दीपकम् अध्याय 12 सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

पाठ का विषय और वेदाङ्ग-सम्बन्ध — यह पाठ ‘शिक्षा’ नामक वेदाङ्ग का विषय है। पुस्तक की ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ पेटिका स्वयं कहती है — शिक्षाग्रन्थेषु वर्णानाम् उच्चारणविधिः, स्वराः, विरामः च वर्णिताः सन्ति। अर्थात् वर्ण का उच्चारण कैसे हो, स्वर कैसे लगें और कहाँ रुकना है — यही ‘शिक्षा’ पढ़ाती है, और यही इस पाठ के पाँचों श्लोकों का विषय है। पाठ की कथा (पृष्ठ 137) — देवराज इन्द्र और असुरराज वृत्रासुर की कथा। वृत्रासुर ने इन्द्र को जीतने के लिए यज्ञ कराया, जिसका आहुतिमन्त्र था — ‘इन्द्रशत्रुर्वर्धस्व’ । ऋत्विजों ने डरकर मन्त्र का स्वर बदल दिया ; स्वर बदलते ही अर्थ बदल गया और वृत्रासुर के स्थान पर इन्द्र का बल बढ़ गया। यही कथा पूरे पाठ की भूमिका है — उच्चारण की एक चूक अर्थ ही उलट देती है । पाठ के पाँच श्लोक — (१) यद्यपि बहु नाधीषे… व्याकरण अवश्य पढ़ो, नहीं तो स्वजनः (बन्धु) ‘ श्वजनः ’ (कुत्ता), सकलम्

  1. चित्र-संवादः तथा कथा (पाठे विद्यमानाः प्रश्नाः)
  2. पाठः
  3. वयं शब्दार्थान् जानीमः
  4. अत्र इदम् अवधेयम्
  5. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  6. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  7. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  8. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  9. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  10. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  11. योग्यताविस्तरः
  12. योग्यताविस्तरः
  13. परियोजनाकार्यम्
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