उत्तरम् — न। (नहीं।)
शुद्धं वाक्यम् — श्वासकोश-स्थितः वायुः ऊर्ध्वं चरन् पूर्वं कण्ठ-बिलं प्राप्नोति, ततः आस्यं प्रविशति। (फेफड़ों की वायु ऊपर चलती हुई पहले कण्ठ-बिल तक पहुँचती है, उसके बाद आस्य में प्रवेश करती है।)
अद्यतन2026-09-05
उत्तरम् — न। (नहीं।)
शुद्धं वाक्यम् — श्वासकोश-स्थितः वायुः ऊर्ध्वं चरन् पूर्वं कण्ठ-बिलं प्राप्नोति, ततः आस्यं प्रविशति। (फेफड़ों की वायु ऊपर चलती हुई पहले कण्ठ-बिल तक पहुँचती है, उसके बाद आस्य में प्रवेश करती है।)
उत्तरम् — न। (नहीं।)
शुद्धं वाक्यम् — सर्वप्रथमं नाभि-प्रदेशे स्थिताः मांसपेश्यः उरः नोदयन्ति। (सबसे पहले नाभि-भाग की मांसपेशियाँ छाती को दबाती हैं, कण्ठ को नहीं।)
उत्तरम् — आम्। (हाँ।)
उत्तरम् — न। (नहीं।)
शुद्धं वाक्यम् — तालव्य-वर्णानाम् उच्चारणार्थं जिह्वायाः मध्य-भागः (जिह्वा-मध्यः) तालु इति स्थानं स्पृशति। (तालव्य वर्णों के उच्चारण के लिए जीभ का मध्य भाग तालु नामक स्थान को छूता है।)
उत्तरम् — आम्। (हाँ।)
उत्तरम् — न। (नहीं।)
शुद्धं वाक्यम् — तत्-तत्-स्थानस्य एव कश्चित् पर-भागः, तत्-तत्-स्थानस्य पूर्व-भागं स्पृशति, समीपं वा याति। (उसी स्थान का कोई पर-भाग, उसी स्थान के पूर्व-भाग को छूता है या उसके पास जाता है।)