दीपकम् अध्याय 11 सन्निमित्ते वरं त्यागः (ख-भागः) के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पाठ का स्थान और रूप — यह पाठ ‘हितोपदेशः’ की वीरवर-कथा का दूसरा भाग है। पहला पृष्ठ (124) पूरे क-भाग का संस्कृत सारांश देता है, फिर कथा संवाद (नाट्य) रूप में चलती है — ‘शक्तिधरः –’, ‘वेदरता –’, ‘वीरवती –’, ‘वीरवरः –’, ‘देवी –’, ‘राजा –’ तथा कोष्ठक में रङ्गसंकेत ( तच्छ्रुत्वा सानन्दम् , देवीपूजां विधाय , स्वगतम् , साष्टाङ्गं प्रणिपत्य , तं वीक्ष्य )। कथा का क्रम — वीरवर घर लौटकर सोए हुए परिवार को जगाता है और राजलक्ष्मी का पूरा संवाद सुनाता है → शक्तिधर स्वयं समझ जाता है कि ‘सर्वप्रिय वस्तु’ वही है और हँसते हुए तैयार हो जाता है → वेदरता और वीरवती भी कुल-धर्म का हवाला देकर सहमत → सब सर्वमङ्गला के मन्दिर जाते हैं → वीरवर पुत्र को अर्पित करता है, फिर स्वयं को, फिर पत्नी और पुत्री भी वैसा ही करती हैं → छिपकर देख रहा राजा शूद्रक भी अपना सर्वस्व देने को उद्यत होता है → देवी प्रकट होकर राजा का हाथ पक
अभ्यास
- पाठे विद्यमानाः प्रश्नाः
- पाठे विद्यमानाः प्रश्नाः
- वयं शब्दार्थान् जानीमः
- अत्र इदम् अवधेयम्
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- योग्यताविस्तरः
- योग्यताविस्तरः
- योग्यताविस्तरः
- परियोजनाकार्यम्