दीपकम् अध्याय 12 योग्यताविस्तरः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) अक्षर/मात्रापरिवर्तनेन अर्थपरिवर्तनं भवति — यथा : मित्रम् (बन्धुः) – मित्रः (सूर्यः), फलम् (आम्रादिफलम्) – पलम् (मांसः), पुरुषः (जनः) – परुषः (कठोरः), अवदानम् (योगदानम्) – अवधानम् (एकाग्रता), प्रतिपलम् (प्रतिक्षणम्) – प्रतिफलम् (परिणामः), नदति (ध्वनिं करोति) – नुदति (प्रेरयति), ददाति (दानं करोति) – दधाति (धारणं करोति)। — एतान् पठत बोधत च।
उत्तर

पुस्तक के सातों युग्म नीचे हैं। हर युग्म में एक अक्षर या एक मात्रा ही बदली है, फिर भी अर्थ पूरा बदल गया है।

शुद्ध शब्दअर्थःबदला हुआ शब्दअर्थःक्या बदला
मित्रम्बन्धुः (दोस्त)मित्रःसूर्यः (सूर्य)लिङ्ग — नपुंसक से पुंल्लिङ्ग
फलम्आम्रादिफलम् (फल)पलम्मांसः (मांस)फ् → प् (महाप्राण से अल्पप्राण)
पुरुषःजनः (मनुष्य)परुषःकठोरः (कठोर)‘उ’ मात्रा → ‘अ’
अवदानम्योगदानम् (योगदान)अवधानम्एकाग्रता (ध्यान)द् → ध् (अल्पप्राण से महाप्राण)
प्रतिपलम्प्रतिक्षणम् (हर क्षण)प्रतिफलम्परिणामः (परिणाम)प् → फ्
नदतिध्वनिं करोति (गरजता है)नुदतिप्रेरयति (प्रेरित करता है)‘अ’ → ‘उ’ मात्रा
ददातिदानं करोति (देता है)दधातिधारणं करोति (धारण करता है)द् → ध्
क्या सीखने को मिला: ध्यान दीजिए कि बदलाव किस-किस तरह का है — कहीं महाप्राण और अल्पप्राण का (प/फ, द/ध), कहीं मात्रा का (उ/अ), कहीं केवल लिङ्ग का (मित्रम्/मित्रः)। ये ठीक वही चूकें हैं जो जल्दबाज़ी में या अव्यक्त उच्चारण में हो जाती हैं। इसीलिए श्लोक ४ ‘अक्षरव्यक्तिः’ को पाठक का गुण मानता है — हर अक्षर अलग और साफ़ सुनाई देना चाहिए।
वाक्य में देखिए, तब भेद पक्का होगा:
मित्रं मे प्रियम् अस्ति। (मेरा मित्र प्रिय है।) — मित्रः प्राच्यां दिशि उदेति। (सूर्य पूर्व दिशा में उगता है।)
• सः पुरुषः साधुः अस्ति। (वह मनुष्य सज्जन है।) — तस्य वचनं परुषम् आसीत्। (उसका वचन कठोर था।)
• छात्रः पाठे अवधानं करोति। (छात्र पाठ में ध्यान लगाता है।) — तस्य अवदानं महत्। (उसका योगदान बड़ा है।)
Try This: इसी ढंग के कुछ और युग्म खोजिए और कक्षा में सुनाइए — जैसे कमलम् (कमल) / कलमम् (कलम), दिनम् (दिन) / दीनम् (दरिद्र), अनिलः (वायु) / अनलः (अग्नि)। इनका अर्थ शब्दकोश में जाँच लीजिए।
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