः’। वे छह हैं — गीती, शीघ्री, शिरःकम्पी, लिखितपाठकः, अनर्थज्ञः, अल्पकण्ठः।
व्याकरण: ‘कति’ का उत्तर संख्यावाचक शब्द से देते हैं। ‘षट्’ का ही रूप सन्धि में ‘षड्’ हो जाता है — ‘षट् + एते = षडेते’। श्लोक ४ में भी ‘षडेते पाठका गुणाः’ — गुण भी छह ही हैं।
प्र5.
(ङ) धैर्यं केषां गुणः ?
उत्तर

उत्तरम् — पाठकानाम् (पढ़ने वालों का)।

आधार: श्लोक ४ — ‘धैर्यं लयसमर्थं च षडेते पाठका गुणाः’। पुस्तक की सारणी में ‘धैर्यम् = विश्वासः’ अर्थात् आत्मविश्वास — बिना घबराए, बिना सन्देह के पढ़ने की शक्ति।
व्याकरण: ‘केषाम्’ (षष्ठी बहुवचन) का उत्तर ‘पाठकानाम्’ (पाठक, पुंल्लिङ्ग, षष्ठी बहुवचन) — ‘पाठकाः’ लिखना अशुद्ध होगा।
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