यह क्रम कहाँ से आया: पृष्ठ 148 का चित्र ‘आस्ये वर्णानां षट् उच्चारण-स्थानानि’ स्थानों को भीतर से बाहर की ओर गिनता है — १. कण्ठः, २. तालु, ३. मूर्धा, ४. दन्तः, ५. ओष्ठः। प्रश्न इसी क्रम को उलटकर (बहिष्ठात् अन्तः = बाहर से भीतर) लिखने को कहता है, इसलिए उत्तर पुस्तक की गिनती का ठीक विपरीत है।
बाहर से भीतर की ओर मुख के पाँच स्थान। नासिका मुख में नहीं है, अतः इस क्रम में नहीं गिनी जाती।
सावधानी: प्रश्न ‘मुखे उपलभ्यमानानि स्थानानि’ पूछता है — इसलिए नासिका इस सूची में नहीं आएगी। नासिका आस्य का छठा स्थान अवश्य है, पर वह मुख में नहीं, नासिका में है।
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