दीपकम् अध्याय 12 अभ्यासात् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अधोलिखितानि लक्षणानि पाठकस्य गुणाः वा दोषाः वा इति विभजत — अक्षरव्यक्तिः, शीघ्री, लिखितपाठकः, लयसमर्थम्, अनर्थः, अल्पकण्ठः, माधुर्यम्, गीती, पदच्छेदः, शिरःकम्पी, अनर्थज्ञः, धैर्यम्, सुस्वरः। (यथा — गुणाः : अक्षरव्यक्तिः · दोषाः : शीघ्री)
उत्तर
गुणाःदोषाः
यथा — अक्षरव्यक्तिःशीघ्री
माधुर्यम्गीती
पदच्छेदःशिरःकम्पी
सुस्वरःलिखितपाठकः
धैर्यम्अनर्थज्ञः
लयसमर्थम्अल्पकण्ठः
अनर्थः
छाँटने का नियम: जो शब्द श्लोक ४ में आया है वह गुण है, और जो श्लोक ५ में आया है वह दोष है — बस श्लोक याद हों तो यह प्रश्न अपने-आप हल हो जाता है।
• श्लोक ४ (गुण) — माधुर्यम्, अक्षरव्यक्तिः, पदच्छेदः, सुस्वरः, धैर्यम्, लयसमर्थम्।
• श्लोक ५ (दोष) — गीती, शीघ्री, शिरःकम्पी, लिखितपाठकः, अनर्थज्ञः, अल्पकण्ठः।
पाठ-सूचना: पुस्तक की सूची में ‘अनर्थः’ और ‘अनर्थज्ञः’ — दोनों छपे हैं, इसलिए कुल तेरह शब्द हैं। श्लोक ५ में मूल पद ‘अनर्थज्ञः’ ही है (जो अर्थ नहीं जानता)। ‘अनर्थः’ का अर्थ है अर्थ का अभाव — वह भी पढ़ने का दोष ही है, इसलिए उसे भी दोषाः स्तम्भ में रखिए। इस कारण गुण छह और दोष सात बनते हैं।
Try This: अब अपनी कक्षा में किसी मित्र को श्लोक पढ़ते हुए सुनिए और इसी तालिका के आधार पर बताइए कि उसमें कौन-से गुण दिखे और कौन-सा दोष। यही काम आगे परियोजनाकार्यम् में करना है।
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