दीपकम् अध्याय 12 अभ्यासात् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पाठे विद्यमानानां श्लोकानाम् उच्चारणं स्मरणं लेखनं च कुरुत।
उत्तर

यह करने का प्रश्न है — तीन काम एक साथ : उच्चारण (बोलकर पढ़ना), स्मरण (कण्ठस्थ करना) और लेखन (लिखकर अभ्यास)। नीचे पाँचों श्लोक और उनके साथ उच्चारण की वे जगहें दी गई हैं जहाँ प्रायः चूक होती है।

१. यद्यपि बहु नाधीषे तथापि पठ पुत्र व्याकरणम्।
   स्वजनः श्वजनो माभूत् सकलं शकलं सकृत् शकृत्॥ १॥
२. व्याघ्री यथा हरेत् पुत्रान् दंष्ट्राभ्यां न च पीडयेत्।
   भीता पतनभेदाभ्यां तद्वद् वर्णान् प्रयोजयेत्॥ २॥
३. एवं वर्णाः प्रयोक्तव्या नाव्यक्ता न च पीडिताः।
   सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते॥ ३॥
४. माधुर्यमक्षरव्यक्तिः पदच्छेदस्तु सुस्वरः।
   धैर्यं लयसमर्थं च षडेते पाठका गुणाः॥ ४॥
५. गीती शीघ्री शिरःकम्पी तथा लिखितपाठकः।
   अनर्थज्ञोऽल्पकण्ठश्च षडेते पाठकाधमाः॥ ५॥

उच्चारण में सावधानी — इन्हीं शब्दों पर पूरा पाठ टिका है:

शब्दक्या ध्यान रखेंगलत बोलने पर
स्वजनः / श्वजनः‘स्व’ में , ‘श्व’ में — दोनों अलग हैंबन्धु → कुत्ता
सकलं / शकलंवही ‘स’–‘श’ का भेदपूरा → टुकड़ा
सकृत् / शकृत्वही ‘स’–‘श’ का भेद; अन्त में हलन्त ‘त्’एक बार → मल
दंष्ट्राभ्याम्द् + अं + ष् + ट् + र् — संयुक्ताक्षर ‘ष्ट्र’ को तोड़कर नहीं, एक साथअस्पष्ट (अव्यक्त) उच्चारण
प्रयोक्तव्याः‘क्त’ का जोड़ स्पष्ट, पर ज़ोर लगाकर नहींपीडित उच्चारण
अनर्थज्ञोऽल्पकण्ठश्चअवग्रह ‘ऽ’ पर रुकना नहीं — ‘ज्ञो-ल्पकण्ठश्च’ बहता रहेपदच्छेद-दोष
कण्ठस्थ करने का तरीका: (1) पहले पदच्छेद के साथ धीरे-धीरे पढ़िए — तब हर पद अलग सुनाई देगा; (2) फिर अन्वय पढ़कर अर्थ पक्का कीजिए — अर्थ जाने बिना रटना ‘अनर्थज्ञः’ दोष है; (3) तब पूरा श्लोक लय में पाँच बार बोलिए; (4) अन्त में बिना देखे लिखिए और पुस्तक से मिलाइए। सारे श्लोक अनुष्टुप् छन्द में हैं — हर चरण में आठ अक्षर, इसलिए लय अपने-आप बैठ जाती है।
Check it yourself: श्लोक बोलते समय अपने ही उच्चारण को श्लोक ४ की कसौटी पर जाँचिए — क्या माधुर्यम् है? क्या अक्षरव्यक्तिः है? क्या पदच्छेदः ठीक जगह पड़ा? और श्लोक ५ के छह दोषों में से कोई आपमें तो नहीं?
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