प्र1.
‘वयं शब्दार्थान् जानीमः’ — पृष्ठ 140–141 की पूरी शब्दार्थ-सारणी (शब्दः · अर्थः · हिन्दी · English)।
उत्तर
नीचे पुस्तक की दोनों पृष्ठों की सारणी ज्यों-की-त्यों दी गई है — पहले संस्कृत पर्याय, फिर हिन्दी और अंग्रेज़ी अर्थ।
| शब्दः | अर्थः (संस्कृतम्) | हिन्दी | English |
|---|---|---|---|
| ऋत्विजः | पुरोहिताः | पुरोहित | Priests |
| करतालम् | करताडनध्वनिः | ताली | Clap |
| अधीषे | पठसि | तुम पढ़ते हो | You read |
| श्वजनः | शुनकः / कुक्कुरः | कुत्ता | Dog |
| सकलम् | सम्पूर्णम् | पूरा | Entire |
| शकलम् | खण्डम् | टुकड़ा | Fragment |
| सकृत् | एकवारम् | एक बार | Once |
| शकृत् | मलम् | विष्ठा (मल) | Faeces |
| अव्यक्ताः | अस्पष्टाः (अल्पप्रयत्नयुक्ताः) | अस्पष्ट (आवश्यकता से कम प्रयत्न करना) | Unclear (Usage of less effort as supposed to be used) |
| पीडिताः | बाधिताः (अधिकप्रयत्नयुक्ताः) | पीड़ित (आवश्यकता से अधिक प्रयत्न से युक्त) | Afflicted (Usage of more effort as supposed to be used) |
| महीयते | पूज्यते / सम्मानं लभते | सम्मानित होता है | Honoured / respected |
| व्याघ्री | शार्दूला (स्त्रीव्याघ्रः) | बाघिन | Tigress |
| दंष्ट्राभ्याम् | दन्ताभ्याम् | दाँतों से | With the fangs |
| पीडयेत् | हिंसनं कुर्यात् | कष्ट दे | May cause pain |
| भीता | भयेन पूरिता | डरी हुई | Afraid |
| प्रयोजयेत् | उच्चारणं / प्रयोगं कुर्यात् | उच्चारण / प्रयोग कर सकता है | May pronounce / apply |
| माधुर्यम् | मधुरभावः | मिठास / माधुर्य | Sweetness |
| अक्षरव्यक्तिः | अक्षराणां स्फुटतया उच्चारणम् | अक्षर स्पष्टता | Clarity of letters |
| सुस्वरः | शोभनः स्वरः | मधुर स्वर | Pleasant voice |
| धैर्यम् | विश्वासः | आत्मविश्वास | Courage / Self-Confidence |
| पाठकाः | पठनसम्बन्धिनः | पढ़ने से सम्बन्धित | Related to Reading |
| शीघ्री | यः वेगेन पठति | तेज़ गति से पढ़ने वाला | Fast reader |
| शिरःकम्पी | यः शिरः चालयन् पठति | सिर हिलाकर पढ़ने वाला | One who nods head and reads |
| अनर्थज्ञः | यः अर्थं न जानाति | जो अर्थ नहीं जानता | Who does not understand meaning |
| अल्पकण्ठः | दुर्बलध्वनियुक्तः | धीमे स्वर वाला | Weak-voiced |
सबसे ज़रूरी दो पंक्तियाँ: इस पाठ की पूरी कसौटी सारणी की इन्हीं दो पंक्तियों में है — अव्यक्ताः = अल्पप्रयत्नयुक्ताः (ज़रूरत से कम प्रयत्न) और पीडिताः = अधिकप्रयत्नयुक्ताः (ज़रूरत से अधिक प्रयत्न)। श्लोक ३ इन्हीं दोनों को मना करता है — ‘नाव्यक्ता न च पीडिताः’। इन्हें रट लीजिए, पूरा पाठ खुल जाएगा।
प्रयोगः (पाठात्): ‘ऋत्विजः मन्त्रे स्वरं परिवर्तितवन्तः’ · ‘यद्यपि बहु न अधीषे’ · ‘व्याघ्री यथा हरेत् पुत्रान् दंष्ट्राभ्यां न च पीडयेत्’ · ‘भीता पतनभेदाभ्यां तद्वद् वर्णान् प्रयोजयेत्’ · ‘सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते’।