दीपकम् अध्याय 11 वयं शब्दार्थान् जानीमः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
मातृभाषया अर्थं लिखत — (प्रथमा सारणी, पृष्ठ 127; अन्तिमः स्तम्भः रिक्तः अस्ति, तत्र स्वमातृभाषया अर्थः लेखनीयः।)
उत्तर

यह अन्तिम स्तम्भ अपनी मातृभाषा में भरना है (हिन्दी, मराठी, बांग्ला, तमिल… जो भी आपकी हो)। नीचे हिन्दी-माध्यम के विद्यार्थियों के लिए पृष्ठ 127 की पूरी सारणी दी गई है — पहले पुस्तक का संस्कृत-पर्याय, फिर हिन्दी अर्थ और अंग्रेज़ी अर्थ।

शब्दःअर्थः (संस्कृतम्)हिन्दीEnglish
आवासम्गृहम्घरHouse
निद्रालसाम्निद्राप्रभावेण आलस्ययुक्ताम्नींद के कारण अलसाई हुई कोTo the languishing due to sleepiness
दुहितरम्पुत्रीम्बेटी कोDaughter
अवर्णयत्वर्णनम् अकरोत्वर्णन कियाDescribed
सानन्दम्प्रसन्नतयाप्रसन्नता के साथHappily
आहअकथयत्कहाSaid
विनियोगःनियुक्तिःनियुक्त (करना), लगानाUtilisation
परमश्लाघ्यःअत्यन्तं प्रशंसनीयःपरम प्रशंसा के योग्यMost appreciable
उत्सृजेत्त्यक्तव्यम्त्यागना चाहिएShould sacrifice
सन्निमित्तेसमुपयुक्ते कारणेबहुत अच्छा कारण होने परHaving good cause
वरम्श्रेयस्करम्प्रशंसनीय, अच्छाPraiseworthy
ब्रवीतिवदतिकहता हैSays
आचरितव्यम्आचरणीयम्आचरण करना चाहिएShould follow
निस्तारः(ऋणाद्) विमुक्तिःचुकाना, छुटकाराRepay
आयतनम्परिसरःआँगन (मन्दिर-परिसर)Courtyard
गृह्यताम्स्वीकुरुस्वीकार करोAccept
प्रयोगः (पाठात्): ‘स्वआवासं गत्वा’ (अपने घर जाकर) · ‘निद्रालसां पत्नीं … प्राबोधयत्’ · ‘अखिलराजलक्ष्मीसंवादं च अवर्णयत्’ · ‘(तच्छ्रुत्वा सानन्दम्)’ · ‘मम सर्वस्वविनियोगः परमश्लाघ्यः’ · ‘धनानि जीवितञ्चैव परार्थे प्राज्ञ उत्सृजेत्’ · ‘सन्निमित्ते वरं त्यागो’ · ‘गृहीतस्वामिवर्तनस्य कथं निस्तारो भवेत्’ · ‘सर्वमङ्गलाया आयतनं गताः’ · ‘गृह्यतामेष मद्दत्त उपहारः’।
प्र2.
मातृभाषया अर्थं लिखत — (द्वितीया सारणी, पृष्ठ 128; अन्तिमः स्तम्भः रिक्तः अस्ति, तत्र स्वमातृभाषया अर्थः लेखनीयः।)
उत्तर

पृष्ठ 128 की सारणी के नौ शब्द नीचे दिए गए हैं — इनमें से अधिकांश पाठ के अन्तिम भाग (देवी के प्रकट होने और राजा के वरदान वाले अंश) के शब्द हैं।

शब्दःअर्थः (संस्कृतम्)हिन्दीEnglish
प्रयोजनम्लक्ष्यम्उद्देश्यPurpose
उत्क्षिप्तःउत्थापितःउठाया गयाLifted upward
प्रत्यक्षीभूतयाप्रत्यक्ष-रूपेण विराजमानयाप्रत्यक्ष रूप से उपस्थित के द्वाराBy the one who has become manifest
राज्यभङ्गःराज्य-नाशनम्राज्य का नाशDownfall of the empire
सत्त्वोत्कर्षेणसत्त्वगुणस्य पराकाष्ठयासत्त्वगुण की पराकाष्ठा सेBy the excellence of purity
वात्सल्येनस्नेहेनवात्सल्यभाव सेWith affection
उक्त्वाकथयित्वाकहकरAfter saying
प्रासादम्राजभवनम्राजभवनPalace
भूपालःराजाराजाKing
ध्यातव्यम्: उत्क्षिप्तः अभ्यास-प्रश्न ५ (छ) ‘स्वशिरश्छेदनार्थम्उत्क्षिप्तः’ में आया है — ‘अपना सिर काटने के लिए (खड्ग) ऊपर उठाया गया’। प्रत्यक्षीभूतया तृतीया एकवचन (स्त्रीलिङ्ग) है — ‘प्रत्यक्ष हो चुकी भगवती के द्वारा’। उक्त्वा ‘इत्युक्त्वा’ (= इति + उक्त्वा) में मिलता है — क्त्वा-प्रत्ययान्त अव्यय।
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