दीपकम् अध्याय 12 परियोजनाकार्यम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कक्षायां श्लोकोच्चारण-प्रतियोगितां स्थापयित्वा निर्मित-सूच्यनुगुणम् उच्चारणम् अवलोकनीयम्।
उत्तर

यह करके सीखने का काम है — कक्षा में श्लोक-उच्चारण की प्रतियोगिता कराइए और पहले से बनाई गई एक सूची (मूल्यांकन-तालिका) के अनुसार सबका उच्चारण परखिए।

करने का तरीका —

  1. श्लोक तय कीजिए — पाठ के पाँचों श्लोक (अथवा योग्यताविस्तर के श्लोक)। हर विद्यार्थी को कम-से-कम एक श्लोक बोलना है।
  2. सूची बनाइए — कसौटी अपने मन से मत गढ़िए; श्लोक ४ के छह गुण और श्लोक ५ के छह दोष ही सूची हैं। प्रत्येक गुण के 5 अङ्क रखिए (कुल 30) और प्रत्येक दोष पर 1 अङ्क काटिए।
  3. निर्णायक चुनिए — तीन विद्यार्थी और आचार्य। सब अलग-अलग अंक दें, फिर औसत निकालें।
  4. अवलोकन लिखिए — हर प्रतिभागी के लिए एक पंक्ति : ‘कौन-सा गुण दिखा, कौन-सा दोष रहा’। यही अगले प्रश्न की तालिका में भरना है।
  5. अन्त में सुधार का अभ्यास — जिन दोषों की पुनरावृत्ति सबसे अधिक दिखी, कक्षा उन्हीं का दस-दस बार अभ्यास करे।

नमूना मूल्यांकन-सूची (निर्मित-सूची) —

क्रमःकसौटी (श्लोक ४ अनुसारम्)अङ्काःक्या देखें
माधुर्यम्5स्वर में मिठास है या रूखापन
अक्षरव्यक्तिः5‘स’–‘श’, ‘द’–‘ध’, संयुक्ताक्षर साफ़ हैं?
पदच्छेदः5विराम अर्थ के अनुसार पड़ा या बीच शब्द में
सुस्वरः5अन्तिम पंक्ति के छात्र तक आवाज़ पहुँची?
धैर्यम्5बिना अटके, बिना घबराए
लयसमर्थम्5अनुष्टुप् की लय पूरे श्लोक में बनी रही?
दोषाः (गीती, शीघ्री, शिरःकम्पी, लिखितपाठकः, अनर्थज्ञः, अल्पकण्ठः)–1 प्रति दोषःजो दोष दिखे, उसका नाम लिखिए
सङ्केतः: प्रतियोगिता से पहले सबको यह सूची दिखा दीजिए। जब विद्यार्थी को पता हो कि किन छह बातों पर परखा जाएगा, तो वह उन्हीं छह पर अभ्यास करता है — और यही इस परियोजना का असली उद्देश्य है, जीतना नहीं।
प्र2.
अत्र के के गुणाः दोषाः च जाताः इति अधः लिखत — (गुणाः / दोषाः — तालिका)
उत्तर

यह तालिका अपनी कक्षा की प्रतियोगिता देखकर भरनी है, इसलिए उत्तर हर कक्षा में अलग होगा। नीचे नमूना दिया गया है — देखिए कि हर पंक्ति में किसने क्या किया यह लिखा गया है, केवल शब्द नहीं।

नमूना उत्तर:

गुणाःदोषाः
अक्षरव्यक्तिः — रमेशः ‘दंष्ट्राभ्याम्’ इत्यत्र संयुक्ताक्षरं स्पष्टम् उच्चारितवान्।शीघ्री — मोहनः द्वितीयं श्लोकम् अतिवेगेन पठितवान्, पदानि मिलितानि।
पदच्छेदः — सीता ‘नाव्यक्ता · न च पीडिताः’ इत्यत्र उचितस्थाने विरामं कृतवती।अल्पकण्ठः — गीता मन्दस्वरेण अपठत्, अन्तिमपङ्क्तौ न श्रुतम्।
सुस्वरः — अनीता उच्चस्वरेण मधुरं च अपठत्, सर्वैः श्रुतम्।शिरःकम्पी — सुरेशः पठनकाले शिरः चालितवान्।
धैर्यम् — हिमानी विना सङ्कोचं पञ्च श्लोकान् स्मृत्वा अपठत्।गीती — कश्चन छात्रः श्लोकं गीतम् इव अगायत्।
माधुर्यम् / लयसमर्थम् — विनयः अनुष्टुप्-लयम् अन्तपर्यन्तम् अरक्षत्।अनर्थज्ञः — एकः छात्रः ‘सकृत्’ इत्यस्य स्थाने ‘शकृत्’ इति अवदत्, अर्थं न ज्ञातवान्।
अच्छे उत्तर में क्या होना चाहिए: केवल ‘माधुर्यम्’, ‘शीघ्री’ जैसे शब्द लिख देना अधूरा उत्तर है। हर पंक्ति में तीन बातें आनी चाहिए — (1) गुण/दोष का नाम, (2) किस श्लोक या शब्द पर वह दिखा, और (3) उसका असर क्या पड़ा। तभी अवलोकन काम का बनता है।
अन्त में यह अवश्य कीजिए: जो दोष सबसे अधिक बार मिला, उसे कक्षा के बोर्ड पर लिखिए और अगले सप्ताह उसी पर अभ्यास कीजिए। पुस्तक का वाक्य याद रखिए — ‘अतः पठनकाले वयम् एतान् दोषान् परिष्कृत्य पठामः चेत् आदर्शपाठकाः भवामः।’ (यदि हम इन दोषों को सुधारकर पढ़ें तो आदर्श पाठक बन जाएँगे।)
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