कक्षा ८ संस्कृत अध्याय 11 सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः) के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

पाठ का स्थान और रूप — यह पाठ ‘हितोपदेशः’ की वीरवर-कथा का दूसरा भाग है। पहला पृष्ठ (124) पूरे क-भाग का संस्कृत सारांश देता है, फिर कथा संवाद (नाट्य) रूप में चलती है — ‘शक्तिधरः –’, ‘वेदरता –’, ‘वीरवती –’, ‘वीरवरः –’, ‘देवी –’, ‘राजा –’ तथा कोष्ठक में रङ्गसंकेत ( तच्छ्रुत्वा सानन्दम् , देवीपूजां विधाय , स्वगतम् , साष्टाङ्गं प्रणिपत्य , तं वीक्ष्य )। कथा का क्रम — वीरवर घर लौटकर सोए हुए परिवार को जगाता है और राजलक्ष्मी का पूरा संवाद सुनाता है → शक्तिधर स्वयं समझ जाता है कि ‘सर्वप्रिय वस्तु’ वही है और हँसते हुए तैयार हो जाता है → वेदरता और वीरवती भी कुल-धर्म का हवाला देकर सहमत → सब सर्वमङ्गला के मन्दिर जाते हैं → वीरवर पुत्र को अर्पित करता है, फिर स्वयं को, फिर पत्नी और पुत्री भी वैसा ही करती हैं → छिपकर देख रहा राजा शूद्रक भी अपना सर्वस्व देने को उद्यत होता है → देवी प्रकट होकर राजा का हाथ पक

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शब्दःअर्थः (संस्कृतम्)हिन्दी अर्थEnglish
आवासम्गृहम्घरHouse
निद्रालसाम्निद्राप्रभावेण आलस्ययुक्ताम्नींद के कारण अलसाई हुई कोTo the languishing due to sleepiness
दुहितरम्पुत्रीम्बेटी कोDaughter
अवर्णयत्वर्णनम् अकरोत्वर्णन कियाDescribed
सानन्दम्प्रसन्नतयाप्रसन्नता के साथHappily
विनियोगःनियुक्तिःनियुक्त (करना)Utilisation
परमश्लाघ्यःअत्यन्तं प्रशंसनीयःपरम प्रशंसा के योग्यMost appreciable
उत्सृजेत्त्यक्तव्यम्त्यागना चाहिएShould sacrifice
सन्निमित्तेसमुपयुक्ते कारणेबहुत अच्छा कारण होने परHaving good cause
वरम्श्रेयस्करम्प्रशंसनीय, श्रेष्ठPraiseworthy
निस्तारः(ऋणाद्) विमुक्तिः(ऋण) चुकानाRepay
आयतनम्परिसरःआँगन, मन्दिर-परिसरCourtyard
गृह्यताम्स्वीकुरुस्वीकार करोAccept
उत्क्षिप्तःउत्थापितःउठाया गयाLifted upward
प्रत्यक्षीभूतयाप्रत्यक्ष-रूपेण विराजमानयाप्रत्यक्ष रूप से उपस्थित के द्वाराBy the one who has become manifest
राज्यभङ्गःराज्य-नाशनम्राज्य का नाशDownfall of the empire
सत्त्वोत्कर्षेणसत्त्वगुणस्य पराकाष्ठयासत्त्वगुण की पराकाष्ठा सेBy the excellence of purity
वात्सल्येनस्नेहेनवात्सल्यभाव सेWith affection
प्रासादम्राजभवनम्राजभवनPalace
भूपालःराजाराजाKing
  1. पाठे विद्यमानाः प्रश्नाः
  2. पाठे विद्यमानाः प्रश्नाः
  3. वयं शब्दार्थान् जानीमः
  4. अत्र इदम् अवधेयम्
  5. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  6. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  7. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  8. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  9. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  10. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  11. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  12. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  13. योग्यताविस्तरः
  14. योग्यताविस्तरः
  15. योग्यताविस्तरः
  16. परियोजनाकार्यम्
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