प्र1.
सर्वैः एकचित्तीभूय ……………… उड्डीयताम् ।
उत्तर
उत्तरम् — सर्वैः एकचित्तीभूय जालमादाय उड्डीयताम् ।
[हिन्दी — सबको एक चित्त होकर जाल लेकर उड़ जाना चाहिए।]
व्याकरणम्: ‘जालमादाय’ = जालम् + आदाय; आदाय = आ + दा + ल्यप् (लेकर)। ‘उड्डीयताम्’ कर्मवाच्य लोट् लकार का रूप है — ‘उड़ा जाए’।