दीपकम् अध्याय 11 अभ्यासात् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) वीरवरो पत्नीं पुत्रं दुहितरञ्च प्राबोधयत्।
उत्तर
उत्तरम् — कः पत्नीं पुत्रं दुहितरञ्च प्राबोधयत् ?
क्यों ‘कः’: रेखांकित पद ‘वीरवरः’ कर्ता है — पुंलिङ्ग, प्रथमा विभक्ति, एकवचन। कर्ता के लिए प्रश्नवाचक सर्वनाम ‘किम्’ का पुंलिङ्ग प्रथमा एकवचन रूप कः है।
हिन्दी: वीरवर ने पत्नी, पुत्र और पुत्री को जगाया → किसने पत्नी, पुत्र और पुत्री को जगाया?
प्र2.
(ख) ततस्ते सर्वे सर्वमङ्गलाया आयतनं गताः।
उत्तर
उत्तरम् — ततस्ते सर्वे कस्याः आयतनं गताः ?
क्यों ‘कस्याः’: ‘सर्वमङ्गलायाः’ स्त्रीलिङ्ग, षष्ठी विभक्ति, एकवचन है (‘सर्वमङ्गला का आँगन/मन्दिर’)। स्त्रीलिङ्ग षष्ठी एकवचन का प्रश्नवाचक रूप कस्याः है।
सन्धि-सङ्केतः: मुद्रित पाठ में ‘सर्वमङ्गलाया आयतनम्’ है — यह ‘सर्वमङ्गलायाः + आयतनम्’ का विसर्ग-लोप रूप है (विसर्ग के बाद स्वर आने पर विसर्ग का लोप)।
प्र3.
(ग) वीरवरः वर्तनस्य निस्तारं पुत्रोत्सर्गेण अकरोत्।
उत्तर
उत्तरम् — वीरवरः वर्तनस्य निस्तारं केन अकरोत् ?
क्यों ‘केन’: ‘पुत्रोत्सर्गेण’ करण कारक है — पुंलिङ्ग, तृतीया विभक्ति, एकवचन (‘पुत्र के त्याग से’)। तृतीया एकवचन का प्रश्नवाचक रूप केन है।
पदच्छेदः: पुत्रोत्सर्गेण = पुत्र + उत्सर्गेण (गुण सन्धि: अ + उ = ओ)।
प्र4.
(घ) राजा स्वप्रासादं प्राविशत्।
उत्तर
उत्तरम् — राजा कं प्राविशत् ?
क्यों ‘कम्’: ‘स्वप्रासादम्’ कर्म है — ‘प्रासाद’ शब्द पुंलिङ्ग है, अतः द्वितीया विभक्ति, एकवचन का रूप ‘प्रासादम्’ और प्रश्नवाचक रूप कम् होगा (नपुंसकलिङ्ग होता तो ‘किम्’ होता)।
हिन्दी: राजा अपने महल में प्रविष्ट हुआ → राजा किसमें (किस भवन में) प्रविष्ट हुआ? ‘प्र + विश्’ धातु द्वितीया लेती है, सप्तमी नहीं।
प्र5.
(ङ) महीपतिः वीरवराय समग्रकर्णाटप्रदेशम् अयच्छत्।
उत्तर
उत्तरम् — महीपतिः कस्मै समग्रकर्णाटप्रदेशम् अयच्छत् ?
क्यों ‘कस्मै’: ‘वीरवराय’ सम्प्रदान कारक है — पुंलिङ्ग, चतुर्थी विभक्ति, एकवचन (‘वीरवर को/के लिए’)। चतुर्थी एकवचन का प्रश्नवाचक रूप कस्मै है। ‘दा’ (देना) धातु के साथ जिसे दिया जाए, वह सदा चतुर्थी में आता है — ‘सम्प्रदाने चतुर्थी’।
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