प्र1.
यथा — कृतो मया गृहीतस्वामिवर्तनस्य निस्तारो स्वपुत्रोत्सर्गेण। → गृहीतस्वामिवर्तनस्य निस्तारो मया स्वपुत्रोत्सर्गेण कृतः। ‖ (क) नेदानीं राज्यभङ्गस्ते भविष्यति।
उत्तर
अन्वयः — इदानीं ते राज्यभङ्गः न भविष्यति।
अन्वय कैसे बनता है: संस्कृत का पदविन्यास मुक्त है, पर अन्वय में क्रम होता है — कर्ता/कर्म → अन्य पद → क्रियापद अन्त में। यहाँ सन्धियाँ भी खोल देनी हैं : ‘नेदानीम्’ = न + इदानीम्, ‘राज्यभङ्गस्ते’ = राज्यभङ्गः + ते। कर्ता ‘राज्यभङ्गः’ है, ‘ते’ (= तव) उसका सम्बन्धकारक विशेषण, और ‘न भविष्यति’ क्रिया अन्त में।
हिन्दी अर्थ: अब तुम्हारे राज्य का नाश नहीं होगा। (देवी का राजा शूद्रक को दिया वचन।)