दीपकम् अध्याय 13 वर्णोच्चारण-शिक्षा १ के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पाठ किस बात का है — पिछले पाठ (सम्यग्वर्णप्रयोगेण…) में देखा था कि शुद्ध उच्चारण क्यों ज़रूरी है। यह पाठ आगे बढ़कर पूछता है — शुद्ध उच्चारण होता कैसे है? पुस्तक का अपना वाक्य है — ‘अतः प्रत्येक-वर्णस्य शुद्धम् उच्चारणं कथं भवतीति अत्र ज्ञास्यामः।’ अर्थात् यह पाठ वर्णोच्चारण की प्रक्रिया का पाठ है, केवल नियम गिनाने का नहीं। उच्चारण में केवल मुँह काम नहीं करता — पुस्तक स्पष्ट कहती है — ‘वर्णानाम् उच्चारणे केवलम् आस्यस्य एव उपयोगः भवति इति – न ।’ शरीर के चार अङ्ग मिलकर काम करते हैं : १. नाभि-प्रदेशः (मांसपेशी-बल-तन्त्रम्), २. उरः (वायु-बल-तन्त्रम्), ३. कण्ठ-बिलः (ध्वनि-तन्त्रम्), ४. आस्यम् (उच्चारण-तन्त्रम्)। आस्य के भीतर दो गुहाएँ हैं — मुखम् और नासिका । वायु का मार्ग — चार चरण — (१) नाभि-प्रदेश की मांसपेशियाँ उरः को दबाती हैं, (२) उरः फेफड़ों की वायु को ऊपर निकालता है, (३) वह वायु ऊपर चलती
अभ्यास
- पाठः
- (क) स्थानम्
- (ख) करणम्
- पारिभाषिक-शब्दार्थान् जानीमः
- वयं शब्दार्थान् जानीमः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अत्र इदम् अवधेयम्
- योग्यताविस्तरः
- आस्यस्य अभ्यन्तरे षट् स्थानानि, षट् करणानि च (वर्ण-चक्रम्)