प्र1.
छात्राः आचार्यं किम् अवदन् ? आचार्यः च किम् उत्तरम् अयच्छत् ?
उत्तर
छात्राः — ‘नमस्ते आचार्य ! अद्य वयम् एकां कथां श्रोतुम् इच्छामः। कृपया कथां श्रावयति वा महोदय !’
आचार्यः — ‘नमस्ते छात्राः ! भवतां मनोरञ्जनार्थम् आदौ कथाश्रवणम्। अनन्तरं पाठनम्।’
हिन्दी में: छात्रों ने कहा — ‘नमस्ते आचार्य! आज हम एक कथा सुनना चाहते हैं। कृपया कथा सुनाइए।’ आचार्य ने उत्तर दिया — ‘नमस्ते छात्रो! तुम्हारे मनोरंजन के लिए पहले कथा सुनना, उसके बाद पढ़ाई।’ फिर वे कहते हैं — ‘तर्हि सावधानं शृण्वन्तु’ (तो ध्यान से सुनो)।
ध्यान दीजिए: ‘श्रावयति’ णिजन्त (प्रेरणार्थक) रूप है — श्रु (सुनना) → श्रावयति (सुनाता है)। ‘श्रोतुम्’ तुमुन्-प्रत्ययान्त = ‘सुनने के लिए’। ‘शृण्वन्तु’ लोट् लकार, प्रथमपुरुष बहुवचन = ‘सुनें’।