प्र1.
(क) अक्षर/मात्रापरिवर्तनेन अर्थपरिवर्तनं भवति — यथा : मित्रम् (बन्धुः) – मित्रः (सूर्यः), फलम् (आम्रादिफलम्) – पलम् (मांसः), पुरुषः (जनः) – परुषः (कठोरः), अवदानम् (योगदानम्) – अवधानम् (एकाग्रता), प्रतिपलम् (प्रतिक्षणम्) – प्रतिफलम् (परिणामः), नदति (ध्वनिं करोति) – नुदति (प्रेरयति), ददाति (दानं करोति) – दधाति (धारणं करोति)। — एतान् पठत बोधत च।
उत्तर
पुस्तक के सातों युग्म नीचे हैं। हर युग्म में एक अक्षर या एक मात्रा ही बदली है, फिर भी अर्थ पूरा बदल गया है।
| शुद्ध शब्द | अर्थः | बदला हुआ शब्द | अर्थः | क्या बदला |
|---|---|---|---|---|
| मित्रम् | बन्धुः (दोस्त) | मित्रः | सूर्यः (सूर्य) | लिङ्ग — नपुंसक से पुंल्लिङ्ग |
| फलम् | आम्रादिफलम् (फल) | पलम् | मांसः (मांस) | फ् → प् (महाप्राण से अल्पप्राण) |
| पुरुषः | जनः (मनुष्य) | परुषः | कठोरः (कठोर) | ‘उ’ मात्रा → ‘अ’ |
| अवदानम् | योगदानम् (योगदान) | अवधानम् | एकाग्रता (ध्यान) | द् → ध् (अल्पप्राण से महाप्राण) |
| प्रतिपलम् | प्रतिक्षणम् (हर क्षण) | प्रतिफलम् | परिणामः (परिणाम) | प् → फ् |
| नदति | ध्वनिं करोति (गरजता है) | नुदति | प्रेरयति (प्रेरित करता है) | ‘अ’ → ‘उ’ मात्रा |
| ददाति | दानं करोति (देता है) | दधाति | धारणं करोति (धारण करता है) | द् → ध् |
क्या सीखने को मिला: ध्यान दीजिए कि बदलाव किस-किस तरह का है — कहीं महाप्राण और अल्पप्राण का (प/फ, द/ध), कहीं मात्रा का (उ/अ), कहीं केवल लिङ्ग का (मित्रम्/मित्रः)। ये ठीक वही चूकें हैं जो जल्दबाज़ी में या अव्यक्त उच्चारण में हो जाती हैं। इसीलिए श्लोक ४ ‘अक्षरव्यक्तिः’ को पाठक का गुण मानता है — हर अक्षर अलग और साफ़ सुनाई देना चाहिए।
वाक्य में देखिए, तब भेद पक्का होगा:
• मित्रं मे प्रियम् अस्ति। (मेरा मित्र प्रिय है।) — मित्रः प्राच्यां दिशि उदेति। (सूर्य पूर्व दिशा में उगता है।)
• सः पुरुषः साधुः अस्ति। (वह मनुष्य सज्जन है।) — तस्य वचनं परुषम् आसीत्। (उसका वचन कठोर था।)
• छात्रः पाठे अवधानं करोति। (छात्र पाठ में ध्यान लगाता है।) — तस्य अवदानं महत्। (उसका योगदान बड़ा है।)
• मित्रं मे प्रियम् अस्ति। (मेरा मित्र प्रिय है।) — मित्रः प्राच्यां दिशि उदेति। (सूर्य पूर्व दिशा में उगता है।)
• सः पुरुषः साधुः अस्ति। (वह मनुष्य सज्जन है।) — तस्य वचनं परुषम् आसीत्। (उसका वचन कठोर था।)
• छात्रः पाठे अवधानं करोति। (छात्र पाठ में ध्यान लगाता है।) — तस्य अवदानं महत्। (उसका योगदान बड़ा है।)
Try This: इसी ढंग के कुछ और युग्म खोजिए और कक्षा में सुनाइए — जैसे कमलम् (कमल) / कलमम् (कलम), दिनम् (दिन) / दीनम् (दरिद्र), अनिलः (वायु) / अनलः (अग्नि)। इनका अर्थ शब्दकोश में जाँच लीजिए।