प्र1.
उदाहरणम् — धन्यः अहम् स्वामिजीवितरक्षार्थं विनियुक्तः। → शक्तिधराय ‖ (क) भगवति ! न मे प्रयोजनं राज्येन जीवितेन वा।
उत्तर
उत्तरम् — शूद्रकाय (राज्ञे शूद्रकाय)
कैसे पहचानें: यह वाक्य राजा शूद्रक बोल रहा है — देवी के प्रत्यक्ष होने पर वह साष्टाङ्ग प्रणाम करके कहता है ‘भगवति ! न मे प्रयोजनं राज्येन जीवितेन वा’ (हे भगवति! मुझे न राज्य से प्रयोजन है, न जीवन से)। अतः ‘मे’ (मेरा/मुझे) पद राजा शूद्रक के लिए प्रयुक्त हुआ है।
व्याकरण-सङ्केतः: उत्तर चतुर्थी एकवचन में देना है (उदाहरण ‘शक्तिधराय’ की तरह) — ‘किसके लिए प्रयुक्त हुआ’। मे — अस्मद् शब्द का षष्ठी/चतुर्थी एकवचन का लघु रूप (= मम / मह्यम्)।