दीपकम् अध्याय 2 अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पाठ का मूल वाक्य — “लघूनाम् अपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका भवति” (पृष्ठ 13)। छोटी-छोटी, दुर्बल वस्तुओं का भी संगठन बड़ा काम कर देता है। शीर्षक में यही बात हितोपदेश के श्लोक-शब्दों में है — अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका । बाहरी कथा (पृष्ठ 10–11) — कुछ मित्र ग्रीष्मावकाश में देवभूमि उत्तराखण्ड जाते हैं। श्रीकेदारक्षेत्र चढ़ते समय तेज़ वृष्टि होती है, अन्धकार फैलता है, नदी के वेग से सेतु टूट जाता है और पर्वतस्खलन हो जाता है। सब रोने लगते हैं; केवल नायक सुधीरः धैर्य नहीं छोड़ता। भीतरी कथा (पृष्ठ 12–14) — गोदावरी-तीर के शाल्मली वृक्ष पर व्याध चावल बिखेरकर जाल फैलाता है। कपोतराज चित्रग्रीवः मना करता है, पर लोभ से खिंचे कपोत उतर पड़ते हैं और बँध जाते हैं। चित्रग्रीव तिरस्कार नहीं करता — सबको एकचित्त होकर जाल-सहित उड़ जाने का आदेश देता है, और मूषकराज हिरण्यकः उनके पाश काट देता है। नायकत्
अभ्यास
- पाठ्य-प्रश्नाः (संवादः)
- पाठ्य-प्रश्नाः (कथा-भागः)
- वयं शब्दार्थान् जानीमः
- अत्र इदम् अवधेयम्
- अधः प्रदत्तानि ल्यप्-प्रत्ययान्तानि पदानि ध्यानेन पठत अवगच्छत च
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- योग्यताविस्तरः
- परियोजनाकार्यम्