यह उदाहरण पुस्तक में दिया हुआ है। इससे विधि समझ लीजिए — पहले क्रियापद का लकार, पुरुष और वचन देखिए, फिर उसी के अनुरूप कर्ता चुनकर एक छोटा-सा नया वाक्य बनाइए।
अतः कर्ता भी बहुवचन चाहिए → दुर्जनाः
वाक्यम् — दुर्जनाः सज्जनं तिरस्कुर्वन्ति ।
अद्यतन2026-09-05
यह उदाहरण पुस्तक में दिया हुआ है। इससे विधि समझ लीजिए — पहले क्रियापद का लकार, पुरुष और वचन देखिए, फिर उसी के अनुरूप कर्ता चुनकर एक छोटा-सा नया वाक्य बनाइए।
नमूना वाक्यम् — छात्रैः गृहकार्यं सम्यक् क्रियताम् ।
[हिन्दी — छात्रों द्वारा गृहकार्य भली-भाँति किया जाए।]
नमूना वाक्यम् — मम मित्रं वाराणस्यां निवसति ।
[हिन्दी — मेरा मित्र वाराणसी में रहता है।]
नमूना वाक्यम् — गुरुः शिष्यम् आह — “सत्यं वद, धर्मं चर” इति ।
[हिन्दी — गुरु शिष्य से कहते हैं — “सच बोलो, धर्म का आचरण करो।”]
नमूना वाक्यम् — कृषकः तीक्ष्णेन शस्त्रेण वृक्षस्य शुष्कां शाखां छेत्स्यति ।
[हिन्दी — किसान तेज़ हथियार से पेड़ की सूखी शाखा काटेगा।]
नमूना वाक्यम् — सखे ! त्वम् अद्य मया सह किमर्थं न सम्भाषसे ?
[हिन्दी — मित्र! तुम आज मेरे साथ बात क्यों नहीं कर रहे?]
नमूना वाक्यम् — पिता पुत्रम् अब्रवीत् — “परिश्रमेण एव सफलता लभ्यते” इति ।
[हिन्दी — पिता ने पुत्र से कहा — “परिश्रम से ही सफलता मिलती है।”]
नमूना वाक्यम् — क्षुधार्तः बालकः मातरम् उपसर्पति ।
[हिन्दी — भूख से पीड़ित बालक माता के पास जाता है।]
नमूना वाक्यम् — विपत्काले धैर्यम् एव युज्यते, न तु विषादः ।
[हिन्दी — विपत्ति के समय धैर्य ही उचित है, विषाद नहीं।]
परिचर्चा कैसे कीजिए — कक्षा को चार-चार के दल में बाँटिए। हर दल कथा से एक शिक्षा चुने, उसे कथा की एक घटना से सिद्ध करे, और फिर अपने विद्यालय या मुहल्ले से उसका एक उदाहरण दे। अन्त में शिक्षक श्यामपट्ट पर सभी शिक्षाओं की सूची बना दें। एक अच्छे उत्तर में तीनों होने चाहिए — शिक्षा, कथा का प्रमाण, अपने जीवन का उदाहरण।
| शिक्षा | कथायाः प्रमाणम् | स्वजीवने प्रयोगः |
|---|---|---|
| संगठन में शक्ति है | अकेला कपोत जाल नहीं उठा सका; सब मिलकर जाल-सहित उड़ गए | विद्यालय की सफ़ाई या वृक्षारोपण — सब मिलकर करें तो एक घण्टे का काम |
| लोभ विपत्ति का द्वार है | निर्जन वन में चावल देखकर कपोत लालच में उतर पड़े | बिना जाने किसी अनजान लिंक या मुफ़्त उपहार पर क्लिक न करना |
| विपत्ति में धैर्य, दोषारोपण नहीं | चित्रग्रीव ने दर्पी कपोत का तिरस्कार नहीं किया, उपाय सोचा | परीक्षा में अंक कम आने पर एक-दूसरे को दोष देने के बजाय कमी ढूँढ़ना |
| नेता पहले अपने साथियों को देखता है | “पूर्वं मदाश्रितानाम् एतेषां पाशान् छिनत्तु, पश्चात् मम” | दल-नायक पहले सब सदस्यों को काम और श्रेय बाँटे |
| सच्चा मित्र संकट में काम आता है | हिरण्यक ने अपने मित्रों-सहित सब कपोतों के बन्धन काट दिए | बीमार या पिछड़ रहे सहपाठी की पढ़ाई में सहायता करना |
| बड़ों/अनुभवी की बात सुननी चाहिए | चित्रग्रीव ने चेताया, कपोतों ने अवज्ञा की और बँध गए | यात्रा या खेल में शिक्षक-अभिभावक की चेतावनी को हल्के में न लेना |