प्र1.
कक्षायां श्लोकोच्चारण-प्रतियोगितां स्थापयित्वा निर्मित-सूच्यनुगुणम् उच्चारणम् अवलोकनीयम्।
उत्तर
यह करके सीखने का काम है — कक्षा में श्लोक-उच्चारण की प्रतियोगिता कराइए और पहले से बनाई गई एक सूची (मूल्यांकन-तालिका) के अनुसार सबका उच्चारण परखिए।
करने का तरीका —
- श्लोक तय कीजिए — पाठ के पाँचों श्लोक (अथवा योग्यताविस्तर के श्लोक)। हर विद्यार्थी को कम-से-कम एक श्लोक बोलना है।
- सूची बनाइए — कसौटी अपने मन से मत गढ़िए; श्लोक ४ के छह गुण और श्लोक ५ के छह दोष ही सूची हैं। प्रत्येक गुण के 5 अङ्क रखिए (कुल 30) और प्रत्येक दोष पर 1 अङ्क काटिए।
- निर्णायक चुनिए — तीन विद्यार्थी और आचार्य। सब अलग-अलग अंक दें, फिर औसत निकालें।
- अवलोकन लिखिए — हर प्रतिभागी के लिए एक पंक्ति : ‘कौन-सा गुण दिखा, कौन-सा दोष रहा’। यही अगले प्रश्न की तालिका में भरना है।
- अन्त में सुधार का अभ्यास — जिन दोषों की पुनरावृत्ति सबसे अधिक दिखी, कक्षा उन्हीं का दस-दस बार अभ्यास करे।
नमूना मूल्यांकन-सूची (निर्मित-सूची) —
| क्रमः | कसौटी (श्लोक ४ अनुसारम्) | अङ्काः | क्या देखें |
|---|---|---|---|
| १ | माधुर्यम् | 5 | स्वर में मिठास है या रूखापन |
| २ | अक्षरव्यक्तिः | 5 | ‘स’–‘श’, ‘द’–‘ध’, संयुक्ताक्षर साफ़ हैं? |
| ३ | पदच्छेदः | 5 | विराम अर्थ के अनुसार पड़ा या बीच शब्द में |
| ४ | सुस्वरः | 5 | अन्तिम पंक्ति के छात्र तक आवाज़ पहुँची? |
| ५ | धैर्यम् | 5 | बिना अटके, बिना घबराए |
| ६ | लयसमर्थम् | 5 | अनुष्टुप् की लय पूरे श्लोक में बनी रही? |
| — | दोषाः (गीती, शीघ्री, शिरःकम्पी, लिखितपाठकः, अनर्थज्ञः, अल्पकण्ठः) | –1 प्रति दोषः | जो दोष दिखे, उसका नाम लिखिए |
सङ्केतः: प्रतियोगिता से पहले सबको यह सूची दिखा दीजिए। जब विद्यार्थी को पता हो कि किन छह बातों पर परखा जाएगा, तो वह उन्हीं छह पर अभ्यास करता है — और यही इस परियोजना का असली उद्देश्य है, जीतना नहीं।